
मोक्षदा एकादशी का हिन्दू धर्म में बहुत अधिक महत्व है क्योंकि यह दिन भगवान श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए 'श्रीमद्भागवत गीता' के उपदेश से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि इस एकादशी का व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है यानी जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। यह व्रत पितरों को सद्गति दिलाने और उन्हें स्वर्ग में स्थान दिलाने के लिए भी बहुत फलदायी माना जाता है, इसलिए इसे 'पितृ मोक्षदा एकादशी' भी कहते हैं। यह एकमात्र ऐसी एकादशी है जिस दिन भगवान विष्णु के साथ ही पितरों की पूजा का भी विधान है। ऐसे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से आइये जानते हैं कि इस साल कब पड़ रही है मोक्षदा एकादशी, क्या है भगवान विष्णु एवं पितरों की पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व?
मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 30 नवंबर, रविवार के दिन रात 09 बजकर 29 मिनट पर होगा। वहीं, इसका समापन 1 दिसंबर, सोमवार के दिन शाम 07 बजकर 01 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, मोक्षदा एकादशी का व्रत 1 दिसंबर को रखा जाएगा।

मोक्षदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 57 मिनट से सुबह 08 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा, एकादशी के दान-धर्म हेतु शुभ मुहूर्त सुबह 09 बजकर 33 मिनट से सुबह 10 बजकर 52 मिनट तक उपलब्ध है जो अत्यंत लाभकारी है।
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मोस्ख्दा एकादशी के दिन पितरों की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 57 मिनट से दोपहर 02 बजकर 39 मिनट तक है। इसके अलावा, लगभग 11:30 बजे से दोपहर 02:30 बजे के बीच विशेष योग बन रहा है जिसमें पितरों के निमित्त दान या तर्पण करना श्रेष्ठ सिद्ध होगा।
चूंकि एकादशी का व्रत द्वादशी तिथि पर खोला जाता है, इसलिए मोक्षदा एकादशी का व्रत 2 दिसंबर को पूर्ण होगा और इस दिन व्रत पारण का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 57 मिनट से सुबह 09 बजकर 03 मिनट तक रहेगा। इस समय में व्रत का समापन करने से उसका पूर्ण फल प्राप्त होगा।
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मोक्षदा एकादशी मोक्ष प्रदान करने वाली मानी जाती है। कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। श्रद्धा और सही विधि से व्रत करने वाले व्यक्ति के जाने-अनजाने में हुए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे पुण्य की प्राप्ति होती है।

इस एकादशी का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अगर आप इसका पुण्य अपने पितरों को समर्पित करते हैं तो उन्हें नरक के दुखों से मुक्ति मिलती है और वे स्वर्ग या मोक्ष को प्राप्त करते हैं। भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है।
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