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जानें हिजाब के इतिहास के बारे में

मुस्लिम महिलाओं को आपने हिजाब पहने जरूर देखा होगा, धार्मिक महत्व के साथ इसका एक अलग इतिहास रहा है।
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lesser known facts about hijab

आजकल हिजाब का विषय चर्चा में है। कर्नाटक समेत भारत के कई राज्यों में महिलाओं द्वारा पहना जाने वाला हिजाब विवाद का विषय बना हुआ है। पिछले कुछ दिनों में हिजाब का मामला इतना बढ़ गया कि अब कर्नाटक हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई चल रही है। ऐसे में सोशल मीडिया पर HijabisOurRight ट्रेंड करने लगा है। इस मामले में सियासत और राजनीति की एंट्री भी हो चुकी है, जिसके बाद मामला और भी तूल पकड़ रहा है। 

मगर आज हम इस विवाद के बारे में बात नहीं करेंगे, बल्कि विवादों के बीच आज के आर्टिकल में हम आपको हिजाब के इतिहास के बारे में बताएंगे। तो देर किस बात की, आइए जानते हैं कि आखिर कब और कैसे हिजाब(Hijab)मुस्लिम महिलाओं के जीवन का हिस्सा बना। 

आखिर क्या है हिजाब- 

history of hijab

आसान भाषा में जानें तो हिजाब एक स्कार्फ या कपड़ा है, जिसका इस्तेमाल मुस्लिम महिलाओं द्वारा अपना सिर ढकने के लिए किया जाता है। मुस्लिम महिलाएं हिजाब को सार्वजनिक जगहों पर या अनजान पुरुषों के सामने गोपनीयता बनाए रखने के लिए पहना करती हैं। बता दें कि कुरान में हिजाब का मतलब परदा होता है, जो कि आदमी और औरतों के बीच हो। हालांकि यह पर्दे का चलन आपको कई अन्य धर्म जैसे कि ईसाई और यहूदी धर्म में भी देखने को मिलता है। 

मुस्लिम महिलाएं क्यों पहनती हैं हिजाब-

कुरान में महिलाओं और पुरुषों को सादे कपड़ों को पहनने की हिदायत दी जाती है, जिसे धर्म के अनुसार ही लोग फॉलो करते हैं। मुस्लिम महिलाएं ढिले कपड़े पहनती हैं, जिससे उनका बॉडी शेप हर किसी को ना दिखे। मुस्लिम महिलाएं कुरान में दी गई हिदायत के हिसाब से ही गैर लोगों के सामने खुद को तैयार करती हैं। 

धूप से बचने के लिए हुई थी हिजाब की शुरुआत- 

history of hijab in islam

आज धर्म के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले हिजाब की शुरुआत धूप से बचने के लिए की गई थी। CNN की रिपोर्ट के हिसाब से हिजाब के साक्ष्य मेसोपोटामिया सभ्यता में देखने को मिलते हैं। माना जाता है कि शुरुआती दौर में बारिश और धूप से बचने के लिए लिनेने के कपड़े से सिर ढका जाता था। मगर समय के साथ हिजाब धर्म से जुड़ गया और महिलाओं, विधवाओं और बच्चियों के लिए इसे पहनना अनिवार्य कर दिया गया। धीरे-धीरे हिजाब परंपरा और सम्मान का प्रतीक बन गया।

यहां पर मिलता है हिजाब का जिक्र- 

 हिजाब पहनने की परंपरा को इस्लाम में महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि हिजाब की जगह कुरान में खिमार के बारे में जरूर सुनने को मिलता है। इस बात से हम यह जान सकते हैं कि इस्लाम में सिर ढकने की परंपरा 6 वीं शताब्दी से ही चली आ रही है। 

हिजाब और खिमार दोनों पहनने में थोड़े से अगल होते हैं, मगर दोनों का इस्तेमाल महिलाओं के शरीर को ढकने के लिए किया जाता है। सूरह अल-अहज़ाब की आयत 59 में यह कहा गया है कि ‘ऐ पैगंबर अपनी पत्नियों, बेटियों और ईमान वाली महिलाओं से कहो कि वो अपने बाहरी वस्त्रों के अपने ऊपर लें। यह उनके लिए अधिक उपयुक्त होगा कि न ही उन्हें पहचाना जाएगा और ना ही उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाएगा, अल्लाह हमेशा क्षमाशील और दयावान है।’

