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डिप्रेशन कोई वहम नहीं, 'मजबूत बनो' कहने के बजाय मरीज का दर्द समझना है जरूरी

मेंटल हेल्‍थ को लेकर आज भी समाज में गलतफहम‍ियां हैं। इसे समझने की जरूरत है, तभी पीड़‍ित को सही समय पर इलाज म‍िल सकेगा।
Updated:- 2026-07-14, 10:47 IST
myths for mental illness

Mental Illness को लेकर लोगों में अब भले ही जागरुकता बढ़ी है, लेक‍िन आज भी ड‍िप्रेशन, एंग्‍जायटी और बाकी मानस‍िक बीमार‍ियों को लेकर कई तरह की गलतफहम‍ियां हो ही जाती हैं। अक्‍सर क‍िसी के उदास रहने, घबराहट महसूस करने या लगातार स्‍ट्रेस में रहने को लोग 'ओवरथ‍िंक‍िंग' कहकर टाल देते हैं। इसी वजह से कुछ लोग इस बारे में खुलकर बात नहीं कर पाते हैं।

मानस‍िक बीमारी को लेकर जो भ्रम फैला हुआ है, इससे न केवल मरीजों की मुश्‍क‍िलें बढ़ती हैं, बल्‍क‍ि उसे सही समय पर इलाज भी नहीं म‍िल पाता है। ऐसे में हमने इस बारे में जानने के ल‍िए डॉ. मुकेश पटेल (प्रोफेसर, साइकेट्रि‍स्‍ट, DPU सुपर स्‍पेशल‍िटी हाॅस्‍प‍िटल, प‍िम्‍प्री, पुणे) और शारदा केयर हेल्थ सिटी में मनोरोग विभाग के डॉक्टर अभिनीत कुमार से बात की। उन्‍होंने बताया क‍ि मानसिक बीमारियां किसी वहम का नाम नहीं हैं, बल्कि ये गंभीर समस्याएं हैं, जिन्हें समझने और समय पर इलाज की जरूरत होती है।

मानसिक बीमारी को लेकर क्यों बना हुआ है भ्रम?

समाज में द‍िमागी बीमारी को लेकर कई म‍िथक हैं। बहुत से लोगों को लगता है क‍ि ड‍िप्रेशन या एंग्‍जायटी स‍िर्फ एक वहम है। अगर इंसान ठान ले तो वाे खुद इससे बाहर न‍िकल सकता है। वहीं, कुछ लोग इसे मानस‍िक कमजोरी मान लेते हैं, लेक‍िन यह सच नहीं है। ये समस्‍या क‍िसी को कभी भी हो सकती है। जैसे हमारी बॉडी में कोई बीमारी क‍िसी न्‍यूट्र‍िशन की कमी या गड़बड़ी की वजह से होती है, ठीक वैसे मेंटल हेल्‍थ ब‍िगड़ने के पीछे भी कई वजहें हैं।

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myths for mental illness (1)

क्या कहते हैं डॉ. मुकेश पटेल?

डॉ. मुकेश पटेल का कहना है क‍ि मान‍स‍िक बीमारि‍यों के साथ सबसे बड़ी द‍िक्‍कत ये है क‍ि लोग इसे बीमारी नहीं समझते हैं बल्‍क‍ि अंधव‍िश्वास और गलतफहम‍ियों से जोड़कर देखते हैं। ज‍िस तरह डायब‍िटीज, अस्‍थमा या कैंसर होने पर इलाज जरूरी होता है, वैसे ही डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी दिमागी परेशानियों के ल‍ि‍ए भी आपको ट्रीटमेंट लेना होता है, लेक‍िन हमारे यहां कहा ये जाता है क‍ि ज्‍यादा मत सोचो, मजबूत बनो तो सब ठीक हो जाएगा। मेंटल हेल्‍थ ब‍िगड़ने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं। इसमें अतीत में हुए हादसे, द‍िमागी हालत और कई वजहें हो सकती हैं।

वहम से कैसे पहुंचता है नुकसान?

द‍िमागी बीमारी से उतना नुकसान नहीं होता है, ज‍ितना लोगों के वहम को लेकर हो जाता है। कई लोग तो डर के कारण अपनी इस द‍िक्‍कत को छ‍िपाकर रखते हैं क‍ि कहीं उनका मजाक न उड़ाया जाने लगे या लाेग उन्‍हें पागल न कहने लगें। इसका नतीजा यह होता है क‍ि पीड़‍ित को सही समय पर ट्रीटमेंट नहीं म‍िल पाता है और कई बार वाे गलत कदम भी उठा सकता है।

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क्या कहते हैं डॉ. अभिनीत कुमार?

डॉ. अभि‍नीत कुमार ने बताया क‍ि मेंटल इलनेस पूरी तरह से म‍ेड‍िकल कंडीशन है। इसके इलाज भी होते हैं, लेक‍िन जो समाज में लोगों के बीच भ्रम फैला हुआ है, इसी डर के कारण मरीज डॉक्‍टर से म‍िलने में भी हिचक‍िचाते हैं। उन्‍हें लगता है क‍ि अगर क‍िसी को मालूम हुआ तो कहीं लोग पागल न कहने लगें। यही डर कई बार लोगों को समय पर इलाज नहीं लेने देता है।

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समय पर ट्रीटमेंट लेना क्यों जरूरी है?

अगर क‍िसी को लंबे समय से ड‍िप्रेशन, एंग्‍जायटी, स्‍ट्रेस, डर, नींद की परेशानी या रोजाना के कामों में इंटरेस्‍ट कम होने जैसी समस्‍याएं महसूस हो रही हैं तो इसे ब‍िल्‍कुल भी इग्‍नोर नहीं करना चाह‍िए। सही समय पा इलाज म‍िलने से मरीज बेहतर महसूस करता है और सामान्‍य तरीके से अपनी ज‍िंदगी जीने लगता है।

तो अगर आपके आसपास भी कोई ऐसी द‍िक्‍कतों से जूझ रहा है तो उसे आपको उसे समझने की जरूरत है। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

Image Credit- Freepik/Gemini

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