हर वक्त चिड़चिड़ापन और थकान... Millennials में क्यों बढ़ रही है मानसिक घुटन?

Gen Z और Millennials की तुलना अक्सर होती रहती है। काम करने के तरीके हो, जिंदगी को देखने का नजरिया हो या रिश्तों को लेकर समझ, इन दोनों पीढ़ियों के बीच कई बातें बिल्कुल अलग हैं। Gen Z के बारे में कहा जाता है कि इन्हें वर्क लाइफ बैलेंस बनाना बखूबी आता है, कब काम को न कहना है और कब खुद को अहमियत देनी है, ये इन्हें बखूबी पता है। वहीं Millennials अक्सर कामकाज में उलझे और थके हुए नजर आते हैं। भले ही उनके चेहरे पर मुस्कान हो, लेकिन ऐसा देखा जाता है कि वो अंदर से टूट रहे हैं और उनकी मेंटल हेल्थ बिगड़ रही है।
जिंदगी की उलझन में उलझे हुए मिलेनियल्स को या तो इस बात का एहसास ही नहीं होता है या फिर वो इसे नजरअंदाज करते रहते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर Millennials में मानसिक घुटने क्यों बढ़ती जा रही है, क्यों वो हर वक्त चिड़चिड़े और थके हुए दिखाई देते हैं? चलिए इसका जवाब एक्सपर्ट से जानते हैं। इस बारे में Dr. Pragya Rashmi, Consultant Psychologist, Yashoda Hospitals, Secunderabad जानकारी दे रहे हैं।
आखिर Millennials में क्यों बढ़ती जा रही है मानसिक घुटन?
- डॉक्टर प्रज्ञा का कहना है कि पिछले पीढ़ियों की तुलना में ज्यादा मौके, शिक्षा और विकल्प होने के बाद भी मिलेनियल्स अक्सर बेचैन रहते हैं। असल में कई बार वो बाहरी तौर पर तो सफल नजर आते हैं, लेकिन उनके अंदर संतुष्टि का एहसास नहीं होता है।
- डिजिटल दुनिया, सोशल मीडिया पर दूसरे से तुलना और जिंदगी के हर पहलू को बेहतर बनाने का दबाव कहीं न कहीं उनके दिमाग में खुश और सुकून भरे मोड में रखने के बजाय अलर्ट मोड में रखता है।
- मिलेनियल्स के बारे में ऐसा भी देखा गया है कि वो दूसरों की उम्मीदों के बारे में बहुत सोचते हैं और उनके मन में ये डर रहता है कि वो दूसरों की उम्मीदों पर खरे उतर पा रहे हैं या नहीं? इसकी वजह से भी उनके दिमाग में उधेड़बुन चलती रहती है।
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- मिलेनियल्स अपने ऊपर इतना प्रेशर लेकर चलते हैं कि हर वक्त उन्हें ऐसा महसूस होता है कि जिंदगी में कुछ कमी है और इसकी वजह से भी नींद न आना और एंग्जायटी हो सकती है।
- आज की नई पीढ़ी यानी जेन जी काफी हद तक अपनी मेंटल हेल्थ को काफी ऊपर रखने लगी है, वो रिश्तों को बचाने या नौकरी में खुद को साबित करने के लिए खुद को स्ट्रेस में बिल्कुल नहीं डालते हैं, वहीं मिलेनियल्स कई बार खुद को पीछे करके बाकी सभी जिम्मेदारियों को ऊपर रखने लगते हैं और इसकी वजह से वो अंदर ही अंदर घुटने लगते हैं।
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- 'लोग क्या कहेंगे...' वाली सोच से बेशक मिलेनियल्स थोड़ा आगे तो बढ़े हैं, लेकिन फिर भी उन्हें दूसरों की ओपनियन की चिंता रहती है और इसका असर भी उनकी मेंटल हेल्थ पर होता है।
- मिलेनियल्स के लिए ये सोचना जरूरी है कि क्या चीजें वाकई जरूरी हैं और किन चीजों को अवॉइड करना सही है, तभी काफी हद तक वो अंदर से बेहतर महसूस कर पाएंगे।
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