हिंदी दिवस के बारे में आप क्या जानते हैं? 14 सितंबर को मनाया जाने वाला ये दिन बहुत खास है। वैसे तो हिंदी भाषा अपने आप में इतनी विशाल है कि इसे किसी एक दिन या किसी एक परिभाषा में समेटना मुश्किल है, लेकिन हर मोड़ पर हिंदी से जुड़े साहित्यकार और लेखक इसके विकास को लेकर अपना योगदान देते रहते हैं। ऐसी ही एक लेखिका हैं अनु सिंह चौधरी। सुष्मिता सेन द्वारा अभिनित वेब सीरीज 'आर्या' की सह-लेखिका अनु सिंह चौधरी ने कई कहानियां और किताबें लिखी हैं। उनके द्वारा लिखी गई 'नीला स्कार्फ' , 'मम्मा की डायरी' आदि किताबें लोगों को बहुत पसंद आती हैं।  

अनु सिंह चौधरी ग्लोबल प्लेटफॉर्म वॉटपैड के माध्यम से एक मास्टरक्लास का आयोजन कर रही हैं जो हिंदी लेखन से जुड़ी होगी। हिंदी लेखन की कला को लेकर न सिर्फ अनु सिंह चौधरी इस मास्टरक्लास में लोगों के सवालों के जवाब देंगी बल्कि कुछ वीडियोज भी दिखाएंगी। हिंदी दिवस पर उनके काम और हिंदी साहित्य में उनकी रुचि को लेकर हमने अनु सिंह चौधरी से खास बातचीत की।  

1. हिंदी लिट्रेचर से आपका जुड़ाव कैसे हुआ? 

भोजपुरी और हिंदी मेरी मातृभाषाएं हैं। बेहद हिंदी भाषी परिवेश में पली-बढ़ी हूं। मेरी तो पढ़ाई-लिखाई भी हिंदी में हुई है। याद ही नहीं कि किस उम्र में और कैसे हिन्दी साहित्य से जुड़ती चली गई, और फिर हिंदी में लिखाई-पढ़ाई को अपने जिंदगी का तरीका बना लिया। 

anu singh choudhry class

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 2. 'आर्या' सीरीज लिखते समय क्या आपको ये महसूस हुआ कि इसे अन्य हिंदी वेब सीरीज से अलग बनाना बहुत जरूरी है? 

हर राइटर और फ़िल्मकार की कोशिश होती है कि कुछ बनाते हुए अलग बनाने की कोशिश की जाए। हालांकि आर्या सीरीज के एक अलग किस्म के वेब सीरिज़ होने का पूरा क्रेडिट मैं बिलकुल नहीं ले सकती (क्योंकि ये पूरी तरह क्रिएटर राम मधवानी और उनकी टीम का चमत्कार है), मैं आर्या की एक अहम किरदार (आर्या की बेटी अरुंधती) को हिन्दी कविता के प्रति प्रेम देने का थोड़ा सा क्रेडिट ज़रूर ले सकती हूं। इस टीनएजर की ज़ुबान और कलम से हिंदी कविताएं निकलती हैं। ये कविताएं मैंने लिखीं, और इसमें से एक कविता सीरिज़ के आख़िर में एक रैप सॉन्ग में भी तब्दील हो जाती है। दो बेहद युवा और बहुत हुनरमंद संगीतकारों की जोड़ी विशाल खुराना और सिद्धांत मधवानी ने इस रैप सॉन्ग का संगीत दिया, और इसे ‘सोल ऑफ़ आर्या’ का नाम दिया गया। बस कुछ ऐसी ही छोटी-छोटी कोशिशों के साथ आर्या को एक अलग किस्म की वेब सीरिज़ बनाने का जज्बा कामयाब रहा। 

3. एक फैक्ट है कि दुनिया के 30 से अधिक देशों में हिंदी पढ़ी-पढ़ाई जाती है, ऐसे में क्या आपको लगता है कि आजकल भारत में इसे थोड़ा ग्लैमराइज कर दिया गया है? 

