कुछ लोगों को अंधेरे में सुकून मिलता है, तो कुछ को रोशनी में क्यों आती है नींद? जानें साइकोलॉजी

आपने अक्सर देखा होगा कि कुछ लोग सोते वक्त कमरे की सारी लाइट बंद कर देते हैं, परदे अच्छे से डालते हैं ताकि कहीं से भी कमरे में रोशनी न आए, वहीं कुछ लोग लाइट ऑन रखकर की सोना पसंद करते हैं। चलिए इसके पीछे की साइकोलॉजी समझते हैं।
Updated:- 2026-10-23, 08:54 IST
why some people sleep better in darkness while others prefer light psychology behind sleeping habits

जब तब रूम के सारे पर्दे बंद न हो जाएं...सारी लाइट ऑफ न हो जाए, दिव्या को नींद ही नहीं आती थी...वहीं उसकी रूममेट प्रीति को अंधेरे में डर लगता था और कमरे की लाइट ऑन होने पर ही नींद आती थी...इस बात को लेकर दोनों में लगभग रोज झगड़ा होता था। यह सिर्फ प्रीति और दिव्या की कहानी नहीं है, बल्कि कई लोग इस बात से रिलेट कर पा रहे होंगे। असल में कुछ लोगों को अंधेरे में सुकून मिलता है, जबकि कुछ लोग तभी सो पाते हैं जब कमरे में रोशनी हो। अगर आप सोचते हैं कि ऐसा बस यूं ही होता है या इसके पीछे कोई ठोस वजह नहीं होती है, तो आप गलत हैं। इसके पीछे कई साइकोलॉजिकल कारण होते हैं। चलिए इसके बारे में एक्सपर्ट से जानते हैं। यह जानकारी डॉ. वी. नागार्जुन मटुरू, दे रहे हैं। वह यशोदा हॉस्पिटल्स (हाइटेक सिटी, हैदराबाद) में क्लिनिकल और इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट और क्लीनिकल डायरेक्टर हैं।

सोते समय अंधेरा या रोशनी पसंद आने के पीछे क्या वजह होती है?

  • सोते समय अंधेरा या रोशनी पसंद करना, मनोविज्ञान और शरीर के प्राकृतिक नींद चक्र (स्लीप रिदम) दोनों से प्रभावित होता है। अंधेरा मस्तिष्क को संकेत देता है कि अब आराम करने का समय है, जिससे 'मेलाटोनिन' हार्मोन का स्राव बढ़ता है, यह हार्मोन नींद को नियंत्रित करता है।
  • कई लोगों के लिए अंधेरा कमरा, शांति, प्राइवेसी और सुरक्षा का एहसास कराता है, जिससे मन को शांत करके सोने में आसानी होती है।
  • दूसरी ओर, कुछ लोगों को पूरी तरह अंधेरे में घबराहट या असुरक्षा महसूस हो सकती है। इसका संबंध अंधेरे के डर, पुराने अनुभवों, अपने आस-पास के माहौल के प्रति अत्यधिक संवेदनशीलता या ऐसे सक्रिय दिमाग से हो सकता है जिसे बार-बार तसल्ली की जरूरत होती है। 
  • हल्की रोशनी सुरक्षा का एहसास दे सकती है और रात के समय होने वाली घबराहट को कम कर सकती है, जिससे नींद आने में मदद मिलती है।

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अच्छी नींद के लिए क्या है जरूरी?

एक्सपर्ट का कहना है कि तेज रोशनी या स्क्रीन ऑन रखकर सोने से मेलाटोनिन का स्तर कम हो सकता है और शरीर का प्राकृतिक नींद चक्र (सर्केडियन रिदम) बिगड़ सकता है, जिससे लंबे समय में नींद की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ता है। अगर बात अच्छी नींद की करें, तो सोते समय कमरे में उतना अंधेरा होना चाहिए जितना आपको आरामदायक लगे। जिन्हें रोशनी की जरूरत होती है, वे बिस्तर से दूर एक हल्की, मंद रोशनी वाली 'नाइट लैंप' का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर अंधेरे के डर की वजह से अक्सर नींद न आने की समस्या होती है या आप बहुत परेशान रहते हैं, तो किसी मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल से बात करने से आपकी इस घबराहट को दूर करने में मदद मिल सकती है।

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