Sat Oct 10, 2026 | Updated 12:11 PM IST

Mahalaya Durga Puja: मां दुर्गा के चक्षु दान की भावुक रस्म क्यों की जाती है, सुबह 4 बजे रेडियो सुनने की परंपरा क्‍या है? यहां जानें

बंगाल में दुर्गा पूजा की खास रौनक देखने को म‍िलती है। आज महालया के मौके पर दुर्गा मूर्ती की आंखें बनाई जाती हैं। इस दौरान और भी कई रस्‍में न‍िभाई जाती हैं।
Updated:- 2026-10-10, 11:01 IST
mahalaya durga puja 2026

बंगाल में दुर्गा पूजा का इंतजार सिर्फ पंडाल सजने और मां दुर्गा की प्रतिमा आने तक नहीं रहता है। यहां महालया की सुबह से ही त्योहार का खास माहौल बनने लगता है। इस दिन एक तरफ मूर्तियां बनाने वाले लोग मां दुर्गा की प्रतिमा की आंखें बनाते हैं, जिसे चक्षु दान कहा जाता है। वहीं, दूसरी तरफ कई घरों में सुबह करीब 4 बजे रेडियो चालू कर दिया जाता है। इसके बाद शुरू होता है महिषासुर मर्दिनी सुनने का सिलसिला।

ये दोनों परंपराएं बंगाल की दुर्गा पूजा से कनेक्‍टेड हैं, लेकिन मां की आंखें बनाने की रस्म का क्या मतलब है और सुबह-सुबह रेडियो सुनने की परंपरा कैसे शुरू हुई? इस बारे में हम आपको इसके बारे में जानकारी दे रहे हैं। आइए जानते हैं-

महालया पर मां दुर्गा का चक्षु दान क्यों किया जाता है?

आज यानी 10 अक्‍टूबर को महालया दुर्गा पूजा है। महालया के दिन बंगाल के कई इलाकों में मां दुर्गा की प्रतिमा की आंखें बनाई जाती हैं। इस रस्म को चक्षु दान या बंगाली में चोक्खु दान कहा जाता है। यहां चक्षु का मतलब आंख और दान का मतलब देना है। ये तो हम सभी जानते हैं क‍ि मां दुर्गा की प्रतिमा बनाने का काम कई दिन पहले ही शुरू हो जाता है।

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कारीगर मिट्टी से प्रतिमा तैयार करते हैं, उसे कलर करते हैं और उसके कपड़ों और गहनों को भी डेकोरेट करते हैं, लेकिन आंखें बनाने का काम बहुत ही अलग होता है। माना जाता है कि मां की आंखें बनने के बाद ही प्रतिमा में माता का दिव्य रूप पूरा होता है। हालांकि, हर जगह यह रस्म एक ही दिन नहीं होती है। वेस्‍ट बंगाल में महालया से इसका खास कनेक्‍शन है, जबकि कुछ परंपराओं में इसे महा सप्तमी के दिन भी किया जाता है।

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महालया पर सुबह 4 बजे रेडियो क्यों सुनते हैं बंगाली?

महालया की सुबह करीब 4 बजे रेडियो सुनने की परंपरा का संबंध महिषासुर मर्दिनी नाम के खास कार्यक्रम से है। यह कार्यक्रम आकाशवाणी पर प्रसारित होता है और इसमें चंडी पाठ, भक्ति गीत और मां दुर्गा की कथा का वर्णन होता है। बंगाल में कई परिवार महालया से पहले रात में ही अलार्म लगा लेते हैं। सुबह उठकर रेडियो चालू किया जाता है और घर के सभी लोग साथ में बैठकर रेड‍ियो सुनते हैं।

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सुबह का समय इसलिए भी खास होता है, क्योंकि महालया पितृ पक्ष के आखिरी दिन से जुड़ा है और इसके बाद देवी पक्ष की शुरुआत मानी जाती है। ऐसे में भोर में मां दुर्गा का आह्वान करने वाला यह कार्यक्रम त्योहार के आने का एहसास कराता है।

Mahishasura Mardini कार्यक्रम में ऐसा क्या खास है?

महिषासुर मर्दिनी करीब 90 मिनट का रेडियो कार्यक्रम है। इसमें संस्कृत के मंत्र, चंडी पाठ, बंगाली भक्ति गीत और मां दुर्गा के महिषासुर से युद्ध का वर्णन सुनने को म‍िलता है। बताया जाता है क‍ि इस कार्यक्रम की शुरुआत रेडियो के शुरुआती दौर में हुई थी। समय के साथ इसकी रिकॉर्डिंग इतनी पॉपुलर हाे गई कि सुबह इसे सुनना बंगाल की पहचान बन गया।

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Mahalaya 2026 कब है और इस दिन क्या होता है?

साल 2026 में महालया 10 अक्टूबर शनिवार यानी आज है। इसी दिन पितृ पक्ष का समापन होता है। कई परिवार अपने पूर्वजों को याद करते हैं और परंपरा के अनुसार तर्पण करते हैं। बंगाल में इसी दिन से दुर्गा पूजा की रौनक द‍िखने लगती है।

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