मेनोपॉज में खुद से ही परेशान क्यों रहने लगती हैं महिलाएं? समझें मूड और हार्मोन्स का कनेक्शन

मेनोपॉज महिलाओं की जिंदगी का एक सामान्य पड़ाव है। इस समय पर शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव कई बार मूड और व्यवहार को भी प्रभावित कर सकते हैं। कुछ महिलाओं को इस दौरान बिना किसी स्पष्ट वजह के चिड़चिड़ापन, बेचैनी, उदासी या बार-बार परेशान महसूस होने जैसी दिक्कत हो सकती है। कई बार उन्हें खुद भी समझ नहीं आता कि आखिर छोटी-छोटी बातें इतनी परेशान क्यों कर रही हैं? ऐसे में कई बार महिलाएं खुद से ही परेशान रहने लगती हैं। आखिर ऐसा क्यों होता है, इस समय पर किस तरह से हार्मोन्स मूड को प्रभावित करते हैं और कैसे इस वक्त पर महिलाओं को अपना खास ख्याल रखना चाहिए, चलिए इसका जवाब एक्सपर्ट से जानते हैं। यह जानकारी डॉक्टर सोनू खोखर, एमबीबीएस, हेल्थ एंड वेलनेस एक्सपर्ट (Dr. Sonu Khokhar, MBBS Doctor, Health and Wellness Expert) दे रही हैं।
हार्मोन्स में बदलाव से मूड क्यों प्रभावित होता है?
मेनोपॉज के आसपास शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन्स के स्तर में उतार-चढ़ाव होने लगता है। एस्ट्रोजन का संबंध सिर्फ फर्टिलिटी से नहीं है, बल्कि यह दिमाग में मूड को नियंत्रित करने वाले कई केमिकल्स और प्रक्रियाओं को भी प्रभावित करता है। एस्ट्रोजन के लेवल में होने वाले इस बदलाव के चलते कुछ महिलाओं को मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ापन, बेचैनी या भावनात्मक उतार-चढ़ाव ज्यादा महसूस हो सकते हैं। हालांकि, हर महिला में इसका असर एक जैसा नहीं होता।

छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा क्यों आने लगता है?
मेनोपॉज के दौरान नींद में परेशानी, हॉट फ्लैशेज, रात में पसीना आना और थकान जैसी समस्याएं भी आम हो सकती हैं। इस समय पर कई महिलाओं को छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आने लगता है, तो कुछ महिलाएं बिना किसी बड़ी वजह के रोना लगती हैं। हर बार समस्या सिर्फ हार्मोन्स की नहीं होती, हार्मोनल बदलाव, खराब नींद, थकान और रोजमर्रा का तनाव मिलकर मूड को प्रभावित कर सकते हैं।
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मेनोपॉज में खुद से ही परेशान क्यों रहने लगती हैं महिलाएं?
इसे समझना बहुत जरूरी है। अक्सर इसे नजरअंदाज कर दिया जाता है या फिर महिलाएं इसके बारे में किसी से बात नहीं कर पाती हैं, लेकिन मेनोपॉज में कई बार महिलाएं खुद से परेशान रहने लगती हैं।
- इसके पीछे सिर्फ हार्मोनल इंबैलेंस नहीं होता है। इस समय पर कई बार महिलाओं को सही सपोर्ट नहीं मिल पाता है।
- उनके मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ेपन या परेशानी को समझने के बजाय उनका पार्टनर, बच्चे या परिवार के लोग उन्हें ऐसा महसूस करवाने लगते हैं कि शायद वह अपनी जिम्मेदारियां ठीक तरह से नहीं निभा रही हैं या हर बात पर ओवररिएक्ट करने लगी हैं।
- इस दौरान कुछ महिलाएं अपने शरीर में हो रहे बदलावों को लेकर भी असहज महसूस कर सकती हैं। वजन में बदलाव, त्वचा और बालों में परिवर्तन, पीरियड्स का अनियमित होना या इंटिमेट लाइफ से जुड़े बदलाव भी उन्हें परेशान करते हैं।
- ऐसे में महिला को लग सकता है कि वह अब पहले जैसी नहीं रहीं। यही भावना कई बार बेचैनी या मूड खराब रहने की वजह बन सकती है।
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यह है एक्सपर्ट की राय
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क्या सिर्फ मेनोपॉज को इसकी वजह मानना सही है?
हर तरह की उदासी, चिड़चिड़ापन या चिंता को मेनोपॉज से जोड़ना सही नहीं है। अगर मूड लगातार खराब रहता है, किसी काम में मन नहीं लगता, बहुत ज्यादा चिंता रहती है, नींद और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है या लंबे समय तक उदासी बनी रहती है, तो डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना जरूरी है।
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