कभी यूपी की हर रसोई की शान थी 'जोंधरी की रोटी', जानिए क्यों थाली से अचानक गुम हो गया यह पारंपरिक स्वाद

पहले के समय में यूपी के अधिकतर घरों में जोंधरी के आटे की रोटियां रोजाना बनाई जाती है। हालांकि, बदलते समय के साथ यह पारंपरिक स्वाद गुम हो गया है। नीचे लेख में जानें इसके पीछे की वजह और खासियत।
Updated:- 2026-09-07, 21:06 IST
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भारत देश अपनी विविध संस्कृति और खान-पान के लिए दुनियाभर में मशहूर है। हालांकि, वर्तमान समय और पहले के खानपान में काफी अंतर देखने को मिलता है। दादी-नानी के समय में कुछ ऐसे व्यंजन हुआ करते थे, जो रोजाना की थाली की जान हुआ करते थे, लेकिन अब वे लगभग गुम हो गए हैं। गुमनाम जायका सीरीज में आज हम आपको एक ऐसे पारंपरिक व्यंजन 'जोंधरी की रोटी' के बारे में बताने जा रहे हैं।

जोंधरी की रोटी क्या है?

जोंधरी की रोटी ज्वार के आटे से बनाई जाती है। पहले यह लगभग हर घर में, खासकर सर्दी के मौसम में बनाई जाती थी। वहीं, आज के समय की बात करें, तो यह गांवों में केवल बुजुर्गों द्वारा ही बनाई जाती है।

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जोंधरी की रोटी का स्वाद खोने के पीछे की वजह

यूपी के इस पारंपरिक स्वाद के गुम होने का मुख्य कारण जोंधरी की खेती का कम होना है। इसके अलावा, इस रोटी को बनाने में काफी समय और मेहनत लगती है। साथ ही, इसका सौंधापन चूल्हे की आंच में मिलता था, जो वर्तमान समय में लोगों के लिए मुश्किल हो गया है।

जोंधरी की रोटी की खासियत

पोषण के लिहाज से जोंधरी की रोटी किसी सुपरफूड से कम नहीं है। इसमें प्रचुर मात्रा में फाइबर, आयरन, प्रोटीन और मैग्नीशियम पाया जाता है। यह ग्लूटेन-फ्री होती है, जिससे डाइजेशन को  जबूत रहता है और पेट से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होने के कारण यह डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है। सर्दियों के दिनों में यह शरीर को अंदर से गर्म और लंबे समय तक ऊर्जावान बनाए रखती थी।

Jondhari ki Roti

आधुनिक खान-पान का दोबारा बन रहा है हिस्सा

यह कहना गलत नहीं होगा कि पहले अपनाई जाने वाली चीजें दोबारा देखने को मिल रही हैं। यह बदलाव न केवल पहनावे बल्कि खान-पान में भी नजर आ रहा है। भले ही यह पारंपरिक स्वाद थालियों से ओझल हो गया हो, लेकिन फिटनेस और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक पीढ़ी के बीच मिलेट्स के रूप में इसकी फिर से वापसी हो रही है।

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अगर आप भी गायब हो चुके अपने पारंपरिक व्यंजनों के बारे में पढ़ना या जानना चाहते हैं, तो 'गुमनाम जायका' सीरीज जरूर पढ़ें। इसमें हम उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों के पुराने व्यंजनों के बारे में बताते हैं। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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FAQ
जोंधरी शब्द का मुख्य अर्थ क्या है?
उत्तर प्रदेश और बिहार की स्थानीय बोलियों में जोंधरी मुख्य रूप से ज्वार को कहा जाता है।
जोंधरी की रोटी बनाने की पारंपरिक विधि क्या है?
जोंधरी की रोटी बनाने की पारंपरिक विधि गुनगुने पानी से आटा गूंथकर हाथों से थपथपाकर मिट्टी के तवे या चूल्हे की धीमी आंच पर सेका जाता है।
क्या जोंधरी की रोटी को आधुनिक गैस स्टोव पर बनाया जा सकता है?
हां, इसे नॉन-स्टिक या लोहे के भारी तवे पर धीमी आंच पर सेंककर आसानी से बनाया जा सकता है।
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