मेनोपॉज की शुरुआत से पहले महिलाओं को परेशान करते हैं ये लक्षण, इन तरीकों से करें मैनेज

महिलाएं उम्र के अलग-अलग पड़ाव पर कई हार्मोनल बदलावों से गुजरती हैं। मेनोपॉज इन्हीं में से एक है। पीरियड्स की शुरुआत और इसके बंद होने पर महिलाओं के शरीर में कई बदलाव होते हैं। इनका असर, महिलाओं की ओवरऑल हेल्थ पर भी होता है। करीब 45 से 55 साल की उम्र में हर महिला मेनोपॉज से गुजरती है। मेनोपॉज से पहले के समय को पेरिमेनोपॉज कहा जाता है। इस समय पर मेनोपॉज के लक्षण धीरे-धीरे आना शुरू हो जाते हैं। पेरिमेनोपॉज 'मेनोपॉज के आसपास' के समय को कहते हैं। इस समय पर हॉट फ्लैशेज, शरीर की गंध में बदलाव, वजन में बदलाव, नींद आने में मुश्किल, मूड स्विंग्स और वजाइनल ड्राईनेस जैसे लक्षण नजर आते हैं। पेरिमेनोपॉज असल में बदलाव का एक समय है, जिसमें शरीर में काफी चेंजेस होते हैं। अगर आप पेरिमेनोपॉज पीरियड में हैं, तो इसके लक्षणों को समझें और उन्हें मैनेज करने के लिए एक्सपर्ट की सलाह पर ध्यान दें। इस बारे में डाइटिशियन मनप्रीत जानकारी दे रही हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से न्यूट्रिशन्स में मास्टर्स किया है। वह हार्मोन और गट हेल्थ कोच हैं।
पेरिमेनोपॉज में महिलाओं के शरीर में नजर आते हैं ये लक्षण

- इस दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन में होने वाले उतार-चढ़ाव के कारण, ब्रेन के न्यूरोट्रांसमिटर्स पर असर होता है। इसकी वजह से डिप्रेशन हो सकता है।
- हार्मोनल इंबैलेंस की वजह से इमोशनल सेंसिटिविटी बढ़ जाती है और गुस्सा अधिक आने लगता है।
- इस समय पर शरीर मे होने वाले हार्मोनल उतार-चढ़ाव का असर, स्लीप साइकिल पर भी होता है और नींद आने में मुश्किल हो सकती है।
- एस्ट्रोजन लेवल कम होने की वजह से यूटीआई की संभावना बढ़ जाती है।
- हार्मोनल बदलावों के कारण, शरीर में फैट डिस्ट्रीब्यूशन पर असर होता है और वजन बढ़ने लगता है। इस समय पर खासकर, पेट के इर्द-गिर्द चर्बी जमने लगती है।
- पेरिमेनोपॉज में इमोशनल इंबैलेंस के कारण, बालों पर भी असर होता है। बाल झड़ने लगते हैं और पतले हो जाते हैं।
- एस्ट्रोजन लेवल कम होने पर बॉडी हीट बढ़ जाती है। इसके कारण गर्मी अधिक लगती है और पसीना भी बहुत आता है।
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पेरिमेनोपॉज के लक्षणों को मैनेज करने के टिप्स

- इस समय पर आपको कैफीन कम से कम लेना चाहिए।
- दिन में एक मील सेंधा नमक में बनाकर खाएं। इससे ब्लोटिंग कम होती है।
- शीतली प्राणायाम और नाड़ी शोधन प्राणायाम को रूटीन का हिस्सा बनाएं।
- डाइट में कैल्शियम रिच फूड्स को शामिल करें। इस समय पर आप कैल्शियम सप्लीमेंट्स ले सकती हैं। हालांकि, इन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के न लें।
- कम फैट वाला और ज्यादा फाइबर वाला आहार लें।
- डाइट में मुनक्के को शामिल करें। इससे पीरियड के दौरान होने वाली दिक्कतों को कम करने में मदद मिल सकती है।
- फिजिकल एक्टिविटी पर ध्यान दें।
- इस समय पर साबुत अनाज को डाइट में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।
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मेनोपॉज के शुरुआती लक्षणों को मैनेज करने में एक्सपर्ट के बताए ये टिप्स आपकी मदद कर सकते हैं। अगर आपको स्वास्थ्य से जुड़ी कोई समस्या है, तो हमें आर्टिकल के ऊपर दिए गए कमेंट बॉक्स में बताएं। हम अपने आर्टिकल्स के जरिए आपकी समस्या को हल करने की कोशिश करेंगे।
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