क्या अबॉर्शन के बाद दोबारा कंसीव करने में मुश्किल आती है? डॉक्टर से जानें जवाब

मां बनना किसी भी महिला की जिंदगी का एक खास और खूबसूरत पड़ाव होता है। शादी के बाद प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले कोई कपल कई बातों को ध्यान में रखता है। पेरेंटहुड में कदम रखना एक बड़ा फैसला है और ऐसे में करियर, पर्सनल च्वॉइस और फाइनेंशियल स्थिति समेत कई कारणों के चलते कई बार कपल शादी के कुछ साल तक प्रेग्नेंसी प्लान नहीं करना चाहते हैं और ऐसे में इससे बचने के लिए वो कॉन्ट्रासेप्शन का इस्तेमाल करते हैं। कई बार अनप्लान्ड प्रेग्नेंसी हो जाने पर अबॉर्शन की नौबत भी आ जाती है। अबॉर्शन एक ऐसा अनुभव है, जो शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी महिलाओं को प्रभावित करता है। कई महिलाओं के मन में यह सवाल भी आता है कि अगर उन्होंने अबॉर्शन करवाया, तो कहीं उन्हें दोबारा प्रेग्नेंट होने में मुश्किल तो नहीं आएगी, चलिए इसका जवाब डॉक्टर से जानते हैं। इस बारे में हमें डॉक्टर सोनू खोखर, एमबीबीएस, हेल्थ एंड वेलनेस एक्सपर्ट (Dr. Sonu Khokhar, MBBS, Health and Wellness Expert) बता रही हैं।
क्या अबॉर्शन के बाद दोबारा प्रेग्नेंट होने में मुश्किल आती है?

- सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि अगर अबॉर्शन सुरक्षित तरीके से और सही मेडिकल गाइडेंस में कराया गया है, तो इसका आमतौर पर फर्टिलिटी पर कोई असर नहीं होता है। ऐसे में यह कहना गलत होगा कि अबॉर्शन के बाद आपको दोबारा प्रेग्नेंट होने में मुश्किल आएगी।
- इस बात का ध्यान रखना होगा कि अबॉर्शन शुरुआती हफ्तों में डॉक्टर की सलाह के आधार पर ही हुआ है। अगर गलत तरीके से अबॉर्शन करवाया जाए, तो इसका सीधा असर कंसीव करने की क्षमता पर पड़ सकता है।
- महिलाओं को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि बार-बार अबॉर्शन के लिए पिल्स लेना या मेडिकल प्रोसिजर के जरिए इसे करवाना आपकी फर्टिलिटी और सेहत दोनों पर असर डाल सकता है। ऐसे में बार-बार ऐसा करवाना सुरक्षित नहीं है।
- गर अबॉर्शन असुरक्षित तरीके से हुआ हो, या बार-बार अबॉर्शन कराया गया हो, तो गर्भाशय (यूट्रस) में इंफेक्शन या चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है। इससे फर्टिलिटी पर असर पड़ सकता है।
- अबॉर्शन के बाद शरीर के लिए आराम और रिकवर करने के लिए बॉडी को समय देना भी बहुत जरूरी है। आमतौर पर अबॉर्शन के बाद आपको सेक्शुअल रिलेशन बनाने में कम से कम 4-6 हफ्तों का गैप रखना चाहिए। हालांकि, ये हर महिला के लिए अलग हो सकता है और कई बातों पर निर्भर करता है। ऐसे में डॉक्टर से सलाह जरूर लें। दोबारा प्रेग्नेंसी प्लान करने में 6 महीने से 1 साल तक का अंतर रखना चाहिए। यह अंतर कितना होना चाहिए, इस बारे में आपको अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
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- कुछ हफ्तों के गैप के बाद हार्मोन्स के बैलेंस होने और यूट्रस के सही तरह से रिकवर होने के बाद आप डॉक्टर की सलाह लेकर आगे बढ़ सकती हैं।
- इस समय पर महिलाओं को अपनी मेंटल हेल्थ का खास ख्याल रखना चाहिए। इस समय पर हेल्दी डाइट और लाइफस्टाइल बहुत जरूरी है।
- आयरन, फोलिक एसिड और कैल्शियम से भरपूर आहार लेने से शरीर जल्दी रिकवर करता है। इसके साथ ही, पर्याप्त नींद, हल्की एक्सरसाइज और स्ट्रेस को मैनेज करना भी जरूरी है।
यह है एक्सपर्ट की राय

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एक्सपर्ट का कहना है कि अगर आप प्रेग्नेंसी को अवॉइड कर रही हैं, तो कॉन्ट्रासेप्शन का इस्तेमाल जरूरी है। हर जिंदगी के वेलनेस सेक्शन में हम इसी तरह अपने आर्टिकल्स के जरिए स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के बारे में आप तक सही जानकारी पहुंचाने की कोशिश करते रहेंगे। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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