यह तो बिल्कुल सुनता ही नहीं। हर बात पर जिद करने लगता है और न मानो तो जोर-जोर से चिल्लाता है। मैं तो पूरा दिन इसके साथ चिल्ला-चिल्लाकर तंग आ जाती हूं। जब तक इसे डांटो नहीं, तब तक तो कोई काम करना है ही नहीं। यह कुछ ऐसे जुमले हैं जो अक्सर माता-पिता की जुबां पर चढ़े ही रहते हैं। आज के समय में बच्चों को संभालना बेहद मुश्किल है क्योंकि उन्हें हर चीज अपने हिसाब से चाहिए और अगर उन्हें मनमुताबिक चीज न मिले तो उनका दूसरा ही रूप देखने को मिलता है। अमूमन माता-पिता या अन्य लोग बच्चे के इस व्यवहार के लिए उस पर गुस्सा करते हैं या नाराजगी जाहिर करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी एकांत में बैठकर सोचा है कि बच्चे के इस व्यवहार के पीछे वास्तव में कौन जिम्मेदार है? बच्चा या आप। अगर आप ईमानदारी से इस सवाल का जवाब देंगे तो आपको अपनी ऐसी कई गलतियां नज़र आएंगी, जिसने आपने बच्चे को उग्र व जिद्दी बनाया है। तो चलिए आज हम माता-पिता की ऐसी ही गलतियों की चर्चा कर रहे हैं-

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बच्चों के सामने लड़ाई

यह गलती गाहे-बगाहे हर कपल करता है। पति-पत्नी के बीच लड़ाई होना बेहद आम बात है। लेकिन अगर आपके बीच मतभेद हैं तो उसे कभी भी बच्चे के सामने उजागर न करें। जो माता-पिता छोटी-छोटी बातों पर बच्चे के सामने लड़ते हैं, उससे बच्चे के मन में बेहद नकारात्मक भाव जन्म लेते हैं। उसे लगता है कि वह एक happy family का हिस्सा नहीं है। जिससे उसके मन में कुंठा उत्पन्न होती है और फिर ऐसे बच्चे अत्यधिक उग्र व जिद्दी बन जाते हैं। कई बार तो बच्चे समझते हैं कि अपनी बात मनवाने के लिए गुस्सा करना या चिल्लाना सबसे अच्छा रास्ता है और फिर वह ऐसा ही करने लगते हैं।

काम में व्यस्तता

आज के समय में हर व्यक्ति अपने काम में बिजी रहता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि बच्चों व परिवार को समय ही न दिया जाए। जिन माता-पिता के पास बच्चों के लिए समय नहीं होता, वह अपेक्षाकृत अधिक जिद्दी होते हैं क्योंकि वह जिद को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं। वह जिद करके या गुस्सा करके माता-पिता का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास करते हैं या फिर उनके साथ समय बिताने का प्रयास करते हैं।

जरूरत से ज्यादा बोझ

बचपन को खुलकर न देना भी एक बहुत बड़ी गलती है। कॉम्पिटिशन के इस युग में माता-पिता अपने बच्चे को हर क्षेत्र में अव्वल आते हुए देखना चाहते हैं। इसके कारण बच्चों पर बहुत अधिक मानसिक दबाव पड़ता है। इस दबाव को वह गुस्से के रूप में व्यक्त करते हैं या फिर कई बार वह अपने माता-पिता की इस इच्छा को समझ जाते हैं और उनकी बात मानने के लिए पैरेंट्स के सामने शर्त रखने से भी नहीं चूकते।

child and parents inside

भरोसे का अभाव

जहां पर माता-पिता और बच्चों के बीच विश्वास का पुल नहीं होता, वहां पर बच्चों के स्वभाव में बहुत अधिक नेगेटिविटी देखी जाती है। दरअसल, जब बच्चों को लगने लगता है कि अच्छा काम करने के बाद भी उन्हें रिवाॅर्ड नहीं मिलेगा या फिर उनके माता-पिता उनकी बात को नहीं समझेंगे या फिर पैरेंट्स हमेशा गुस्सा ही करते हैं तो वह अपनी बातों को मन में ही दबा लेते हैं और फिर उनके व्यवहार में गुस्सा व उनका जिद्दी होना बेहद सामान्य है।

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अपने सांचे में ढालना

यह सच है कि पैरेंट्स की बच्चों से कुछ उम्मीदें होती हैं। लेकिन इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि माता-पिता उन पर अपनी इच्छाएं लाद दें। जब माता-पिता बच्चे से परफेक्ट होने की उम्मीद रखते हैं, तभी सारी समस्याएं शुरू होती है। माता-पिता को यह समझना बेहद आवश्यक है कि हर बच्चा अलग होता है और इसलिए उसे उसके तरीके से जीने का मौका दें। जरूरी नहीं है कि आप हर गलती पर बच्चे को डांटें। कुछ चीजों को नजरअंदाज भी करें या फिर गलती करने पर उन्हें प्यार से समझाएं।

बातचीत का गलत अंदाज

आप बच्चे से कैसे बात करते हैं, यह बच्चे के व्यक्तित्व को काफी हद तक प्रभावित करता है। कुछ माता-पिता बच्चे से बात कम करते हैं और उन्हें ऑर्डर अधिक देते हैं, जिससे बच्चा या तो दब्बू बन जाता है या फिर जिद्दी। इसलिए पहले अपने रिश्ते में भरोसा कायम करें। आप बच्चे से कहें कि आप उस पर बेहद यकीन करते हैं और आपको भरोसा है कि वह ऐसा कोई काम नहीं करेगा, जिससे आपको दुख हो। उसके बाद भी बच्चा गलती करे तो उसे डांटने की बजाय उससे कहें कि उसकी उस हरकत से आपको बहुत दुख हुआ है और उससे वादा लें कि वह भविष्य में वह गलती नहीं दोहराएगा। इस तरह बातचीत का सही अंदाज रिश्ते में मधुरता लाता है।