वैष्णो देवी मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। ये मंदिर इतना विशाल और भव्य है कि लाखों लोग हर साल यहां दर्शन के लिए आते हैं। देवी मां के सबसे प्रसिद्ध स्थानों में से एक इस मंदिर को बहुत आदर के साथ देखा जाता है। पर क्या आप जानते हैं कि इस मंदिर का इतिहास आखिर कितना पुराना है? माना जाता है कि ये गुफा भैरोनाथ के वध से लेकर अभी तक इसी स्थान पर स्थित है। यहीं देवी मां ने भैरोनाथ का वध किया था और उनके अहंकार को तोड़ा था। 

कहानी के मुताबिक भैरोनाथ ने मां वैष्णवी का पीछा किया था और मां ने इसी गुफा में आराम किया था। उसके बाद मां ने अपने त्रिशूल से भैरोनाथ का सिर धड़ से अलग कर दिया था और भैरोनाथ की क्षमा प्रार्थना से प्रसन्न होकर मां ने वर्दान भी दिया था कि 'जो भी मेरी पूजा को आएगा वो भैरोनाथ की पूजा जरूर करेगा।' इसीलिए वैष्णो देवी मंदिर के साथ-साथ भैरोनाथ का मंदिर भी बनवाया गया है। 

माता के दरबार में जो भी जाता है उसका दर्शन भैरोनाथ के दर्शन के बिना अधूरा माना जाता है। पुराने समय को देखा जाए तो माता का दरबार अब बहुत अलग बन गया है। भैरोनाथ का वध करने के बाद मान्यता के अनुसार मां वैष्णवी ने अपना मनुष्य रूप त्याग दिया था और उसके बाद पत्थर का रूप लेकर तपस्या में लीन हो गई थीं और वही मूर्तियां मां वैष्णवी के रूप में पूजी जाती हैं। 

retro images of vaishno mata

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माता वैष्णो देवी का दरबार शुरुआत से ही काफी प्रसिद्ध रहा है और नेता-अभिनेता सभी इस दरबार में दर्शन के लिए आए हैं। 

इंदिरा गांधी बहुत मानती थीं इस दरबार को-

भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी इस मंदिर को बहुत ही पूज्य मानती थीं। आपको इस तस्वीर में इंदिरा गांधी वैष्णो देवी की गुफा की ओर जाती दिख जाएंगी। 

indira gandhi vaishno devi

वैसे तो इंदिरा गांधी ने वैष्णो देवी के दर्शन कई बार किए हैं, लेकिन वो जम्मू कश्मीर के गवर्नर जगमोहन जी थे जिन्होंने माता वैष्णो देवी मंदिर एक्ट शुरू किया था। ये एक्ट 1986 में बना था और इस एक्ट के जरिए एक बोर्ड की स्थापना की गई जिसके द्वारा दरबार की मेंटेनेंस, उसके आस-पास की बिल्डिंग्स, दुकानें, साफ-सफाई, श्रद्धालुओं के रहने की व्यवस्था, लॉज आदि सब कुछ देखना इस वैष्णो देवी मंदिर का काम है। 

jagmohan vaishno devi

कलियुग और श्रीराम से है इस आश्रम का ताल्लुक-

माता वैष्णो देवी से एक और कहानी जुड़ी हुई है। इस कहानी के मुताबिक इस जगह आश्रम बनवाने के लिए श्रीराम ने स्वयं आदेश दिए थे। भैरोनाथ ने माता वैष्णो देवी का पीछा इसलिए किया था क्योंकि उनके गुरू गोरखनाथ को एक दृश्य दिखा था जिसमें श्री राम और वैष्णवी बात कर रहे थे। श्रीराम का कहना था कि कलियुग में हम दोनों इसी आश्रम में निवास करेंगे। इसीलिए त्रिकुट पहाड़ी की गोद में इस आश्रम की स्थापना की गई।  

वैसे तो वैष्णो देवी से जुड़ी ऐसी कई लोककथाएं प्रचलित हैं, लेकिन अधिकतर लोग पंडित श्रीधर वाली कथा को सच मानते हैं। इसी कथा के आधार पर वैष्णो देवी पर फिल्म बनाई गई है। इस फिल्म में भैरोनाथ वध और माता वैष्णो दरबार बनने तक की पूरी कहानी बताई है।  

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गुरु गोबिंद सिंह भी आए थे वैष्णो देवी- 

वैष्णो देवी से जुड़े कुछ फैक्ट्स में से एक ये भी प्रसिद्ध माना जाता है कि खुद गुरु गोबिंद सिंह अपने जीवनकाल में यहां आए थे।  

अर्धकुमारी गुफा में की थी 9 महीने प्रतीक्षा- 

वैष्णो धाम में अर्धकुमारी गुफा भी है जिसके बारे में ये मान्यता है कि इस गुफा में भैरोनाथ से बचने के लिए माता वैष्णवी ने 9 महीने आराम किया था। यहां वो उसी स्थिति में थीं जिस स्थिति में मां के गर्भ में बच्चा होता है। इस गुफा को अर्धकुमारी या गर्भजुन गुफा भी कहा जाता है। इस गुफा की मान्यता भी बहुत ज्यादा है और यहां कई महिलाएं अपने लिए संतान की आशा लेकर आती हैं। ऐसा माना जाता है कि यहां का आशीर्वाद लेने के बाद महिलाओं को संतान सुख की प्राप्ती होती है।  

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