एनर्जी बार की तरह काम करता था महुआ का 'लाटा', जानिए यूपी के इस पारंपरिक व्यंजन की खासियत

उत्तर प्रदेश की पारंपरिक संस्कृति और ग्रामीण खान-पान में महुआ का खास स्थान है। आज के समय में भले ही लोग फिटनेस और एनर्जी के लिए आधुनिक एनर्जी बार या प्रोटीन सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल करते हों, लेकिन गांवों में सदियों से महुआ से बना 'लाटा' एनर्जी बूस्टर के रूप में खाया जाता रहा है। गुमनाम जायका के सीरीज में हम यूपी की पारंपरिक डिश महुआ का लाटा के बारे में बताने जा रहे हैं। हालांकि मॉडर्न जमाने में यह कोई इकलौती डिश नहीं जो अब देखने को नहीं मिलती है। ऐसी तमाम सारे देसी व्यंजन हैं, जो दादी-नानी के दौर में खाने को मिलते थे। नीचे लेख में पढ़ें महुआ का लाटा क्या है और इसकी खासियत क्या है?
महुआ का 'लाटा' क्या है और कैसे बनता है?
महुआ का लाटा मुख्य रूप से सूखे महुआ के फूलों, अलसी (ऑप्शनल) और तिल को मिलाकर तैयार किया जाता है। इसे बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह देसी और प्राकृतिक होती है।

सबसे पहले सूखे महुआ को साफ करके हल्की आंच पर भूरा होने तक भुना जाता है। इसके बाद अलसी और तिल को भूनकर महुआ के साथ मिलाया जाता है। इसके बाद इसे ओखली में कूटा जाता है। इसके बाद इसे स्टोर करके रखा जाता है।
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महुआ का 'लाटा' एनर्जी बार की तरह कैसे काम करती है?
आज के बाजार में बिकने वाले एनर्जी बार रासायनिक रूप से तैयार होते हैं, जबकि महुआ का लाटा पूरी तरह पोषक तत्वों से भरपूर एक प्राकृतिक एनर्जी बार है। इसमें प्राकृतिक शर्करा और कार्बोहाइड्रेट भरपूर मात्रा में होते हैं, जो खेतों में काम करने वाले किसानों और मेहनत करने वाले लोगों को तुरंत ताकत देते हैं। अलसी और तिल के मिलने से इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, फाइबर और कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाती है, जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं।

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महुआ का 'लाटा' का सांस्कृतिक और पारंपरिक महत्व
महुआ का 'लाटा' सिर्फ स्वाद या सेहत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी ग्रामीण संस्कृति और प्राचीन जीवनशैली का एक अनमोल हिस्सा है।

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हमारे बुजुर्गों की जीवनशैली और खान-पान का यह ऐसा नायाब नमूना है जो कम संसाधनों में भी शरीर को ताकत देता था। हालांकि, आधुनिकता की दौड़ में नई पीढ़ी इस पारंपरिक व्यंजन से दूर होती जा रही है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में कुछ जगहों पर आज भी ठंड के दिनों में इसका स्वाद और इसकी महक मिलती है।
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यूपी की इस पारंपरिक डिश के बारे में मुझे मेरी मां से पता चला है। अगर आप पारंपरिक व्यंजनों के बारे में जानना चाहती हैं, जो आज के समय में गुम हो गए हैं, तो गुमनाम जायका सीरीज इसी पर आधारित हैं। इसमें न केवल यूपी बल्कि अन्य राज्यों के गायब हो रहे व्यंजनों के बारे में बताया जाता है।
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