World Suicide Prevention Day 2026: आंखों की थकान से बदले व्यवहार तक, मन के संकेत पहचानें

जब कोई इंसान मानसिक रूप से परेशान होता है, तो उसका असर केवल उसकी सोच पर नहीं पड़ता, बल्कि उसकी आंखों की थकान, बात करने के तरीके और रोजमर्रा के बर्ताव में भी साफ दिखने लगता है। 10 सितंबर 2026 को मनाए जाने वाले 'विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस' के मौके पर इस बार का संदेश है 'बातचीत की शुरुआत करें'। तीन साल तक चले विशेष अभियान 'मेंटल हेल्थ पर सोच बदलें' का यह आखिरी साल है। World Suicide Prevention Day 2026 का मुख्य थीम "Changing the Narrative on Suicide" (आत्महत्या पर सोच बदलें) है, जिसका कॉल टू एक्शन बातचीत की शुरुआत करें, रखा गया है।
इसका मकसद यही है कि हम अपने आसपास के लोगों में आ रहे छोटे बदलावों को वक्त रहते समझें और किसी को बड़े हादसे का शिकार होने से बचा लें। ऐसे में इन छोटे बदलावों के बारे में पता होना जरूरी है। इसके लिए हमने डेल्ना राजेश (Delnna Rrajesh) जो एक अनुभवी साइकोथेरेपिस्ट (मनोचिकित्सक), एनर्जी हीलर और रेकी ग्रैंडमास्टर है, से भी बात की है। जानते हैं आगे...
किन संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है?
हर व्यक्ति के दुख व्यक्त करने का तरीका अलग होता है, लेकिन जब किसी के स्वभाव में अचानक बड़ा बदलाव आने लगे, तो सतर्क हो जाना चाहिए।
बोलचाल में दिखने वाले संकेत निम्न प्रकार हैं-
- खुद को दूसरों पर बोझ बताना और यह कहना कि उनके बिना सब बेहतर रहेंगे।
- जीवन में अत्यधिक निराशा, खालीपन, या खुद को किसी जाल में फंसा हुआ महसूस करना।
- गहरा गिल्ट, अपराधबोध या मानसिक-शारीरिक दर्द का जिक्र करना।
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व्यवहार और जीवनशैली में बदलाव निम्न प्रकार हैं-
- अपनों और दोस्तों से दूरी बना लेना तथा पसंदीदा कामों से अचानक मन ऊब जाना।
- रातों की नींद उड़ जाना या दिन-रात सोते रहना, साथ ही खान-पान की आदतों में बड़ा बदलाव।
- शराब, ड्रग्स या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन अचानक बढ़ा देना।
- तेज गाड़ी चलाना या खुद को खतरे में डालने जैसे लापरवाही भरे कदम उठाना।
जब परिस्थिति अंतिम पड़ाव पहुंच जाए तो निम्न संकेत नजर आ सकते हैं-
- अपनी पसंदीदा और कीमती चीजें दूसरों को दे देना।
- अपने जरूरी कामों या वसीयत को जल्दबाजी में समेटना।
- इस तरह से अलविदा कहना जैसे वे कभी वापस नहीं लौटेंगे।
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ग्रस्त लोगों की कैसे मदद करें?
अगर आपको किसी करीबी के व्यवहार में ऐसा कोई बदलाव नजर आता है, तो घबराने के बजाय सही समय पर सही कदम उठाना बेहद जरूरी है।
- सीधे और साफ शब्दों में बात करें: अगर आपको शक है, तो उनसे खुलकर पूछें। यह सोचना गलत है कि आत्महत्या के बारे में पूछने से उनके मन में यह विचार आ जाएगा, बल्कि सच यह है कि बातचीत से उनका मन हल्का होता है।
- बिना किसी फैसले के बात सुनें: उनकी बात को बिना जज किए, ध्यान और हमदर्दी के साथ सुनें। उन्हें यह अहसास कराएं कि आप उनकी तकलीफ समझ रहे हैं।
- किसी प्रोफेशनल की मदद ले: उन्हें किसी अच्छे काउंसलर या डॉक्टर के पास ले जाएं। भारत सरकार की निशुल्क और 24 घंटे उपलब्ध 'टेली-मानस' (Tele-MANAS) हेल्पलाइन सेवा के नंबर 14416 पर कॉल करके तुरंत मदद ली जा सकती है।
यदि आपको लगता है कि व्यक्ति खुद को तुरंत नुकसान पहुंचा सकता है या स्थिति बहुत नाजुक है, तो एक पल भी न गंवाएं। तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचे या आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं से संपर्क करें।
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निष्कर्ष
मानसिक तनाव और आत्महत्या के विचारों से जूझ रहा व्यक्ति अक्सर मदद की गुहार लगा रहा होता है, बस जरूरत है उसकी खामोशी को सुनने की। आंखों की उदासी से लेकर बर्ताव की दूरी तक, ये तमाम इशारे एक पुकार होते हैं।
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