
विश्व एड्स दिवस एक विश्वव्यापी कार्यक्रम है जो पिछले 37 सालों से हर साल 1 दिसंबर को मनाया जाता है। इसका आरंभ साल 1988 से हुआ था और हर साल ये इसी दिन मनाया जाता है। दुनिया भर के कई संगठन इस दिन एड्स के लिए जागरूक करते हैं। इस दिन की जागरूकता बढ़ाने के लिए देश भर में कई जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं और अलग-अलग तरह की एक्टिविटीज होती हैं। HIV पीड़ित लोगों के लिए कई अभियान चलाए जाते हैं जिससे उन्हें जीवन जीने की नई दिशा मिले। यही नहीं इस दिन उन लोगों को भी याद किया जाता है जी किसी वजह से एड्स की बीमारी से पीड़ित होकर जीवन से हार गए। कई बार हमारे मन में यही ख्याल आता है कि आखिर यह दिवस 01 दिसंबर को ही क्यों मनाया जाता है, पहली बार यह कब और क्यों मनाया गया होगा? इसका इतिहास क्या है और इस दिन की क्या आवश्यकता है? आपके ऐसे ही कई सवालों के जवाब यहां हम बताने जा रहे हैं। साथ ही, इस दिन के महत्व को भी बता रहे हैं। आइए जानें इसके बारे में विस्तार से।
एड्स जागरूकता दिवस यानी कि एड्स डे मनाना इसलिए जरूरी है क्योंकि HIV संक्रमण को एक लाइलाज बीमारी के रूप में देखा जाता है। वहीं इसके बारे में जागरूकता की भी आवश्यकता है। कई लोग इसके कारणों और प्रभाव के बारे में नहीं जानते हैं। इस बीमारी के बारे में उचित जागरूकता से, मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, इसे नियंत्रित किया जा सकता है। एचआईवी की रोकथाम, निदान और देखभाल के बारे में सही जानकारी होने से लोगों को इस बीमारी से काफी हद तक बचाया जा सकता हैं। पिछले कई सालों एड्स के मरीजों और HIV पीड़ित लोगों की संख्या काफी हद तक कम हो गई है। इस दिन का उद्देश्य एचआईवी के प्रति लोगों को जागरूक करना होता है।
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इस दिन को मनाने की शुरुआत साल 1988 में हुई थी। WHO का मानना है कि अगर सभी लोगों के मानवाधिकारों की रक्षा की जाए और समुदायों को नेतृत्व सौंपा जाए, तो साल 2030 तक एड्स को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त किया जा सकता है। ऐसा माना जाता है कि HIV पीड़ित व्यक्ति न केवल बीमारी की चपेट में आते हैं बल्कि वो मानसिक रूप से भी तनाव झेलते हैं। इसी वजह से एड्स डे को हर साल मनाने का फैसला लिया गया। चूंकि पहली बार एड्स डे 01 दिसंबर को ही मनाया गया था, इसलिए आज भी इसी दिन को एड्स दिवस के रूप में मनाया जाता है। हर साल इस दिन का अलग थीम होता है और लोग उसी के अनुसार इस दिन को लोगों को जागरूक करने के लिए मनाते हैं।
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इस साल एड्स डे का थीम है 'Overcoming disruption, transforming the AIDS response' जिसका मतलब यह है कि 'बाधाओं पर विजय, एड्स प्रतिक्रिया में परिवर्तन' यह थीम साल 2030 तक एड्स को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए निरंतर राजनीतिक नेतृत्व, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और मानवाधिकार-केंद्रित दृष्टिकोणों का आह्वान करता है। कई दशकों की प्रगति के बाद, HIV प्रतिक्रिया एक दोराहे पर खड़ी है। आज के दौर में जीवन रक्षक सेवाएं बाधित हो रही हैं और कई समुदायों को बढ़े हुए जोखिमों और कमजोरियों का सामना करना पड़ रहा है। फिर भी इन चुनौतियों के बीच, एड्स को समाप्त करने का प्रयास करने वाले समुदायों के दृढ़ संकल्प, लचीलेपन और नवाचार में आशा बनी हुई है। साल 2025 एड्स डे का थीम इसी बात को उजागर करता है कि कितनी जल्दी एड्स को दुनिया से समाप्त किया जा सके।
आज दुनिया भर में एड्स दिवस को लोगों के मन में जागरूकता पैदा करने के लिए मनाया जाता है और इसका एक मात्र उद्देश्य इससे पीड़ित लोगों को सहानुभूति देना और आम जनता को इसके प्रति जागरूक करना है जिससे इस संक्रमण को दुनिया से दूर किया जा सके।
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