हिंदी को ग्लैमराइज करने की ज़रूरत ही नहीं है। ग्लैमर का लबादा तो वहां चाहिए होता है जहां भीतर से सब कुछ खाली हो।  

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4. एक अच्छी कहानी अगर किसी को लिखनी हो तो उसे क्या ध्यान रखना चाहिए? 

काश इस सवाल का जवाब एक वाक्य में देना मुमकिन हो पाता। एक अच्छी कहानी अगर किसी को लिखनी हो तो उसे सिर्फ़ और सिर्फ़ बैठकर लिखने पर ध्यान देना चाहिए। अच्छे लेखन का क्राफ्ट अभ्यास से ही आता है। 

5. भारत में कहानी पढ़ने और लिखने वालों की कमी नहीं है। आपका एक्सपीरियंस क्या कहता है कि यहां लोग किस तरह की कहानियां पढ़ना चाहते हैं? 

यही तो कमाल बात है हमारे देश की, कि यहां हर तरह की हिंदी कहानियों को कहने, लिखने और सुनने वाले मिलेंगे। मेरे एक्सपीरियंस में तो ‘लोग क्या पढ़ना चाहेंगे’ के बारे में न सोचकर सिर्फ़ और सिर्फ़ लिखने पर ध्यान देना ही काम आता है।  

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6. आप हिंदी दिवस पर एक मास्टरक्लास का आयोजन कर रही हैं इसके बारे में कुछ बताएं? 

जो लिखते-लिखते सीखा है मैंने, इस मास्टरक्लास में बस उसी का निचोड़ है। अपनी कलम को कैसे साधा जाए - वॉटपैड पर मिलने वाला ये मास्टरक्लास उसी के बारे में है।   

अगर आप मास्टरक्लास से जुड़ना चाहते हैं तो यहां क्लिक कर जुड़ सकते हैं।  

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7. इस मास्टरक्लास में आप वीडियोज भी रिलीज करने जा रही हैं, क्या खास होगा इन वीडियोज में? 

इन वीडियोज़ में हिंदी रचनात्मक लेखन से जुड़े हुए कुछ टिप्स होंगे। और कुछ बेसिक बातें होंगी - मिसाल के तौर पर प्लॉट और कहानी में क्या अंतर है? एक कारगर किरदार कैसे रचा जाए? स्टोरी प्रॉम्प्ट भी होंगे कुछ - ताकि मास्टरक्लास के बाद ऑडियंस और वॉटपैड पर लिखने की ख्वाहिश रखने वाले यंग राइटर्स को लिखने की प्रेरणा मिल सके।  

8. हमारे बीच ऐसे कई टैलेंटेड लोग हैं जिनमें प्रतिभा तो है, लेकिन किसी न किसी वजह से वो लिख नहीं पाते। ऐसे राइटर्स को प्रोत्साहित करने के लिए आप क्या मैसेज देना चाहेंगी? 

लिखते रहिए, और अपनी कलम को साधते रहिए। आपके पास तो वॉटपैड जैसे प्लैटफॉर्म भी हैं जो न सिर्फ़ लिखने के लिए एक प्लैटफॉर्म देते हैं बल्कि आपको रीडर्स की इतनी बड़ी कम्युनिटी से भी जोड़ते हैं।  

9. ऐसा कुछ जो इस खास मौके पर आप हमारे रीडर्स के साथ शेयर करना चाहें? 

बस वही एक बात जो मुझसे कई साल पहले एक मशहूर राइटर ने कही थी - लिखना सिर्फ़ और सिर्फ़ लिखने से आता है, और ख़ूब-ख़ूब सारा पढ़ने से। बस यही एक टिप है जो काम आती है। एक और बात। अपनी भाषा में पढ़ने और लिखने का सुख और संतोष अपनी मां के हाथ का खाना खाने जैसा होता है। जितना हो सके, उस सुख को बचाए रखना चाहिए। 

उम्मीद है कि अनु सिंह चौधरी का ये इंटरव्यू आपको पसंद आया होगा। हिंदी दिवस की शुभकामनाएं आप सभी के लिए। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।