Sat Oct 10, 2026 | Updated 03:13 PM IST

वरुणा नदी के किनारे है मां शैलपुत्री का यह प्राचीन धाम, नवरात्रि के पहले दिन करना है दर्शन; नोट करें ट्रैवल गाइड

शारदीय नवरात्रि में पहले द‍िन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। ऐसे में अगर आप मां शैलपुत्री के दर्शन की प्‍लान‍िंग कर रही हैं, तो वाराणसी जा सकती हैं। हम आपको पूरा ट्रैवल गाइड बता रहे हैं।
Updated:- 2026-10-10, 13:33 IST
varanasi maa shailputri temple travel guide on shardiya navratri day 1

शारदीय नवरात्रि में अगर आप मां दुर्गा के पहले स्वरूप यानी मां शैलपुत्री के दर्शन करने का प्लान बना रही हैं, तो वाराणसी में आपको दर्शन हो जाएगा। यहां दर्शन करने के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं। वाराणसी में मां शैलपुत्री का मंदिर अलीईपुर इलाके में वरुणा नदी के पास है और वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन से यहां पहुंचने में करीब 10 से 15 मिनट लगते हैं।

नवरात्रि के पहले दिन मंदिर में भक्तों की काफी भीड़ रहती है। ऐसे में दर्शन के लिए निकलने से पहले मंदिर तक पहुंचने का रास्ता, आने-जाने के साधन और दर्शन से जुड़ी जरूरी बातें जान लेना आपके लिए सही रहेगा। ऐसे में अगर आप भी पहली बार यहां जा रही हैं, तो हम आपको पूरा ट्रैवल गाइड बता रहे हैं। हम आपको मंदिर तक पहुंचने के रास्ते से लेकर पूजा में चढ़ाई जाने वाली चीजों और मंदिर से जुड़ी मान्यताओं तक के बारे में पूरी जानकारी देंगे। आइए जानते हैं-

मां शैलपुत्री का मंदिर कहां है और कैसे पहुंचें?

मां शैलपुत्री का मंदिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में अलीईपुर इलाके में वरुणा नदी के पास है। यहां पहुंचने के लिए आप ट्रेन, सड़क या शहर में चलने वाले लोकल टैक्सी की मदद ले सकती हैं। अगर आप नवरात्रि के पहले दिन दर्शन के लिए जा रही हैं, तो अपनी यात्रा पहले से प्लान करना बेहतर रहेगा।

maa shailputri temple in varanasi travel guide

image credit- varanasi temples

1. ट्रेन से कैसे पहुंचें?

आप जिस भी शहर से वाराणसी आ रही हैं, तो रेलवे स्टेशन से मंदिर तक पहुंचने के कई रास्ते मिल जाएंगे।

  • वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन: मंदिर यहां से करीब 10 से 15 मिनट की दूरी पर है। स्टेशन से ऑटो या टैक्सी आपको मिल जाएगी। वहीं आसपास होटल लेकर फ्रेश होकर मंद‍िर में दर्शन करने जाएं।
  • वाराणसी जंक्शन यानी कैंट रेलवे स्टेशन: इस स्टेशन से भी ऑटो और टैक्सी के जरिए मंदिर पहुंचा जा सकता है। निकलने से पहले ड्राइवर को मां शैलपुत्री मंदिर, अलीईपुर का पता बता दें।
  • मंडुआडीह रेलवे स्टेशन: यहां से मंदिर की दूरी करीब 10 किलोमीटर है। यहां से भी आपको आगे के लिए टैक्सी या ऑटो मिल जाएंगे।

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2. सड़क से मंदिर तक कैसे जाएं?

अगर आप वाराणसी या आसपास के किसी शहर से कार या बस से आ रही हैं, तो सड़क के रास्ते मंदिर तक पहुंच सकती हैं। शहर में पहुंचने के बाद अलीईपुर और वरुणा नदी के पास स्थित मां शैलपुत्री मंदिर के लिए रास्ता पूछ सकती हैं।

  • अपनी गाड़ी से आने पर निकलने से पहले मैप में मंदिर की लोकेशन देख लें।
  • अगर बस से वाराणसी आ रही हैं, तो वहां से ऑटो या टैक्सी ले लें।

3. शहर के अंदर आने-जाने के लिए कौन से साधन मिलेंगे?

