आगरा के ताजमहल का नाम विश्‍व भर में फेमस है। इस खूबसूरत इमारत का दीदार करने के लिए लोग दुनिया के कोने-कोने से आते हैं। यह इमारत सच्‍ची मोहब्‍बत का बेमिसाल नमूना कही जाती है। मगर आपको यह जानकर हैरानी होगी कि आगरा में एक नहीं बल्कि दो ताजमहल हैं।

जी हां, आगरा में एक संगमरमर का सफेद ताजमहल है, तो वहीं दूसरी तरफ लाल पत्थर से बना 'लाल ताजमहल' भी है। बेशक इतिहास में केवल शाहजहां के बनवाए हुए ताजमहल का ही जिक्र मिलता हो और लाल ताजमहल के बारे में बहुत कम लोग जानते हों, मगर इन दोनों ही ताजमहल में एक बात कॉमन है और वह यह है कि दोनों ही मोहब्बत की निशानी कहे जाते हैं। 

आज हम आपको आगरा के लाल ताजमहल के बारे में बहुत ही दिलचस्प जानकारी देंगे, जो बहुत कम लोग ही जानते हैं। 

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किसने बनवाया आगरा का लाल ताजमहल 

बात तब की है, जब भारत में ब्रिटिश हुकूमत ने अपने पैर पसारने शुरू ही किए थे और ब्रिटिश सेना के कुछ सिपाही भारत में अलग-अलग राज्यों की सेना में सिपाही के तौर पर तैनात थे। ऐसा ही एक डच मूल का सिपाही था कर्नल जॉन विलियम हैसिंग। विलियम हैसिंग भारत में अपने परिवार के साथ रहता था और आगरा के लाल किले की देखभाल के लिए उसे सेनापति नियुक्त किया गया था। विलियम हैसिंग की पत्‍नी ने लाल ताजमहल का निर्माण करवाया था। यह ताजमहल उसने अपने पति विलियम हैसिंग की याद में बनवाया था। 

क्या है आगरा के लाल ताजमहल का इतिहास 

आगरा के लाल ताजमहल को विलियम हैसिंग का मकबरा भी कहते हैं। यह मकबरा असल के ताजमहल की तरह बेमिसाल तो नहीं है, मगर इसकी सुंदरता में कोई भी कमी नहीं निकाली जा सकती है। 21 जुलाई 1803 में जब विलियम हैसिंग का देहांत हुआ, तब लाल ताजमहली की नींव रखी गई थी। दरअसल, विलियम हैसिंग ने जब अपनी पत्‍नी के साथ पहली बार शाहजहां का बनवाया हुआ ताजमहल देखा था, तब ही तय कर लिया था कि पति-पत्‍नी में जो भी पहले जाएगा, दूसरा उसकी याद में ताजमहल बनवाएगा। 

पहले विलियम हैसिंग का ही देहांत हो गया था। इसलिए उसकी पत्‍नी ने अपने बच्चों के साथ मिल कर लाल पत्थर से ताजमहल से मिलती हुई हू-ब-हू इमारत बनवा डाली थी। विलियम हैसिंग एक मामूली सा सिपाही था और उसकी पत्‍नी के पास इतना धन भी नहीं था कि वह शाहजहां की तरह संगमरमर के पत्थर से ताजमहल बनवाए। इसलिए उसने लाल पत्थर का ताजमहल बनवाया था। 

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संगमरमर के ताज महल से कैसे अलग है लाल ताजमहल

अगर आगरा के लाल ताजमहल को गौर से देखा जाए, तो केवल सफेद संगमरमर के पत्थरों की कमी ही नजर आती है। हां, यह ताजमहल असल के ताजमहल की इमारत से आकार में भी छोटा है। यह मकबरा 100 से 200 फीट के दायरे में बना हुआ है। इस ताजमहल में असल के ताजमहल जैसे भूमिगत कक्ष भी है और चार मीनारें भी हैं। इस मकबरे के चारों ओर 4 बड़े प्रवेश द्वार भी हैं। ध्‍यान देने वाली बात यह है कि असल के ताजमहल में शाहजहां और मुमताज की कब्र है और लाल ताजमहल में विलियम हैसिंग और उसकी पत्‍नी की कब्र है। 

आगरा में कहां स्थित है लाल ताजमहल 

एक बादशाह और आम इंसान में क्या फर्क होता है, वह लाल ताजमहल की इमारत को देख कर आसानी से महसूस किया जा सकता है। मगर सच्‍ची मोहब्‍बत किसी ने भी की हो, उसे दीवाना ही कहा जाता है। फर्क इतना है कि किसी की मोहब्बत के चर्चे होते हैं, तो किसी की मोहब्बत गुमनामी के अंधेरे में खो जाती है। लाल ताजमहल के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। आगरा में संगमरमर का ताजमहल कहां हैं, यह तो सब लोग जानते हैं मगर लाल ताज महल के बारे में बहुत कम पर्यटकों को ही पता है। यह ताजमहल आगरा के भगवान टॉकीज चौराहे के निकट है और इसे देश के सबसे पुराने रोमन कैथोलिक कब्रिस्तान में देखा जा सकता है। इस ताजमहल को कब्रिस्तान के बीचों-बीच बनाया गया है। 

 

कौन था कर्नल जॉन विलियम हैसिंग

 कर्नल जॉन विलियम हैसिंग ने सबसे पहले लंका के कैंडी युद्ध में भाग लिया था। इसके बाद वह भारत के हैदराबाद के निजाम की सेना में भर्ती हुआ। इसके कुछ वर्षों बाद जॉन विलियम हैसिंग ने महादजी सिंधिया की सेना में उच्च पद प्राप्त किया। मगर जब महादजी की मृत्यु हो गई तब हैसिंग आगरा आ गया और आगरा के लाल किले की देखरेख का काम उसके जिम्मे कर दिया गया। 

 

अगर आप इस बार आगरा जाएं तो एक बार लाल ताजमहल का दीदार जरूर करें। लाल ताजमहल से जुड़े यह रोचक तथ्‍य आपको अच्छे लगे हों, तो इस आर्टिकल को शेयर और लाइक जरूर करें। साथ ही इसी तरह और भी ट्रैवल से जुड़े आर्टिकल पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हर जिंदगी से।