हमारे देश में समय-समय पर जेंडर न्यूट्रैलिटी यानी कि लैंगिक तटस्थता और समानता की बातें की जाती हैं और सरकार इसके लिए कई नियम भी बनाती है। कई तरह की योजनाएं हमारे देश में लड़कियों को आगे बढ़ाने के लिए बनाई जाती हैं और उन पर अमल भी किया जाता है। लेकिन जेंडर न्यूट्रैलिटी के लिए केरल के एक स्कूल ने अनोखी पहल करते हुए एक अलग कदम उठाया है। दरअसल, केरल के स्कूल ने स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं और छात्रों दोनों की स्कूल यूनिफार्म एक जैसी करने की घोषणा की है। केरल राज्य के इस स्कूल ने जेंडर न्यूट्रैलिटी के लिए एक कदम आगे बढ़ाया है और राज्य में जेंडर न्यूट्रैलिटी को प्रोत्साहित करने के लिए ऐसा किया है। इस स्कूल के इस निर्णय का उद्देश्य है देश की बड़ी आबादी में इस निर्णय को शामिल करना जिसका हिस्सा बच्चे हैं। 

केरल राज्य के इस स्कूल का मानना है कि स्कूल में जेंडर न्यूट्रैलिटी के लिए उठाया गया ये कदम पूरे देश को सकारात्मक रूप से बढ़ावा देने में मदद करेगा। स्कूलों में एक जैसी यूनिफार्म अब तक छात्रों और शिक्षाविदों के लिए समान रूप से अकल्पनीय थी लेकिन स्कूल का ये कदम वास्तव में सराहनीय है।आइए जानें कौन सा है ये स्कूल और कैसे की ये पहल। 

कौन सा है ये स्कूल 

gender equality kerala school

केरल के एर्नाकुलम जिले के पेरुंबवूर के पास वलयनचिरंगारा सरकारी लोअर प्राइमरी स्कूल ने अपने सभी छात्रों के लिए एक समान ड्रेस की शुरुआत करके जेंडर इक्वलिटी का रास्ता दिखाया है। ये निर्णय स्कूल की प्रधानाध्यापिका ने साल 2018 में लिया था। स्कूल की तत्कालीन प्रधानाध्यापिका सी राजी ने साल 2018 में छात्र और छात्राओं के लिए एक जैसी स्कूल ड्रेस की नीति पेश की थी। 

इसे जरूर पढ़ें:अपने गांव में बारहवीं पास करने वाली पहली आदिवासी लड़की ने क्वालीफाई की नीट की परीक्षा

जेंडर न्यूट्रैलिटी के लिए पहल 

केरल के इस स्कूल में कुल 754 छात्रों की संख्या है और इस स्कूल ने जेंडर न्यूट्रैलिटी की दिशा में पहला कदम उठाया है और अपने छात्रों के लिए एक नई यूनिफार्म पेश की है।  इस यूनिफार्म में एक 3/4 शॉर्ट्स और शर्ट शामिल हैं जो सभी छात्र और छात्राओं को पहनना होगा। आपको बता दें, नए ड्रेस कोड की योजना 2018 में बनाई गई थी और इसे स्कूल के निचले प्राथमिक खंड में पेश किया गया था और इस शैक्षणिक वर्ष में, जब लॉकडाउन के बाद स्कूलों को फिर से खोल दिया गया था, तो इसे सभी छात्रों के लिए पारित कर दिया गया है। पीटीए के वर्तमान अध्यक्ष विवेक वी, जो 2018 में पीटीए की कार्यकारी समिति का भी हिस्सा थे उन्होंने PTI को बताया कि वे चाहते हैं कि सभी बच्चे समान स्तर की स्वतंत्रता का आनंद ले सकें। विवेक ने कहा, ‘हमें छात्रों और उनके अभिभावकों का समर्थन मिला, हम चाहते थे कि सभी छात्रों की एक समान यूनिफॉर्म हो ताकि सभी को एक समान स्वतंत्रता मिले। सबसे पहले इसे पूर्व प्राथमिक कक्षाओं के लिए लागू किया गया था, जिसमें करीब 200 छात्र हैं। इसे वहां भरपूर समर्थन मिलने के बाद बाकी कक्षाओं के लिए भी यही यूनिफॉर्म तय की गई है।’

इसे जरूर पढ़ें:पाना चाहते हैं सरकारी नौकरी, तो भारत में होने वाली इन परीक्षाओं की करें तैयारी

राज्य के एजुकेशन मिनिस्टर ने कही ये बात 

kerala school decision

केरल राज्य के एजुकेशन मिनिस्टर वी शिवनकुट्टी ने ट्वीट कर स्कूल को बधाई दी और कहा, ‘सिलेबस सुधार के दौरान लैंगिक न्याय, समानता और जागरूकता के विचारों पर जोर दिया जाएगा। इसे केवल टेक्टबुक्स तक सीमित रखने की जरूरत नहीं है। वलयनचिरंगारा एलपी स्कूल का ये सराहनीय कदम है, जिसके तहत सभी छात्र-छात्राएं अब यहां एक जैसी यूनिफॉर्म- शॉर्ट पैंट और शर्ट पहनेंगे। ’उन्होंने कहा कि समाज में इस बात पर चर्चा शुरू करने की जरूरत है कि क्या हमें लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग स्कूल अब भी जारी रखने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने कहा कि लैंगिक समानता और न्याय को स्कूली सिलेबस में शामिल करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। (महिलाओं को करनी चाहिए इन 5 सरकारी नौकरियों की तैयारी)

वास्तव में स्कूल प्रशासन द्वारा उठाया ये कदम सभी बच्चों के लिए एक अच्छा प्रयास है और देश को जेंडर न्यूट्रैलिटी के प्रति जागरूक करने का एक अच्छा कदम भी है। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

Image Credit: freepik