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Jyeshtha Amavasya Date 2026: कब है ज्येष्ठ अमावस्या? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व

ज्येष्ठ अमावस्या बेहद खास दिन होता है। इस दिन पितरों से जुड़े कार्य किए जाते हैं। आप भी सही तिथि के बारे में जानकर इस दिन कार्यों को कर सकती हैं। आर्टिकल में बताते हैं सही तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व।
Updated:- 2026-05-14, 16:35 IST
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Kab Hai Jyeshtha Amavasya: ज्येष्ठ मास में आने वाली अमावस्या तिथि सबसे ज्यादा अहम होती है। इसका महत्व भी बिल्कुल अलग होता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन स्नान दान, पितृ तर्पण के साथ-साथ शनि भगवान की उपासना करने से अच्छा फल प्राप्त होता है। इस दिन वट अमावस्या भी आती है, जिस दिन महिलाएं वट सावित्री का व्रत रखती हैं। इसलिए इस दिन का महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है। आइए पंडित जन्मेश द्विवेदी से जानते हैं इसकी सही तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व क्या है? ताकि आपके जीवन में भी इसका प्रभाव अच्छा पड़े।

ज्येष्ठ अमावस्या की सही तिथि क्या है?

ज्येष्ठ अमावस्या इस बार 16 मई को सुबह 5 बजकर 11 मिनट से शुरू हो रही है। इसका समापन 17 मई को रात 1 बजकर 30 मिनट पर हो रहा है। ऐसे में ज्येष्ठ अमावस्या तिथि में होने वाले सभी कार्य 16 मई को किए जाएंगे। इस तिथि पर आप पितृ तर्पण और अन्य कार्य कर सकती हैं, ताकि पितरों का आशीर्वाद आपको प्राप्त हो सके और आपके जीवन की परेशानियां कम हो सके।

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ज्येष्ठ अमावस्या पर स्नान दान के शुभ मुहूर्त

16 मई को ज्येष्ठ अमावस्या है। ऐसे में सुबह 8 बजकर 55 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 40 मिनट तक इसका स्नान दान का शुभ मुहूर्त बन रहा है। इसमें आप सभी कार्यों को संपन्न कर सकती हैं। साथ ही सही चीजों का दान कर सकती हैं।

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ज्येष्ठ अमावस्या का महत्व

ज्येष्ठ माह की अमावस्या हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिसे मुख्य रूप से शनि जयंती और वट सावित्री व्रत के कारण विशेष स्थान प्राप्त है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन सूर्यपुत्र शनि देव का जन्म हुआ था, इसलिए न्याय के देवता को प्रसन्न करने और शनि दोष से मुक्ति पाने के लिए इस दिन दान-पुण्य और दीप दान का विशेष फल मिलता है। साथ ही, सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए वट वृक्ष की पूजा कर वट सावित्री का व्रत रखती हैं। ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी के समय आने वाली इस अमावस्या पर जल सेवा और प्याऊ लगवाना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

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आध्यात्मिक दृष्टि से इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और पितरों के निमित्त तर्पण करने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और मानसिक शांति मिलती है। यह तिथि संयम, सेवा और समर्पण का प्रतीक है, जो मनुष्य को प्रकृति और पूर्वजों से जोड़ती है। इस दिन किए गए सात्विक कर्मों से जीवन के कष्टों का निवारण होता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। कुल मिलाकर, यह अमावस्या भक्ति, पितृ ऋण से मुक्ति और सौभाग्य की प्राप्ति का एक महापर्व है।

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Image credit- Freepik

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