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हिंदू धर्म में क्यों किया जाता है मुंडन संस्कार, जानें एक्सपर्ट से

हिंदू धर्म में जन्म के बाद बच्चों का मुंडन किया जाता है, ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि मुंडन का महत्व क्या हैं।
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hindu mundan significance

अगर आप हिंदू धर्म से ताल्लुक रखती हैं तो आपका मुंडन संस्कार जरूर हुआ होगा। ज्यादातर बच्चों के जन्म के कुछ समय बाद उनका मुंडन कराया जाता है, हिंदू धर्म में यह मुंडन की प्रक्रिया बहुत पहले से चली आ रही है। कई लोग धार्मिक तीर्थ स्थलों पर जाकर बच्चों का मुंडन संस्कार कराते हैं, मान्यता के अनुसार इस संस्कार को बहुत शुभ माना जाता है। 

मुंडन संस्कार के समय बच्चे के जन्म के बाद आए हुए बालों को सिर से हटाया जाता है, इस संस्कार के पीछे कई धार्मिक और वैज्ञानिक कारण भी जुड़े हुए हैं। 

यह जानने के लिए इस लेख को लिखने के दौरान हमने एक्सपर्ट एस्ट्रोलॉजर शिफाली गर्ग और आचार्य संतोष तिवारी जी से बात की है, दोनों ने हमें मुंडन संस्कार के पीछे छिपी मान्यताओं और तर्कों के विषय में बताया है। तो आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि आखिर हिंदू धर्म में मुंडन का क्या महत्व है। 

क्यों किया जाता है मुंडन संस्कार- 

significance of mundan

सनातन संस्कृति में जितने भी रीति रिवाज शामिल किए गए हैं, उनके पीछे केवल जरूरत ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक, धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व भी छिपे हैं। आचार्य संतोष जी ने हमें बताया कि सनातन धर्म में कुल 16 संस्कार होते हैं, जिनमें मुंडन संस्कार सबसे महत्वपूर्ण संस्कारों में से एक माना जाता है।

 मुंडन संस्कार के पीछे एक भी तर्क दिया जाता है कि मां के गर्भ में रहने के दौरान बच्चे के बालों में कई अशुद्ध तत्व आ जाते हैं। जब तक ये अशुद्ध तत्व बच्चे के बालों में रहते हैं, बच्चे का दिमागी विकास तेजी से नहीं हो पाता है। इसलिए माना जाता है कि मुंडन के बाद से बच्चे का बुद्धि ज्यादा तेज हो जाती है।

वैदिक संस्कृति में क्या थी मुंडन की महत्ता- 

importance of mundan

एस्ट्रोलॉजर शिफाली गर्ग ने बताया कि वैदिक परंपराओं और मुंडन के संदर्भ में यजुर्वेद में उल्लेख मिलता है कि मुंडन संस्कार कराने से बल, आयु, आरोग्य और तेज की वृद्धि होती है। जो किसी भी शिशु के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, ऐसा करने से बच्चे का मानसिक और शारीरिक विकास तेजी से होता है।

वैदिक काल में एक और संस्कार बहुत प्रचलित माना जाता था, जिसमें बच्चे के जन्म के 40 दिन के अंदर ही सिर से बार हटा दिए जाते हैं। मुंडन के बाद 7 सालों तक बच्चे के बालों को बढ़ने दिया जाता था, वहीं जब उनकी उम्र गुरुकुल जानें की होती थी तब दोबारा से बच्चे का दोबारा मुंडन करके जनेऊ संस्कार किया जाता था।

पाप से मुक्ति के लिए कराया जाता है मुंडन संस्कार- 

mundan sanskar in hindu religion

शेफाली जी ने इसके पीछे की एक प्रचलित मान्यता के बारे में हमें बताया कि हिंदू धर्म में माना जाता है कि मनुष्य का जीवन हमें 84 लाख योनियों के बाद मिलता है, ऐसे में पिछले सभी जन्मों के ऋण और पाप उतारने के लिए शिशु के बाल भेंट स्वरूप काट दिए जाते हैं। इसके अलावा मस्तिष्क की पूजा करने के लिए भी यह संस्कार किया जाता है।

