थाली में छिपा खतरा: कहीं ये फूड कॉम्बिनेशन लेने से तो नहीं बिगड़ रही आपकी सेहत

हाल ही में महाराष्ट्र में बिरयानी के बाद तरबूज खाने से चार सदस्यों की मौत ने तरबूज के मिलावटी होने पर विवाद खड़ा कर दिया, लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि कई बार हम गलत समय पर गलत फूड कॉम्बिनेशन (विरुद्ध आहार) खा लेते हैं, जिससे सेहत और बिगड़ जाती है। आइए जानते हैं आयुर्वेद में किसे कहते हैं विरुद्ध आहार, इसके नुकसान क्या हैं और कैसे रहें सावधान?
किसे कहते हैं विरुद्ध आहार?
आयुर्वेद में ऐसे खाद्य पदार्थों के बारे में बताया गया है जो अकेले में स्वास्थ्यवर्धक हो सकते हैं, लेकिन साथ मिलकर शरीर में टॉक्सिंस पैदा करते हैं। यह आहार पाचन अग्नि को धीमा करके वात, पित्त, कफ को असंतुलित करते हैं। विरुद्ध आहार हमारे पाचन पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं और साथ में स्वास्थ्य संबंधित कई तरह की समस्याएं भी पैदा करते हैं। उदाहरण के तौर पर दूध के साथ कोई नमकीन चीज नहीं खानी चाहिए, लेकिन हम अक्सर ऐसा करते हैं। वहीं, दूध के साथ कोई भी फल खाना गलत है, इससे एसिडिटी हो सकती है। ठीक इसी तरह कई सारे आहार ऐसे हैं जिन्हें एक दूसरे के साथ खाना घातक होता है।

विरुद्ध आहार की लिस्ट
- गैस पर पकाए भोजन के साथ कच्चा आहार नहीं लेना चाहिए, इसलिए खाने से पहले सलाद खाने की सलाह दी जाती है।
- गर्म तासीर वाले आहार के साथ ठंडी तासीर वाली चीजें खाने से परहेज करना चाहिए।
- प्राकृतिक आहार के साथ पशुजन्य आहार ग्रहण नहीं करना चाहिए।
- अनाज के साथ कभी भी दूध या डेयरी प्रोडक्ट लेने से परहेज करें।
- दूध या दही में गुड़ मिलाकर खाना नुकसानदायक होता है।
- दही के साथ खीर, पनीर या गर्म चीजें नहीं खानी चाहिए।
- शहद को गर्म पानी में मिलाकर पीना हानिकारक है।
इम्यूनिटी होती है कमजोर
विरुद्ध आहार के लगातार सेवन से पाचन संबंधित समस्याएं तो होती हैं, लेकिन धीरे-धीरे इससे इम्यूनिटी भी कमजोर होने लगती है। यही नहीं, इससे आपको इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ने लगता है। जिन लोगों को पहले से ही कोई गंभीर बीमारी है उन्हें ज्यादा समस्याएं होती हैं। इसके साथ ही शरीर के पांचों तत्वों का संतुलन भी बिगड़ने लगता है। अगर लगातार आपको गैस रहने लगती है तो बाद में जाकर वह अल्सर के रूप में सामने आती है।
एक्सपर्ट की राय
अखिल भारतीय आयुर्वेद योग संस्थान, दिल्ली की लाइफस्टाइल एक्सपर्ट डा. मेधा कुलकर्णी बताती हैं कि आजकल भोजन खाने की पद्धति बहुत बदल गई है। लोग किसी भी खाद्य सामग्री के साथ कुछ भी मिलाकर खा लेते हैं, जो बाद में जाकर शरीर में नुकसान करती है। जैसे दूध के साथ कई लोग ब्रेड, नमकीन या बिस्किट खाते हैं, यह बहुत ही नुकसानदायक है, लेकिन अगर दूध में शक्कर, चावल मिलाकर खीर या दलिया बनाकर खाते हैं, तो इससे किसी भी तरह का नुकसान नहीं होता क्योंकि ये सारी चीजें क्षीर मित्र हैं। क्षीर मतलब दूध और मित्र मतलब दोस्त। वहीं, अगर आप दूध में किसी भी तरह के खट्टे फल मिलाकर स्मूदी बनाई जाती है तो वह आंतों को नुकसान पहुंचाती है क्योंकि वे क्षीर अमित्र हैं, दूध की दुश्मन हैं।

ठीक वैसे ही दही को फ्रिज से बाहर निकालकर तुरंत गर्म करके खाना नुकसानदायक है, लेकिन जब उसी दही की कढ़ी बनती है तो उसमें बेसन और मसाले डाले जाते हैं और दही को पानी के साथ पतला करके खूब मिलाया जाता है, उसके बाद कढ़ी बनती है। ऐसे में दही का संस्कार बदल जाता है। उससे वह नुकसान नहीं करती है। आजकल कई डिशेज में ग्रेवी को गाढ़ा करने के लिए दही मिलाया जाता है, खाने में यह चटपटा और स्वादिष्ट होता है लेकिन इससे एसिडिटी होने के खतरे बढ़ जाते हैं। इन्हें क्रम विरुद्ध आहार कहते हैं।
तपोवन योग एवं नेचुरोपैथी सेंटर की एक्सपर्ट डा. छाया बताती हैं कि ज्यादातर लोग बीमार पड़ने पर खाने की गुणवत्ता को दोष देते हैं कि शायद खाद्य सामग्री अच्छी नहीं थी, लेकिन यह भूल जाते हैं कि वे किस खाद्य पदार्थ के साथ क्या खा रहे हैं या फिर खाने का समय और मात्रा सही नहीं है, जिसकी वजह से वे बीमार पड़ रहे हैं। नेचुरोपैथी में इन सारी चीजों पर बहुत ध्यान दिया जाता है। आज के समय में विरुद्ध आहार हमारे स्वास्थ्य को बिगाड़ने में सबसे अहम भूमिका निभा रहे हैं। हम किसी भी चीज के साथ कुछ भी मिलाकर खा लेते हैं, जिसका नुकसान बहुत होता है। जैसे कुछ लोग रात को भारी भोजन करने के बाद फल खा लेते हैं। यह एक विपरीत आहार है जो पेट में गैस और ब्लाटिंग पैदा कर सकता है। रात में कोई भी पानी वाला फल खाना नुकसानदायक साबित हो सकता है। फल हमेशा खाली पेट में ही खाया जाता है।
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कैसे बरतें सावधानी?
ऐसे भोजन से परहेज करना चाहिए जो मौसम या दिन के समय के अनुकूल न हो। हमेशा दिनचर्या और ऋतुचर्या का पालन करते हुए ही आहार ग्रहण करें। ऐसे खाद्य पदार्थों जैसे ठंडी चीजें खाने बचना चाहिए जो हमारे पेट में अग्नि की शक्ति को कम करती हैं।
- गलत कॉम्बिनेशन- जब दो फूड्स आपस में प्रतिकूल हों (दूध-केला)।
- पकाने की विधि- किसी विशेष तरीके से पकाने (तांबे के बर्तन में घी) पर जो विषैला हो जाए।
- मात्रा विरुद्ध- समान मात्रा में शहद और घी (1:1) का सेवन करना।
Writer- Suman Agarwal
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