सिख धर्म के पहले गुरु थे गुरु नानक जी और उनके जन्मदिन पर देशभर में गुरु पर्व का त्योहार मनाया जाता है। इस साल 19 नवंबर को यह त्योहार मनाया जाएगा। इस दिन लोग गुरुद्वारों में मत्था टेकने जरूर जाते हैं। बता दें कि भारत में कई ऐसे प्रसिद्ध गुरुद्वारे हैं, जहां दूर-दूर से लोग आते हैं, लेकिन इनमें अमृतसर का गोल्डन टेंपल काफी मशहूर है। गोल्डन टेंपल काफी भव्य है और, इसके साथ ही यहां हजारों लोगों को लंगर का भी आयोजित किया जाता है। गोल्डन टेंपल में मौजूद सामुदायिक रसोई घर दुनिया के सबसे बड़े रसोईघरों में से एक है। 

गोल्डन टेंपल में होने वाले लंगर को गुरु का लंगर भी कहा जाता है। सिख धर्म के उपदेश के आधार पर, गुरुद्वारे में हर तरफ से प्रवेश द्वार हैं, जो इस बात को दर्शाता है कि यहां जाति, रंग, धर्म या फिर जेंडर की परवाह किए बिना हर किसी का स्वागत किया जाता है। बिना किसी भेदभाव के यहां सभी के साथ समान व्यवहार किया जाता है और उसकी सेवा की जाती है। गोल्डन टेंपल के लंगर में हमेशा स्वादिष्ट और पेट भर भोजन कराया जाता है। यहां लोगों की सेवा में ज्यादातर वहां के स्वयंसेवक मौजूद होते हैं। लोगों को खाना खिलाने के अलावा वह रसोई से जुड़े हर काम को पूरे मन से करते हैं। गोल्डन टेंपल में होने वाले लंगर से जुड़े कई ऐसे रोचक तथ्य है, जो आपको जरूर जानना चाहिए।

किसी के साथ नहीं होता कोई भेदभाव

golden temple image

गुरुद्वारा में हर किसी के साथ समान व्यवहार किए जाते हैं। कहा जाता है कि एक सामान्य दिन में 50,000-60,000 से अधिक लोग गोल्डन टेंपल में लंगर खाने आते हैं, लेकिन धार्मिक समारोहों के दौरान यह संख्या बढ़ जाती है। धार्मिक समारोहों में यहां 100000 से अधिक लोग लंगर खाने आते हैं। यहां परोसा जाने वाला खाना पूरी तरह से सादा और शाकाहारी होता है। यही नहीं स्वादिष्ट होने के साथ-साथ यह बहुत ही पौष्टिक भी होता है। गोल्डन टेंपल में 2 सामुदायिक हॉल हैं, जहां सभी फर्श पर बैठकर लंगर खाते हैं। स्वयंसेवक हॉल में मौजूद सभी लोगों को भोजन परोसने के बाद जोर से चिल्लाते हैं 'जो बोले सो निहाल' और उनके बाद लोग बोलते हैं 'सत श्री अकाल'। इसके बाद लोग भोजन करना शुरू करते हैं।

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300 से ज्यादा सेवादार होते हैं मौजूद

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गोल्डन टेंपल में होने वाले लंगर में बड़ी संख्या में लोग भोजन करते हैं। लोगों तक भोजन पहुंचाने में बड़ी टास्क की जरूरत होती है। लगभग 300 सेवा दार के अलावा गोल्डन टेंपल में सैकड़ों अन्य स्वयंसेवक भी होते हैं, जो हर चक्कर के बाद भोजन बनाने ,परोसने और बर्तन धोने का काम करते हैं। बर्तनों को धोने के अलावा खाना बनाने तक में हाइजीन का खास ख्याल रखा जाता है। वहीं ये स्वयंसेवक गोल्डन टेंपल में कुछ घंटों के लिए काम करते हैं, और कुछ लोग सेवा करने के लिए कई दिनों तक जागते रहते हैं।

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मुफ्त में मिलता है हजारों लोगों को खाना

langer in golden temple

बड़ी संख्या में लंगर खाने वाले लोग यहां दान भी करते हैं। गुरुद्वारे में प्राप्त किए जाने वाले डोनेशन के जरिए लंगर चलाया जाता है। यहां आने वाले लोगों को प्रसाद के रूप में लंगर खिलाया जाता है। लोग डोनेशन के रूप में कैश या अन्य तरीका भी आजमाते हैं। आमतौर पर गोल्डन टेंपल में लंगर के सभी हाथ से बने होते हैं, लेकिन गुरुद्वारा में एक ऑटोमेटिक रोटी मशीन भी है, जिसमें प्रति घंटे 25 हजार रोटियां बनाई जा सकती हैं। इसके जरिए घंटों में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक रोटियां उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके जरिए एक बार में हजारों लोग खाना खा पाते हैं। वहीं खाने खिलाने के लिए लोगों से किसी तरह के पैसे चार्ज नहीं किए जाते हैं। यह पूरी तरह से मुफ्त होता है। लंगर सभी के लिए होता है और कोई भी व्यक्ति यहां आकर फ्री में खाना खा सकता है।

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