Menopause Diary: मेनोपॉज के बाद अचानक क्यों बढ़ जाता है गठिया का खतरा? इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज और ऐसे करें बचाव

बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव आने लगते हैं, जिसमें से एक है मेनोपॉज। 45 की उम्र के आसपास जब महिलाओं को मेनोपॉज होता है, तो वह कई बीमारियां साथ लेकर आता है। उसी में से एक है गठिया। आइए जानते हैं कि कैसे गठिया से करें बचाव।
Updated:- 2026-10-26, 13:27 IST
Menopause and Arthritis

महिलाओं की उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं। खासकर मेनोपॉज के बाद हार्मोनल बदलाव कई सारे आने लगते हैं, जिसका असर हड्डियों और जोड़ों पर पड़ता है। इस दौरान महिलाओं को घुटनों, कमर, कूल्हों और उंगलियों में दर्द महसूस होने लगता है। कई बार महिलाएं इन लक्षणों को उम्र का सामान्य असर समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, लेकिन लगातार दर्द गठिया से जुड़ी बीमारी हो सकती है। आइए दिल्ली के श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट की डॉक्टर प्रिया पालीवाल से गठिया के उन लक्षणों के बारे में जानते हैं, जो मेनोपॉज की वजह से होते हैं।

मेनोपॉज से होती है गठिया की दिक्कत

क्या मेनोपॉज के बाद सीढ़ियां चढ़ना, सुबह बिस्तर से उठना या कुछ देर तक चलना भी मुश्किल होने लगा है? अगर जोड़ों में दर्द और अकड़न की समस्या लगातार बनी रहती है, तो इसे हल्के में न लें। मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने से हड्डियों और जोड़ों पर असर पड़ सकता है। इससे कुछ महिलाओं में जोड़ों की परेशानियां बढ़ जाती हैं। हालांकि, हर महिला में गठिया होने की आशंका समान नहीं होती और जोड़ों का दर्द होने का मतलब हमेशा गठिया नहीं है।

कैसे मेनोपॉज के बाद गठिया हो जाता है?

मेनोपॉज के बाद गठिया होने का सबसे बड़ा कारण शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी होता है। दरअसल, पीरियड्स के दौरान महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन भरपूर बनता है। ये हार्मोन हड्डियों को मजबूत रखता है, जोड़ों के बीच के चिकने तरल पदार्थ (Synovial Fluid) को बनाए रखता है और सूजन को रोकता है। वहीं, 45-50 साल के बाद जब मेनोपॉज आता है तो एस्ट्रोजन लेवल एकदम से कम हो जाता है। इससे हड्डियां कमजोर (Bone Density) कम होने लगती हैं। धीरे धीरे जोड़ों के बीच का लुब्रिकेशन सूखने लगता है और शरीर में सूजन बढ़ाने वाले तत्व (Inflammation) बढ़ जाते हैं।

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Photo Credit: Magnific

जब जोड़ों का लुब्रिकेशन कम होता है तो हड्डियां आपस में रगड़ खाने लगती हैं, इसे ऑस्टियोआर्थराइटिस कहते हैं। इसका सबसे बड़ा फर्क घुटनों, कूल्हे और उंगलियों में होता है। वहीं, शरीर में सूजन बढ़ने से इम्यून सिस्टम जोड़ों पर ही हमला करने लगता है, इसे रूमेटाइड आर्थराइटिस कहते हैं।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

मेनोपॉज के आसपास जोड़ों में दर्द और अकड़न की शिकायत हो सकती है, जिसके खास लक्षण होते हैं।

1. सुबह के समय जोड़ों में जकड़न

अगर सुबह उठने पर घुटनों, उंगलियों या कलाई में 30 मिनट से ज्यादा जकड़न महसूस होती है, तो यह गठिया का शुरुआती संकेत हो सकता है।

2. जोड़ों में सूजन और दर्द

हल्का काम करने पर भी घुटनों या कूल्हों में दर्द और हल्की सूजन दिखना। कई बार जोड़ों को छूने पर गर्माहट भी महसूस होती है, तो यह भी गठिया का एक महत्वपूर्ण लक्षण है।

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मेनोपॉज के बाद गठिया से बचाव कैसे करें?

  • अपनी डाइट में दूध, दही, पनीर, रागी और हरी सब्जियां शामिल करें। रोजाना 15-20 मिनट धूप में जरूर बैठें ताकि विटामिन D की कमी पूरी हो सके।
  • जोड़ों को ठीक रखने के लिए रोजाना एक्सरसाइज करें। कोशिश करें कि रोज टहलें और योगा करें ताकि हाथ पैरों में लगातार मूवमेंट होता रहे। 
  • शुरुआत धीरे-धीरे करें और दर्द बढ़ने पर व्यायाम में बदलाव के लिए डॉक्टर की सलाह लें।
  • खाने पीने पर अपने सबसे ज्यादा ध्यान दें। खाने में कैल्शियम और विटामिन डी से जुड़ी चीजें शामिल करें। साथ ही, वजन को संतुलित रखें ताकि घुटनों और कूल्हों पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सके।

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इलाज के लिए डॉक्टर से लें सलाह

अगर जोड़ों का दर्द रोजमर्रा के कामों को प्रभावित कर रहा है, तो डॉक्टर से जांच कराएं। जरूरत के अनुसार, फिजियोथेरेपी और दवाओं की मदद ली जा सकती है। कुछ मामलों में हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी पर भी विचार किया जाता है, लेकिन यह हर महिला के लिए उपयुक्त नहीं होती है। इसे शुरू करने से पहले डॉक्टर से इसके फायदे और जोखिम समझना जरूरी है।

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मेनोपॉज के बाद गठिया का बढ़ना आम है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है। समय पर लक्षणों को पहचान कर सही खानपान, नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह से इस समस्या को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। 45 के बाद हर महिला को अपनी हड्डियों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

FAQ
क्या हर महिला को मेनोपॉज के बाद गठिया होता है?
नहीं, हर महिला को नहीं होता है, लेकिन एस्ट्रोजन की कमी के कारण खतरा 60% तक बढ़ जाता है। जिनका वजन ज्यादा है, जिन्हें विटामिन D की कमी है या जो बिल्कुल एक्सरसाइज नहीं करतीं, उनमें इसकी संभावना ज्यादा रहती है।
मेनोपॉज के बाद गठिया से बचने के लिए कौन सी एक्सरसाइज सबसे अच्छी है?
भारी एक्सरसाइज की जगह वॉकिंग, योगा, स्ट्रेचिंग और हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग सबसे अच्छी है। इससे जोड़ लचीले रहते हैं और वजन भी कंट्रोल में रहता है, जिससे घुटनों पर दबाव कम पड़ता है।
क्या खानपान से मेनोपॉज के बाद के गठिया को रोका जा सकता है?
हां, काफी हद तक। कैल्शियम वाली चीजें जैसे दूध, दही, रागी, तिल, विटामिन D के लिए अंडा, मशरूम और धूप, और ओमेगा-3 के लिए अलसी और अखरोट डाइट में शामिल करने से हड्डियां मजबूत रहती हैं और सूजन कम होती है।
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