मनोज बाजपेयी के साथ फ़िल्म ‘गली गुलियाँ’ में दिखाई देने वाली आहना कुमरा ने जब फ़िल्म ‘लिपस्टिक अंडर माय बुरखा’ की थी, तब लोगों ने उन्हें बहुत क्रिटीसाइज़ किया था। फ़िल्म के टॉपिक और आहना की बोल्डनेस को लेकर भी काफी विवाद खड़ा हुआ था। लेकिन, इन सब से परे आहना का मानना है कि अच्छा हुआ कि यह फ़िल्म Banned हुई।

जी हाँ, ये बात खुद आहना ने हमसे कही है। आहना का कहना है कि अगर ये Banned नहीं होती तो लोगों के अन्दर इसे देखने की रूचि पैदा नहीं होती, जो भी होता है अच्छे के लिए होता है। आहना ने हमें ये भी बताया कि कैसे इस फ़िल्म की वजह से उनकी सोच बदली, आइये जानते हैं-

जब माँ को पता चला कि मेरी फ़िल्म Banned है

आहना ने कहा कि मेरे पेरेंट्स मेरे काम में किसी प्रकार की दखलंदाजी नहीं करते। कई बार उन्हें यह समझ में भी नहीं आता कि मैं क्या कर रही हूँ, उनका बस यही कहना कि मैं कुछ गलत ना करूँ। जब ‘लिपस्टिक...’ रिलीज़ हो रही थी तो मैंने उनसे कहा था कि इस फ़िल्म में बहुत बोल्ड सीन्स भी हैं और अगर आप कम्फर्टेबल नहीं हैं तो आप मत जाना यह फ़िल्म देखने। तब उन्होंने मुझसे कुछ नहीं कहा पर जब फ़िल्म पर विवाद शुरू हुए और इसे Banned कर दिया गया तब मेरी माँ ने मुझसे पूछा कि क्या कर दिया है तुमने, सब लोग इतनी बाते कर रहे हैं? इसके साथ ही साथ मेरी माँ ने मुझे यह भी बताया कि वो बहुत खुश हैं कि उन्होंने इस तरह की फ़िल्म को चुना। आस पास की सभी औरतें इस फ़िल्म को देखना चाहती थीं और मेरी माँ भी। उनकी यह बात सुनकर मैं बहुत खुश हुई थी।

aahana kumra say no

फ़िल्म ‘लिपस्टिक...’ ने बदली है मेरी सोच

आहना आगे कहती हैं कि इस फ़िल्म को करने के बाद मेरी खुद की सोच भी बहुत बदली है। इससे पहले जब मैंने केमिस्ट के पास सैनिटरी पैड्स लेने जाती थी तो वो मुझे ब्राउन बैग में पैक करके देता था और मैं ले लेती थी। अब मुझे लगता है कि मैं खुद के बारे में, अपनी बॉडी के बारे में कुछ गन्दा कैसे सोच सकती हूँ। अब मैंने ये सब बंद कर दिया है। मुझे याद है जब मैं पहले शूटिंग किया करती थीं और मुझे पीरियड्स आ जाते थे तो मैं अपने डायरेक्टर और को-एक्टर को कह भी नहीं पाती थी कि मुझे वैनिटी में चेंज करने जाना है। इस फ़िल्म ने मुझे यह सिखाया है कि आप अगर अपने बारे में गलत सोचेंगे तो सभी सोचेंगे।

अब मैं शॉट्स के बीच चिल्ला कर कहती हूँ कि मुझे सैनिटरी पैड चाहिए, या मुझे मेरे पीरियड्स की वजह से वैनिटी में जाना है। मुझे लगता है औरतों को पहले अपनी सोच बदलनी चाहिए।

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माँ से सीखा है ना बोलना

आहना से हमने पूछा कि उन्होंने अपनी माँ से क्या सीखा है तो उन्होंने तुरंत जवाब में कहा कि मैंने उनसे ना बोलना सीखा है। उन्होंने हमें हमेशा यही समझाया है कि गलत काम के लिए हमेशा ना कहो, भले ही आप ये ना अपने को-स्टार, दोस्त या फिर पति को ही बोल रहे हों। ना बोलना बहुत ज़रूरी है, कोई काम नहीं करना ‘ना’ बोलिए, कहीं नहीं जाना ‘ना’ बोलिए। इसमें कुछ गलत नहीं है।

 

  • Kirti Jiturekha Chauhan
  • Her Zindagi Editorial