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इस मंडी में बिकते हैं दूल्हे, एक-एक कर लगाई जाती है बोली

अगर आपको दूल्हा बाज़ार के बारे में नहीं पता है तो शायद आप बिहार की बहुत पुरानी परंपरा से वाकिफ नहीं हैं। 
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Published -22 Aug 2022, 20:14 ISTUpdated -23 Aug 2022, 16:31 IST
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How grooms are sold

'दूल्हा मिल गया' तो आपने सुना होगा, लेकिन क्या कभी आपने 'दूल्हा बिक गया .. ' ऐसा कोई सेंटेंस सुना है? नहीं-नहीं यहां पर महिमामंडन नहीं किया जा रहा है और 'दहेज का मतलब दूल्हे को बेचना' ऐसी भारी बातों का जिक्र नहीं हो रहा है। यहां तो वाकई दूल्हे की बोली लगाने की बात हो रही है। ये रिवाज है बिहार के एक इलाके का जहां पर सालों से दूल्हों को बेचने की रस्म निभाई जा रही है। यहां दूल्हों की बाकायदा रेट लिस्ट भी होती है। 

ये बात है बिहार के मधुबनी जिले की जहां पर लोकल दूल्हा बाज़ार लगाया जाता है। इसे सौराठ सभा भी कहा जाता है और स्थानीय मान्यता के अनुसार ये प्रथा पिछले 700 सालों से चली आ रही है। 

क्या है सौराठ सभा?

बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र में ये हर साल लगने वाली सभा है जहां पर लड़कियों के परिजन अपनी बेटी के लिए योग्य लड़के की तलाश करते हैं। 

यहां पर हर तरह का दूल्हा होता है और परिवार का स्टेटस, लड़के की पढ़ाई और कमाई, कुंडली आदि के हिसाब से दूल्हे का चुनाव किया जाता है। 

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क्या है दूल्हा बाज़ार की प्राचीन मान्यता?

पुराने जमाने में गुरुकुल से सीधे युवकों को इस सभा में लाया जाता था। ये सभा शुरू करने वाले मैथिल ब्राह्मण और कायस्थ थे। गुरुकुल के युवकों का चुनाव करने के बाद यहां के परिवार अपनी बेटियों की शादी करवा दिया करते थे। यहां इस बात का बहुत ध्यान रखा जाता था कि कहीं युवकों के परिवार और लड़की के परिवार के बीच कोई संबंध तो नहीं है। (आखिर क्यों ऋषि अगस्त्य ने की थी अपनी बेटी से शादी)

वैसे तो इसकी शुरुआत ब्राह्मणों और कायस्थों के लिए हुई थी, लेकिन अब ये सभी के लिए हो गई है। 

 

एक साथ आते हैं हज़ारों दूल्हे 

अब ये सभा इतनी ज्यादा पसंद की जाने लगी है कि धोती-कुर्ता पहन हज़ारों लड़के आपको इस सभा में मिल जाएंगे। कई बार तो दूल्हों की बोली इतनी ज्यादा लगाई जाती है कि लोगों को आश्चर्य हो जाए। यहां पर लाखों के दूल्हे भी बिके हैं। अब आप इसे दहेज समझ लें या फिर कुछ और लेकिन दूल्हों का बाज़ार तो यहां सदियों से चला आ रहा है।  

bihar grrom market

दूल्हा खरीदने से पहले कई बातों का ध्यान रखा जाता है जिसमें दूल्हे की क्वालिफिकेशन, परिवार का लेखा-जोखा आदि अहम होता है।  

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कई बार की जाती है अनोखी डिमांड 

दूल्हों के इस बाज़ार में बहुत ही अनोखी डिमांड भी मिल जाएगी जहां दूल्हों से उनका बर्थ सर्टिफिकेट, स्कूल सर्टिफिकेट, सैलरी स्लिप आदि भी मांग लिया जाता है। जब तक लड़की वाले पूरी तरह से दूल्हे को पसंद नहीं कर लेते हैं तब तक बात आगे नहीं बढ़ती है। आपको शायद पता ना हो, लेकिन चट मंगनी और पट ब्याह का इससे अच्छा उदाहरण आपको नहीं मिलेगा क्योंकि यहां पर लड़की वालों के संतुष्ट होते ही शादी की तैयारी भी हो जाती है और कई बार तो वहीं शादी भी हो जाती है।  

सबसे जरूरी चीज़ जो इस दूल्हा बाज़ार में चेक होती है वो है लड़के और लड़की का गोत्र। अगर गोत्र एक ही है तो फिर दोनों की शादी नहीं होगी।  

एक ऐसा समाज जहां पर दहेज को गलत माना जाता है वहां इस तरह का दूल्हा बाज़ार खुलेआम लड़कों की बोली लगाकर दहेज को मान्यता दे रहा है। आप इसे क्या कहेंगे? प्राचीन सभ्यता या फिर सामाजिक बुराई? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।  

Image Credit: Shutterstock/ freepik

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