इस्लाम से पहले भी मौजूद था हिजाब- 

इस्लाम की शुरुआत करीब 1400 साल पहले हुई थी, मगर हिजाब उससे पहले भी महिलाओं द्वारा पहना जाता था। बता दें कि पुराने जमाने में इजिप्ट की अमीर महिलाओं में चेहरा ढकने का फैशन हुआ करता था, उनके लिए यह किसी फैशन स्टेटमेंट की तरह हुआ करता था। शाही परिवार की महिलाएं ऐसा इसलिए भी करती थीं, क्योंकि ऐसा करने से चोर- बदमाश भी उनसे डरा करते थे। पर्दा और हिजाब देखकर ही चोर यह समझ जाते थे कि महिला किसी रईस परिवार की है, ऐसे में वो भी बड़े घर की महिलाओं से लूटपाट करने से बचते थे। मिडिल ईस्ट के इस चलन के बाद ही शायद पर्दे को महिलाओं के लिए सुरक्षित मानने की धारणा बन गई।

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गरीब और वेश्याओं को नहीं थी सिर ढकने की इजाजत- 

CNN की रिपोर्ट की माने तो पर्दा या हिजाब रईस और बड़े घर की महिलाओं द्वारा ही पहना जाता था, वहीं निम्न वर्ग की महिलाओं को पर्दा करने या सिर ढकने की सख्त मनाही थी। अगर कोई भी निम्न वर्ग की महिला सिर ढक भी ले, तो उसे इस बात की सजा दी जाती थी और उसे गिरफ्तार भी कर लिया जाता था। 

 ईसाई धर्म का भी देखने के मिलता है सिर ढकने का चलन-

all about history of hijab

पश्चिमी देशों में यूं तो हिजाब पर बैन लगाया गया है, मगर धार्मिक रूप से सिर ढकने की परंपरा ईसाई धर्म में भी देखने को मिलती है। बता दें कि ईसाइयत में सेंट पॉल ऐसा लिख चुके हैं कि महिलाओं को सिर ढकना चाहिए और यह उनके लिए अनिवार्य है। यही वजह है कि आपने चर्च की नन को हेड स्कार्फ पहने जरूर देखा होगा, इतना ही नहीं ब्रिटिश शाही परिवार की महिलाएं सार्वजनिक मौकों पर अक्सर हैट या वेल में नजर आती हैं। माना जाता है कि यह उनके सिर ढकने का नया तरीका है।

समय के साथ हिजाब में किए गए बदलाव- 

समय के साथ हिजाब में कई तरह के बदलाव किए गए। अलग-अलग डिजाइनर्स ने इसे महिलाओं के लिए और भी ज्यादा स्टाइलिश बना दिया। हालांकि, हिजाब को लेकर दुनिया भर में तरह-तरह की धारणाएं हैं। जहां कई देशों में महिलाएं इसके बिना घर से बाहर नहीं निकल सकती हैं, वहीं कुछ देश ऐसे भी हैं, जहां हिजाब पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ है।

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ये हैं दुनिया भर में पहने जाने वाले इस्लामी कपड़े- 

hijab in islam

केवल हिजाब ही नहीं मुस्लिम महिलाएं अपने आप को ढकने के लिए कई अन्य तरह के कपड़ों का इस्तेमाल करती हैं। जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए- 

नकाब-

बता दें कि नकाब एक तरह का घूंघट होता है, जिसमें केवल आंखें खुली होती हैं और चेहरे के साथ सिर का हिस्सा पूरी तरह से ढका होता है। 

खिमार- 

यह कुछ हद तक हिजाब के जैसा होता है, जिसमें एक लंबे दुपट्टे से सिर और बदन के ऊपरी हिस्से का ढ़का जाता है। इसके अलावा इसमें भी महिला का चेहरा खुला रहता है। 

शयला- 

यह एक आयताकार कपड़े का टुकड़ा होता है जिसे सिर के चारों ओर लपेटकर पिनअप किया जाता है। 

तो ये था हिजाब से जुड़ा इतिहास, आपको हमारा यह आर्टिकल अगर पसंद आया हो इसे लाइक और शेयर करें, साथ ही ऐसी जानकारियों के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी के साथ।

image credit- freepik

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