ब्रेस्ट में गांठ का मतलब सिर्फ कैंसर नहीं, जानें कैसे करें सेल्फ-एग्जामिनेशन और किन बदलावों पर दें ध्यान?

ब्रेस्ट में कोई गांठ या लंप महसूस होते ही ज्यादा महिलाएं घबरा ही जाती हैं। उन्हें लगता है कि यह तो कैंसर का लक्षण हो सकता है। यह आम बात है, लेकिन सबसे पहली और जरूरी बात यह है कि ब्रेस्ट की हर गांठ कैंसर नहीं होती है। अक्सर यह नॉर्मल बदलाव या कोई बेनिन (बिना कैंसर वाली) गांठ भी हो सकती है। फिर भी डर में बैठने के बजाय डॉक्टर से टेस्ट करा लेना ही समझदारी होती है।
इसके बारे में मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज, दिल्ली की सर्जिकल ऑन्कोलॉजी सीनियर कंसल्टेंट डॉ. मल्लिका ढांडा ने बताया कि महिलाएं अपने ब्रेस्ट की बनावट और उसमें होने वाले बदलावों को समझ सकती हैं। इससे समय पर बीमारी का पता चल सकता है। आइए जानते हैं इसके बारे में-
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ब्रेस्ट सेल्फ-एग्जामिनेशन कैसे करें?
डॉक्टर ने बताया कि हर महिला को महीने में एक बार अपने ब्रेस्ट की जांच खुद जरूर करनी चाहिए। अगर आपको पीरियड्स आते हैं, तो पीरियड्स खत्म होने के 2-3 दिन बाद का समय इसके लिए सबसे बेहतर रहेगा। इसके लिए-
- शीशे के सामने खड़े होकर ध्यान से देखें कि क्या ब्रेस्ट के साइज, शेप या स्किन में कोई बदलाव दिख रहा है।
- हाथों से पूरे ब्रेस्ट और अंडरआर्म्स के आसपास की जगह को छूकर देखें कि कहीं कोई नया उभार या गांठ तो नहीं है।
- अगर स्किन में खिंचाव, डिंपल जैसा पड़ना, निप्पल का अंदर की तरफ मुड़ना या निप्पल से कोई अजीब डिस्चार्ज या खून आना दिखे, तो इसे अनदेखा न करें।
बस ध्यान रखें कि खुद जांच करने का मतलब यह नहीं है कि हम हर डॉक्टर बन जाएं। अगर कोई भी बदलाव दिखे, तो तुरंत डाॅक्टर से मिलें।
एक जैसी नहीं होती ब्रेस्ट की हर गांठ
डाॅक्टर ने यह भी कहा कि सिर्फ छूने भर से आप यह डिसाइड नहीं कर सकती हैं कि गांठ कैसी है? ब्रेस्ट में गांठ होने के कई कारण हो सकते हैं। जैसे-
- सिस्ट: यह पानी से भरी एक छोटी थैली होती है, जो छूने में काफी सॉफ्ट लगती है और पीरियड्स के आसपास कभी-कभार इसमें दर्द भी हो सकता है।
- फाइब्रोएडेनोमा: यह बिना कैंसर वाली गांठ होती है, जो स्किन के नीचे थोड़ा हार्ड और रबड़ जैसी होती है और छूने पर हिलती भी है।
- कैंसर वाली गांठ: यह अक्सर काफी हार्ड, असमान आकार की और एक ही जगह चिपकी हुई सी फील हो सकती है, हालांकि हमेशा ऐसा होना जरूरी नहीं है।
इसीलिए सही जानकारी के लिए मैमोग्राम, अल्ट्रासाउंड या बायोप्सी जैसी मेडिकल टेस्ट कराने की सलाह डॉक्टर देते हैं।
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कब होता है ब्रेस्ट कैंसर का खतरा?
डॉक्टर के मुताबिक, कई लोगों को लगता है कि कम उम्र में ब्रेस्ट कैंसर नहीं हो सकता है। बढ़ती उम्र के साथ खतरा बढ़ता जरूर है, लेकिन कम उम्र की महिलाओं में भी यह बीमारी आजकल हो रही है। इसलिए 'अभी तो मेरी उम्र कम है' सोचकर गांठ को नजरअंदाज न करें। इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि अगर परिवार में पहले किसी को ब्रेस्ट या ओवरी का कैंसर रहा हो, तो डॉक्टर को यह बात जरूर बताएं।
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- ब्रेस्ट सेल्फ-एग्जामिनेशन (खुद से जांच) करने का सबसे सही समय कौन-सा है?
- अगर आपको पीरियड्स आते हैं, तो पीरियड्स खत्म होने के 2 से 3 दिन बाद का समय ब्रेस्ट की जांच खुद करने के लिए सबसे बेहतर माना जाता है।
- सिस्ट, फाइब्रोएडेनोमा और कैंसर की गांठ में क्या अंतर होता है?
- सिस्ट पानी भरी सॉफ्ट थैली होती है, फाइब्रोएडेनोमा रबड़ जैसी हिलने वाली गांठ होती है, जबकि कैंसर की गांठ अक्सर काफी हार्ड और असमान आकार की होती है।
- क्या कम उम्र की महिलाओं को भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा हो सकता है?
- हां, भले ही उम्र बढ़ने के साथ खतरा अधिक होता है, लेकिन कम उम्र की महिलाओं में भी यह बीमारी हो सकती है। इसलिए किसी भी नई गांठ को नजरअंदाज न करें।
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