राजा-महाराजाओं की पहली पसंद थी यह शाही डिश, पकने में लगते थे पूरे 24 घंटे; जानें नाम
-1785581517283.webp)
भारत का इतिहास जितना शानदार है, उतना ही दिलचस्प यहां का खानपान भी रहा है। आज हम बिरयानी, कबाब, तंदूरी चिकन और कई मुगलई डिश को बड़े चाव से खाते हैं। इन्हें स्पेशल तरीके से बनाया भी जाता है। खास बात तो ये है कि इन्हें पकने में भी ज्यादा समय लगता है, लेकिन क्या आप जानती हैं कि एक ऐसी डिश भी कभी बनाई जाती थी, जिसे पकने में 24 घंटे का समय लगता था?
यह डिश आम लोगों के लिए नहीं, बल्कि राजा-महाराजाओं और मुगल शासकों के खास भोज का हिस्सा थी। इसका नाम है मुर्ग जमीन दोज (Murgh Zamin Doz)। यह सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अनोखे पकाने के तरीके की वजह से भी मशहूर रही है। आज भले ही यह डिश बहुत कम जगह देखने को मिलती है, लेकिन भारतीय पाक इतिहास में इसकी खास जगह थी। आइए जानते हैं इसके बारे में-
क्या है मुर्ग जमीन दोज?
'मुर्ग' का मतलब चिकन होता है, जबकि 'जमीन दोज' का मतलब जमीन के अंदर पकाया गया होता है। ऐसे में आपको नाम से ही समझ आ गया होगा कि इस डिश को खास तरीके से मिट्टी के बर्तन में बंद करके धीमी आंच पर लंबे समय तक पकाया जाता था। माना जाता है कि मुगल काल में इसी तरीके से खाना पकता था।
-1785581543768.webp)
मुगल रसोई की पहचान थी यह डिश
आपको बता दें कि मुगल शासकों को नए-नए व्यंजन खूब पसंद आते थे। खासतौर पर अकबर के समय शाही रसोई में कई खास डिशेज तैयार की जाती थीं। आईन-ए-अकबरी जैसे ऐतिहासिक ग्रंथों में भी उस समय के कई व्यंजनों का जिक्र किया गया है। इन्हीं में से मुर्ग जमीन दोज भी है। माना जाता है कि यह डिश शाही दावतों में सर्व की जाती थी।
यह भी पढ़ें- Chicken Dishes: दुनिया भर में फेमस हैं भारत के ये 6 लाजवाब चिकन व्यंजन, घर पर ट्राई करें ये रेसिपी
कैसे बनती थी मुर्ग जमीन दोज?
इस डिश को बनाने का तरीका ही सबसे अलग था। इसे बनाने के लिए सबसे पहले चिकन को दही, इलायची, केसर और बादाम जैसे शाही मसालों के साथ अच्छी तरह से मैरिनेट किया जाता था। इसके बाद चिकन को रूमाली रोटी में लपेटा जाता था। अब इसे मिट्टी के बर्तन में रखा जाता था और बर्तन का ढक्कन मिट्टी से पूरी तरह सील कर दिया जाता था। जैसे दम के लिए बर्तन को आटे से सील किया जाता है, ठीक वैसे ही। ऐसा इसलिए किया जाता था ताकि अंदर की भाप बाहर न निकले और चिकन अपने ही रस में धीरे-धीरे पकता रहे।
क्यों लगते थे लगभग 24 घंटे?
इस डिश की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्लो कुकिंग ही थी। इसे हाई फ्लेम पर नहीं कुक किया जा सकता था। दरअसल, मिट्टी से बंद बर्तन को तंदूर या कम गर्मी पर कई घंटों तक के लिए रखा जाता था। कई जगहों पर इसे पकाने का समय 24 घंटे बताया गया है। हालांकि, इसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। बताया जाता है कि लंबे समय तक धीमी आंच मिलने से चिकन बहुत ही सॉफ्ट और जूसी बनकर तैयार होता था।
यह भी पढ़ें- Chicken Dishes: एक-दो नहीं, सर्दियों में 10 तरह से बना सकती हैं चिकन; जरूर करें ट्राई
क्या तंदूरी चिकन से है मुर्ग जमीन दोज का कोई संबंध?
