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गणेश जी को क्यों भाती है दूर्वा घास, जानें कथा

गणेश जी की प्रिय दूर्वा घास से जुड़ी यह रोचक कथा आप भी सुनें और जानें क्‍यों है उन्‍हें यह घास इतनी प्रिय। 
Updated:- 2021-09-14, 23:42 IST
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गणेश उत्सव चल रहे हैं। इन दिनों लोग तन, मन और धन से गणेश जी की सेवा करते हैं और हर वो काम करते हैं, जो श्री गणेश जी को खुशी का अनुभव कराता है। इतना ही नहीं, भगवान श्री गणेश को प्रिय हर चीज की व्यवस्था करना और उन्हें अर्पित करना भी इन दिनों भक्तों का सर्वप्रथम काम होता है। ऐसी मान्‍यता है कि श्री गणेश को तरह-तरह के व्यंजन, मिष्ठान के साथ-साथ दूर्वा घास भी बहुत पसंद है। यह घास बहुत ही आसानी से उपलब्‍ध भी हो जाती है। मगर क्‍या आपने कभी यह जानने की कोशिश की है कि आखिर श्री गणेश को दूर्वा घास क्यों इतनी प्रिय है? 

अगर आप यह नहीं जानते हैं, तो आज आपको यह आर्टिकल पूरा पढ़ने के बाद पता चल जाएगा। इसके लिए हमने उज्जैन के पंडित एवं ज्‍योतिषाचार्य मनीष शर्मा से बातचीत की है। वह कहते हैं, 'इस घास के बिना श्री गणेश का पूजन अधूरा है। बेशक आप श्री गणेश को लजीज पकवान और मिष्ठान न चढ़ाएं, मगर दूर्वा घास जरूर चढ़ाएं।'

पंडित जी दूर्वा घास और श्री गणेश जी से जुड़ी एक कथा भी सुनाते हैं- 

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क्‍या है कथा? 

एक पौराणिक कथा के अनुसार भगवान श्री गणेश जी ने अनलासुर नाम के असुर को निगल लिया था। ऐसा उन्होंने तब किया था, जब असुर का आतंक ज्यादा बढ़ गया था और उसने संत, ऋषि-मुनियों एवं देवी-देवताओं को परेशान करना शुरू कर दिया था। असुर के आतंक को खत्म करने के लिए जब गणेश जी ने उसे निगल लिया, तो उनके पेट में जलन होने लगी। बहुत प्रयास किए गए कि गणेश जी के पेट की जलन मिट जाए, मगर कोई भी उपचार काम नहीं आया। तब उन्होंने पेट की जलन को दूर करने के लिए जमीन पर उगी घास खा ली। यह दूर्वा घास थी और इस घास को खाते ही गणेश जी के पेट की जलन शांत हो गई। इस घटना के बाद से ही श्री गणेश जी को दूर्वा घास अर्पित की जाने लगी। 

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श्री गणेश को दूर्वा घास अर्पित करने के नियम 

  • वैसे श्री गणेश को दूर्वा घास की 21 गांठ चढ़ाई जाती हैं। मगर यदि आप इतना न चढ़ा पाएं तो विषम संख्या 3, 5, 7 गांठ भी अर्पित कर सकते हैं। 
  • हमेशा श्री गणेश पर ताजी दूर्वा घास ही अर्पित करें। इस घास को श्री गणेश पर अर्पित करने से पहले उसे पानी से साफ कर लें। इस घास को ताजा बनाए रखने के लिए इस पर पानी छिड़कते रहें। 
  • दूर्वा घास के साथ-साथ श्री गणेश जी को गुड़हल का फूल भी अर्पित करें। इस बात का ध्यान रखें कि दूर्वा घास कटी-फटी और सूखी हुई न हो। 
  • गणेश जी की प्रतिमा को घर में स्थापित किया है, तो आपको सुबह और शाम दोनों वक्त दूर्वा घास बदल देनी चाहिए। 
  • आप दूर्वा घास से बनी माला या हार भी श्री गणेश जी को अर्पित कर सकते हैं। 
  • इस बात का भी ध्‍यान रखें कि जब आप दूर्वा घास श्री गणेश जी को अर्पित करें, तो इस उनकी सूंड के पास रखें या फिर उसमें फंसा दें। 

इस कथा को जानने के बाद आप भी जब श्री गणेश को दूर्वा अर्पित करें, तो पंडित जी द्वारा बताए गए नियमों का पालन जरूर करें। पंडित जी कहते हैं, 'श्री गणेश को चढ़ी दूर्वा को आप ग्रहण भी कर सकते हैं। सेहत के लिए दुर्वा घास के कई फायदे हैं। इसके साथ ही आप श्री गणेश जी पर चढ़ी दूर्वा घास को फेंके नहीं बल्कि उसे गमले में गाड़ दें या फिर किसी किताब के बीच में रख लें। आप इस घास को घर के हर कोने में भी रख सकते हैं। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास बना रहता है।'

 


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