हिंदू और इस्लाम दोनों ही धर्मों में है बाल हटाने की परंपरा-

हिंदू धर्म के साथ इस्लाम धर्म में भी बच्चों के बाल हटवाने की परंपरा प्रचलित है। मुस्लिम इस प्रक्रिया को अकीका कहते हैं, वहीं हिंदू धर्म में इसे मुंडन या चूड़ा कर्म के नाम से जाना जाता है। बता दें कि हिंदू धर्म में इस संस्कार को पूरे विधि-विधान और मंत्रों के उच्चारण के साथ संपन्न किया जाता है।

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कैसे करवाया जाता है मुंडन- 

hindu mundan sanskar

हर परिवार में अलग-अलग परंपराएं होती हैं। कुछ लोग घर में मुंडन करा के बच्चे को पंडित जी से आशीर्वाद लेते हैं, तो कुछ लोग किसी शक्ति पीठ या तीर्थ स्थल जाकर बच्चे का मुंडन संस्कार कराते हैं। ऐसे में माना जाता है कि तीर्थ स्थलों पर पवित्र वाइब्स मिलती हैं, जो बच्चे के मस्तिष्क पर अच्छा प्रभाव डालती हैं।

मां की गोद में बिठा कर कराया जाता है बच्चे का मुंडन-

हिंदू धर्म में मुंडन के दौरान बच्चे को मां की गोद में बिठाया जाता है। मुंडन कराते समय बच्चे को चेहर पश्चिम की तरफ रखा जाता है, जिसे अग्नि की दिशा भी कहा जाता है। इसके बाद उस्तरे की मदद से बच्चे के सिर से बाल हटाए जाते हैं। बाल हटाने के बाद बच्चे के सिर को गंगाजल से साफ करके हल्दी और चंदन का लेप लगाया है, अगर बच्चे के सिर पर उस्तरे से कोई कट लगा हो तो लेप चोट पर फायदेमंद होता है। मुंडन के बाद कुछ लोग बालों को भगवान की मूर्ति के आगे अर्पित कर देते हैं, तो कुछ लोग अपनी कुलदेवी के चरणों में बाल रखते हैं। कई जगहों पर मुंडन के बाद बालों को पवित्र नदियों में भी विसर्जित करने की मान्यता होती है।

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मुंडन कराना कब माना जाता है शुभ- 

मुंडन कराने के लिए द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और द्वादशी तिथियों को शुभ माना जाता है। वहीं दिनों की  बात करें तो सोमवार बुधवार गुरुवार और शुक्रवार दिन शुभ माने जाते हैं, पर ऐसा माना जाता है कि शुक्रवार के दिन बालिकाओं का मुंडन नहीं कराना चाहिए।

ऐस्ट्रोलॉजर शेफाली गर्ग ने हमें बताया कि जब जब चंद्रमा इन नक्षत्रों से गोचर करे तब  मुंडन संस्कार शुभ कराना शुभ माना जाता है। जैसे कि अश्विनी, मृगशिरा, पुष्य, हस्त, पुनर्वसु चित्रा, स्वाती, जेष्ठ, श्रवण, धनिष्ठा और शतभिषा मुंडन संस्कार के लिए शुभ माने गए हैं। वहीं कुछ विद्वान यह भी कहते हैं कि जन्म नक्षत्र और चंद्रमा के चतुर्थ अष्टम द्वादश भाव में स्थित होने पर मुंडन बिल्कुल ना करें।

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जन्म के कितने समय के बाद करवाया जाता है मुंडन- 

हर जगह पर बच्चों के मुंडन को लेकर अलग-अलग परंपराएं देखने को मिलती हैं। कुछ लोग बच्चे का मुंडन 1 साल से 3 साल की उम्र में कराते हैं, तो वहीं कुछ लोग अपने कुल की परंपरा के अनुसार 5 से 7 साल की उम्र में मुंडन संस्कार करते हैं। आजकल ज्यादातर लोग 3 महीने के भीतर ही बच्चे का मुंडन संस्कार कर देते हैं।

तो ये थीं मुंडन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें, जिन्हें अपने बच्चे के मुंडन के समय आपको ध्यान में रखना चाहिए। आपको हमारा यह आर्टिकल अगर पसंद आया हो तो इसे लाइक और शेयर करें, साथ ही इस तरह जानकारियों के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी के साथ।

image credit- jagran.com

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