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Sawan 2024: क्यों प्रिय है भगवान शिव को सावन माह, जानें कैसे पड़ा इसका नाम

हिंदू धर्म में सावन माह का विशेष महत्व है। इस माह में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है।&nbsp; <div>&nbsp;</div>
Updated:- 2024-07-19, 11:45 IST
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सावन माह में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करना बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। इस माह में भोलेनाथ की पूजा करने से व्यक्ति की सभी परेशानियां दूर हो जाती है। साथ ही उत्तम फलों की प्राप्ति होती है। इस माह में भगवान शिव का जलाभिषेक अवश्य करना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि अगर आप महादेव को शीघ्र प्रसन्न करना चाहते हैं, तो सावन माह में रुद्राभिषेक या जलाभिषेक अवश्य करें। अब ऐसे में सावन माह भगवान शिव का प्रिय महीना क्यों है। साथ ही इस माह का नाम सावन कैसे पड़ा। इसके बारे में ज्योतिषाचार्य पंडित अरविंद त्रिपाठी से विस्तार से जानते हैं। 

इस माह का नाम सावन कैसे पड़ा? 

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सावन महीने का नाम भगवान शिव के नाम पर रखा गया है। शिव को "सोमनाथ" और "जलदेव" भी कहा जाता है, जो वर्षा के देवता हैं। इस महीने में भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है, इसलिए इसका नाम "सावन" पड़ा। एक पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान "हलाहल" नामक विष निकला था। भगवान शिव ने विष पीकर उसे ग्रहण कर लिया था, जिसके कारण उनका गला नीला हो गया था।

भगवान शिव को "नीलकंठ" भी कहा जाता है। "सावन" महीने में भगवान शिव के नील कंठ को शांत करने के लिए उनपर जल अर्पित किया जाता है। ताकि हलाहल शांत हो जाए। जिसके कारण इस माह नाम "सावन" पड़ा। इतना ही नहीं, हिंदू पंचांग के हिसाब से सावन पांचवां महीना है। बता दें, हिंदू महीनों के नाम पूर्णिमा के दिन चंद्रमा को विशेष नक्षत्र में देखते हुए रखे गए हैं। जब कैलेंडर का पांचवा पांचवां महीना शुरू होता है तो चंद्रमा श्रवण नक्षत्र में विराजमान होते हैं। इसी कारण इस महीने को श्रावण मास कहा गया और धीरे-धीरे बाद में श्रावण को सावन कहा जाने लगा। 

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भगवान शिव को क्यों प्रिय है सावन माह? 

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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी माह में माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए व्रत रखे थे। उन्होंने इस माह में कठिन तपस्या भी की थी। जिसके कारण भगवान शिव को यह माह बेहद प्रिय है। ऐसी मान्यता है कि सावन में ही भगवान शिव धरती पर आए थे और अपने ससुराल गए थे। वहीं दूसरी कथा के अनुसार, जब समुद्र मंथन हुआ, तो इसमें विष निकला और इसे भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण कर लिया। लेकिन इससे उनके शरीर का ताप काफी अधिक बढ़ गया और देवताओं ने इसे कम करने के लिए जल बरसाया था। इसलिए यह माह भगवान शिव को बेहद प्रिय माना गया है। 

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Image Credit- HerZindagi

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