क्या आपने कभी यह बात महसूस की है कि एक्सप्रेस ट्रेनों और सुपर डीलक्स बसों में घूमते हुए आप आसपास के खूबसूरत कुदरती नजारों का मजा नहीं उठा पातीं। अगर हां तो आपको कम से कम एक बार टॉय ट्रेन पर सफर करने का मजा जरूर लेना चाहिए। टॉय ट्रेन जब मंथर गति से आगे बढ़ती है तो आप हरी-भरी वादियों की खूबसूरती करीब से महसूस कर पाती हैं। आइए जानें देश के ऐसे टॉय ट्रेन रूट्स के बारे में, जिन पर चलकर आप खूब एंजॉय करेंगी।

नीलगिरि माउंटेन रेलवे, तमिलनाडु

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तमिलनाडु की नीलगिरि माउंटेन रेल एक वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शुमार है। इसी टॉय ट्रेन पर मशूहर फिल्म 'दिल से' के हिट गाने छइयां-छइयां गाने की शूटिंग हुई थी, जिसमें शाहरुख खान और मलाएका अरोड़ा चलती ट्रेन पर थिरकते नजर आए थे। शायद आपको हैरानी हो, लेकिन मेट्टुपालियम-ऊटी नीलगिरि पैसेंजर ट्रेन भारत में चलने वाली सबसे धीमी ट्रेन है। यह ट्रेन लगभग 16 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है। आराम-आराम से चलते हुए कहीं-कहीं तो इसकी रफ्तार 10 किलोमीटर प्रति घंटे भी हो जाती है। यानी अगर आपका ट्रेन से उतरकर बाहरी नजारों को करीब से देखने का मन हो तो आप उतरकर, आसपास टहलकर इसमें वापस चढ़ सकती हैं। मेट्टुपालियम से ऊटी के बीच नीलगिरि माउंटेन ट्रेन की यात्रा का अपना ही रोमांच है। इस सफर में करीब 10 रेलवे स्टेशन पड़ते हैं। मेट्टुपालियम के बाद टॉय ट्रेन के सफर का अंतिम पड़ाव उदगमंदलम है। सुस्त रफ्तार से जब यह टॉय ट्रेन हरे-भरे जंगलों के बीच से ऊटी पहुंचती है, तब  समुद्रतल से 2200 मीटर से ज्यादा की ऊंचाई का सफर तय कर चुकी होती है।

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दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे

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न्यू जलापाईगुड़ी से दार्जिलिंग के बीच चलती है दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे ट्रेन। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि इसे दिसंबर 1999 में को यूनेस्को की तरफ से वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा मिल गया था। न्यू जलापाईगुड़ी से दार्जिलिंग के बीच दूरी करीब 78 किलोमीटर है और इनके बीच करीब 13 स्टेशन पड़ते हैं। यह पूरा सफर करीब आठ घंटे का है, लेकिन यह इतना रोमांचक हो जाता है कि यह आपके जेहन में हमेशा के लिए रह जाएगा। ट्रेन से दिखने वाले यादगार नजारे आपके दिल में बस जाएंगे। पहाड़ों की रानी के रूप में मशहूर दार्जिलिंग में आपको चाय के बागानों के अलावा काफी कुछ घूमने को मिलेगा, लेकिन इस टॉय ट्रेन के सफर का मजा ही कुछ और है। आप दार्जलिंग के पास स्थित हैप्पी वैली टी एस्टेट, बॉटेनिकल गार्डन, बतासिया लूप, वॉर मेमोरियल, केबल कार, गोंपा, हिमालियन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट म्यूजियम आदि भी देखने जा सकती हैं।

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हिमाचल प्रदेश की कालका-शिमला टॉय ट्रेन 

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उत्तर भारत में स्थित हिमाचल प्रदेश सैलानियों के लिए हमेशा से ही फेवरेट टूरिस्ट डेस्टिनेशन रहा है। खासकर यहां की कालका-शिमला टॉय ट्रेन तो वर्ल्ड फेमस है। वर्ष 2008 में यूनेस्को ने इसे वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित कर दिया था। कालका-शिमला टॉय ट्रेन के सफर की शुरुआत 9 नवंबर, 1903 को हुई थी। यह ट्रेन दो फीट छह इंच की नैरो गेज लेन पर चलते हुए शिवालिक की पहाड़ियों के घुमावदार रास्तों पर गुजरती है और समुद्रतल से करीब 2076 मीटर की ऊंचाई पर स्थित खूबसूरत हिल स्टेशन शिमला पहुंचाती है। इस दौरान आप शिमला के बर्फ से ढंके पहाड़ों की खूबसूरती करीब से निहार सकती हैं।

महाराष्ट्र की नरेल-माथेरान टॉय ट्रेन

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महाराष्ट्र का छोटा सा हिल स्टेशन माथेरान आपको ऐसा यादगार अनुभव देगा कि आप यहां बार-बार आना चाहेंगी। करीब 2650 फीट की ऊंचाई पर स्थित माथेरान मुंबई से महज 80 किमी दूर है और यहां मुंबई जैसी भीड़-भाड़ से उलट शांति और सुकून महसूस होता है। यहां टॉय ट्रेन का सफर नरेल से माथेरान के बीच है और यह काफी एक्साइटिंग है। इस रेल मार्ग पर चलते हुए करीब 121 छोटे-छोटे पुल और 221 मोड़ आते हैं। आपको इस सफर में इसलिए भी खूब मजा आएगा क्योंकि यहां ट्रेनों की रफ्तार 20 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा नहीं होती है। माथेरान करीब 803 मीटर की ऊंचाई पर इस रास्ते का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन है।

हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा वैली रेलवे

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कांगड़ा वैली रेलवे भारत की एक और महत्वपूर्ण हैरिटेज टॉय ट्रेन है, जो पठानकोट और जोगिंदरनगर के बीच नैरो गेज पर चलती है। यह भी यूनेस्को की तरफ से वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित की जा चुकी है। इस ट्रैक पर आपको कई ब्रिज और चाय के हरे-भरे बागान नजर आते हैं। यहां आपको धौलाधार रेंज के भी मन मोह लेने वाले नजारे दिखाई देते हैं।