वाराणसी पहुंचने के बाद मंदिर जाने के लिए ऑटो-रिक्शा, साइकिल-रिक्शा और टैक्सी आपको सब कुछ मिल जाएगा।

maa shailputri temple in varanasi travel guide (1)

image credit- herzindagi

नवरात्रि के पहले दिन मंदिर जाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

मां शैलपुत्री मंदिर में नवरात्रि के पहले दिन काफी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। ऐसे में थोड़ी तैयारी आपकी यात्रा को आसान बना सकती है।

  • सुबह जल्दी निकलें: पहले दिन दर्शन करने वालों की संख्या ज्यादा रहती है। इसलिए देर से पहुंचने के बजाय सुबह जल्दी निकलने का प्लान बनाएं।
  • भीड़ के लिए तैयार रहें: मंदिर परिसर में लंबी लाइन लग सकती है। दर्शन में कितना समय लगेगा, इसलिए टाइम निकालकर ही मंदिर जाएं।
  • जरूरी सामान ही साथ रखें: भीड़ वाली जगह पर बैग और दूसरी चीजों को संभालना मुश्किल होता है, इसलिए कम सामान लेकर जाएं।
  • दर्शन का समय पता कर लें: नवरात्रि के दिनों में मंदिर में दर्शन का समय थोड़ा बदल जाता है, इसलिए टाइमिंग पहले ही पता कर लें।

मां शैलपुत्री को पूजा में क्या चढ़ाएं?

मंदिर में मां शैलपुत्री के दर्शन के साथ भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा भी करते हैं। यहां लाल फूल और लाल चुनरी चढ़ाने की मान्यता है। कुछ लोग मां को नारियल भी अर्पित करते हैं।

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कौन हैं मां शैलपुत्री और क्यों होती है पहले दिन इनकी पूजा?

नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। इनमें मां शैलपुत्री को पहला स्वरूप माना जाता है। इसलिए नवरात्रि के पहले दिन इनकी पूजा का खास महत्व है। मां शैलपुत्री का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है। शैल का मतलब पहाड़ और पुत्री का मतलब बेटी होता है। मां ने पर्वतराज हिमालय के घर बेटी के रूप में जन्म लिया था। इसी वजह से उन्हें शैलपुत्री कहा जाता है।

maa shailputri temple in varanasi travel guide (2)

मां शैलपुत्री मंदिर की क्या है पुरानी कहानी?

वाराणसी का मां शैलपुत्री मंदिर सिर्फ पूजा करने की जगह नहीं है बल्कि इससे जुड़ी कई पुरानी धार्मिक मान्यताएं भी हैं। कहा जाता है कि भगवान शिव की प्रिय नगरी काशी में मां शक्ति का भी खास स्थान है। बताया जाता है कि मां शैलपुत्री ने कम उम्र में वरुणा नदी के किनारे तपस्या की थी। बाद में उनके पिता हिमालय भी वहां आए और उन्होंने भी तप किया। इसके बाद इस जगह पर देवी और उनके पिता का मंदिर बनाया गया। आज इसी जगह को मां शैलपुत्री मंदिर के नाम से जाना जाता है।

मां पार्वती को क्यों पसंद आई काशी?

एक दूसरी धार्मिक मान्यता मां पार्वती और भगवान शिव से जुड़ी है। कहा जाता है कि एक बार मां पार्वती किसी बात से नाराज होकर कैलाश छोड़कर काशी आ गई थीं। तभी भगवान शिव उन्हें मनाने के लिए वाराणसी पहुंचे। उस समय मां पार्वती को काशी इतना पसंद आया कि उन्होंने यहीं रहने की इच्छा जताई। इसके बाद माता इसी जगह विराजमान हो गईं।

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Cover Image Credit- AI

FAQ
क्या वाराणसी के मां शैलपुत्री मंदिर में ऑनलाइन बुकिंग सुविधा है?
मां शैलपुत्री मंदिर में दर्शन के लिए कोई ऑनलाइन बुकिंग नहीं होती है। सभी श्रद्धालुओं को सीधे लाइन में लगकर ही दर्शन करने होते हैं।
वाराणसी के मां शैलपुत्री मंदिर में दर्शन के लिए सही समय क्या है?
भीड़ से बचने के लिए सुबह 4 बजे मंगला आरती के समय या फिर दोपहर में भोग आरती के तुरंत बाद जाना सबसे सही रहता है।
वाराणसी के मां शैलपुत्री मंदिर के आसपास पार्किंग व्यवस्था कैसी है?
सड़कों पर भीड़ होने के कारण मंदिर के एकदम पास पार्किंग नहीं मिलती है। आपको अपनी गाड़ी मुख्य सड़क की पार्किंग में ही खड़ी करनी होगी।
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