ऐसा बताया जाता है कि मुर्ग जमीन दोज को तंदूरी चिकन का ही शुरुआती रूप माना जाता है। हालांकि, इसका भी कोई ठोस ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। फिर भी दोनों में मिट्टी के बर्तन और बंद वातावरण में कुक करने जैसी कुछ समानताएं जरूर देखने को मिलती हैं।
आज क्यों नहीं मिलती यह डिश?
आज के समय में यह डिश बहुत कम जगह बनती है। इसकी सबसे बड़ी वजह इसका लंबा और मेहनत वाला पकाने का तरीका है। आज के समय में ज्यादातर रेस्टोरेंट जल्दी तैयार होने वाले डिशेज को बनाना पसंद करते हैं।

आज चिकन की कौन-कौन सी शाही डिशेज बनती हैं?
आज के समय में चिकन की कई शाही डिशेज काफी पसंद की जाती हैं। उनमें से ये नाम सबसे ज्यादा फेमस हैं-
- शाही चिकन कोरमा: काजू, बादाम और दही की गाढ़ी ग्रेवी में धीमी आंच पर पका हुआ यह एक बहुत ही रिच फ्लेवर वाला व्यंजन है।
- बटर चिकन या मुर्ग मखनी: मक्खन, क्रीम और टमाटर की हल्की मिठास वाली ग्रेवी में तंदूरी चिकन का बढ़िया कॉम्बीनेशन देखने को मिलता है।
- चिकन चांगेजी: दूध, ड्राई फ्रूट्स और खास खड़े मसालों के साथ भुना हुआ यह एक मसालेदार और शाही स्वाद वाला चिकन डिश है।
- मुर्ग मुसल्लम: इसमें पूरे साबुत चिकन को खास मसालों और कीमे की स्टफिंग के साथ धीमी आंच पर पकाया जाता है। यह नवाबी व्यंजन है।
- चिकन रेशमी कबाब: मलाई, काजू और कुछ खास मसालों में मैरिनेट करके ग्रिल किया गया बहुत ही स्वादिष्ट कबाब है।
- शाही चिकन अफगानी: यह दही, क्रीम, कसूरी मेथी और काली मिर्च के कॉम्बिनेशन के साथ बनी एक क्रीमी व्हाइट ग्रेवी वाली डिश है।
यह भी पढ़ें- अफगानिस्तान की कौन-सी डिशेज भारत में भी खूब पसंद की जाती हैं? फूड लवर हैं तो जरूर चखें स्वाद, खुश हो जाएगा दिल
अब तो आप जान ही गईं होंगी कि मुर्ग जमीन दोज सिर्फ खाने की एक रेसिपी नहीं थी, बल्कि उस दौर की शाही रसोई का हिस्सा थी। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
Image Credit-Magnific/AI
- जमीन दोज शब्द का क्या अर्थ है?
- फारसी में 'जमीन दोज' का अर्थ है जमीन के नीचे या मिट्टी के अंदर पकाया गया।
- मुर्ग जमीन दोज में किस पत्ती का उपयोग होता था?
- चिकन को जमीन में दबाने से पहले रुमाली रोटी के अलावा अरबी के पत्तों में लपेटा जाता था।
- मुर्ग जमीन दोज का किस मुगल ग्रन्थ में वर्णन मिलता है?
- अबुल फजल द्वारा रचित प्रसिद्ध मुगल ग्रंथ 'आईन-ए-अकबरी' में इसका ऐतिहासिक उल्लेख मिलता है।
हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।