Banaras Ki Mahashivratri: भांग की ठंडाई, अघोरियों का साथ और शिव की बारात; जानें क्यों खास होता है काशी में महाशिवरात्रि का ये त्योहार?

कहते हैं कि काशी वाराणसी भगवान शिव के त्रिशूल पर टिकी है। दुनिया के सबसे पुराने जीवित शहरों में से एक, काशी में महाशिवरात्रि का त्योहार सिर्फ एक व्रत या पूजा नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव है जो पूरी दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलता। यहां महादेव बाबा विश्वनाथ के रूप में विराजमान हैं और महाशिवरात्रि के दिन पूरी काशी शिवमय हो जाती है। आइए जानते हैं कि काशी की महाशिवरात्रि में ऐसा क्या खास है जो इसे दुनिया भर में प्रसिद्ध बनाता है।
काशी की महाशिवरात्रि क्यों होती है खास?
काशी के लोगों के लिए महाशिवरात्रि भगवान शिव के विवाह का दिन है। यहां महादेव को एक संन्यासी के रूप में नहीं, बल्कि एक दूल्हे के रूप में पूजा जाता है। इस दिन काशी के हर मंदिर में उत्सव का माहौल होता है और लोग अपने आराध्य की शादी की खुशियां मनाते हैं। बहुत धूमधाम से ये त्योहार मनाया जाता है।

महाशिवरात्रि में निकलती है शिव की भव्य बारात
काशी की महाशिवरात्रि की सबसे बड़ी विशेषता यहां निकलने वाली भव्य शिव बारात है। इस बारात में देवी-देवता, भूत-पिशाच, अघोरी, साधु-संत और आम जनता सब एक साथ नाचते-गाते चलते हैं। यह बारात काशी की गलियों से गुजरती है और इसमें शामिल होने वाले लोग शिव गणों के रूप में सजे होते हैं। यह नजारा अद्भुत और अलौकिक होता है। इस नजारे का इंतजार हर कोई करता है।
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महाशिवरात्रि के दिन बाबा विश्वनाथ मंदिर में होती है विशेष पूजा
महाशिवरात्रि पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में चारों पहर की विशेष आरती होती है। भक्त आधी रात से ही गंगा स्नान कर लंबी कतारों में लग जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन बाबा विश्वनाथ स्वयं भक्तों की झोली भरते हैं। मंदिर को फूलों और लाइटों से दुल्हन की तरह सजाया जाता है और इस खास दिन को भव्य तरीके से मनाया जाता है। इसलिए हर कोई काशी की महाशिवरात्रि का इंतजार करता है।

इस दिन गंगा घाट का नजारा भी देखने लायक होता है। दशाश्वमेध घाट और अस्सी घाट पर होने वाली गंगा आरती इस दिन और भी भव्य हो जाती है। दीपों की रोशनी में चमकती गंगा और गूंजते हुए शिव मंत्र पूरे वातावरण को ऊर्जा से भर देते हैं। ठंडाई का प्रसाद और चारों तरफ हर-हर महादेव के जयकारे काशी को एक अलग ही लोक में ले जाते हैं।
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काशी में महाशिवरात्रि का मतलब है शिव का साक्षात अनुभव। यहां आकर महसूस होता है कि शिव केवल कण-कण में ही नहीं, बल्कि यहां के लोगों की धड़कन में भी बसे हैं। इसलिए यहां पर महाशिवरात्रि भी भव्य तरीके से मनाई जाती है।
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Image Credit-Freepik/ varanasi tourasim
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