Sun Oct 4, 2026 | Updated 11:07 AM IST

Pitru Paksh 2026: गयाजी से पहले पुनपुन नदी में क्यों किया जाता है तर्पण? जानिए वजहें

Pitru Paksh 2026: इन दि‍नों पितृ पक्ष चल रहा है। इसका समापन 10 अक्‍टूबर को हाेगा। इस दौरान लोग गयी जी प‍िंडदान करने के ल‍िए जाते हैं, लेक‍िन क्‍या आपको मालूम है क‍ि इससे पहले औरंगाबाद के पुनपुन नदी में भी तर्पण क‍िया जाता है?
Updated:- 2026-10-04, 09:32 IST
pind daan in punpun nadi

Pitru Paksh 2026: पितृ पक्ष में पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा सदि‍यों से चली आ रही है। बिहार के गया जी को पिंडदान के लिए खास जगह माना जाता है। यहां फल्गु नदी समेत कई जगहों पर पिंडदान किया जाता है, लेकिन गया जी जाने से पहले पुनपुन नदी में पिंडदान करने की भी एक पुरानी परंपरा बताई जाती है। यह पुनपुन नदी ब‍िहार के औरंगाबाद में है।

लेक‍िन क्‍या आप जानती हैं क‍ि आखिर ऐसा क्यों किया जाता है और पुनपुन नदी का इस पूरी परंपरा में क्या महत्व है? धार्मिक मान्यता के मुताबिक, पुनपुन में पिंडदान करने के बाद ही गयाजी में आगे की पिंडदान की प्रक्रिया की जाती है। आइए इसके बारे में जानते हैं-

pind daan in punpun nadi

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पुनपुन नदी में पहले पिंडदान की क्या वजह है?

आपको बता दें क‍ि पुनपुन नदी में सबसे पहले पिंडदान करने की परंपरा खासतौर पर गया जी जाने वाले पिंडदानियों से जुड़ी हुई है। मान्यता है क‍ि पुनपुन में ही पहली बेदी है। इसलिए यहां पिंडदान और तर्पण करने के बाद लोग गयाजी की ओर जाते हैं। यानी इसे गयाजी में होने वाले पिंडदान की शुरुआत से पहले ही इसे एक जरूरी कड़ी माना जाता है। कहते हैं क‍ि गया जी से पहले यहां तर्पण करने से प‍ितरों की आत्‍मा को शांत‍ि म‍िलती है।

आसान भाषा में समझें तो पुनपुन नदी को पवित्र नदी और गयाजी यात्रा का पहला द्वार माना जाता है। यहां सबसे पहले तर्पण और पिंडदान करने से आत्मा की शुद्धि होती है, जिसके बाद ही गयाजी में किया गया पिंडदान सफल और स्वीकार होता है।

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पुनपुन को पहली बेदी क्यों माना जाता है?

पुनपुन में प्रथम पिंडदान की परंपरा काफी पुरानी है। बिहार के औरंगाबाद जिले के सिरिस और जम्होर के पास पुनपुन नदी के घाटों पर भी इस परंपरा के तहत पिंडदान किया जाता है। मान्यता है कि जो लोग इस रास्ते से गयाजी जाते हैं, वे पहले पुनपुन नदी पर अपने पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करते हैं। इसके बाद गयाजी जाकर आगे के धार्मिक कर्म किए जाते हैं।

pind daan in punpun nadi (2)

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गयाजी में पिंडदान का क्या महत्व है?

गयाजी में पिंडदान और तर्पण की परंपरा का धार्मिक महत्व भी बहुत है। बिहार पर्यटन के मुताबिक, गयाजी में फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर, सीता कुंड और कई दूसरी जगहों पर पिंडदान क‍िया जाता है। यहां पिंडदान करने से पितरों को शांति और मोक्ष मिलता है।

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डिसक्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, लोक कथाओं और पौराणिक परंपराओं पर आधारित है। HerZindagi इसकी सत्यता, सटीकता और पूर्णता का दावा नहीं करता है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या पूजा-विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ, पंडित या ज्योतिषाचार्य की सलाह अवश्य लें।

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FAQ
पुनपुन नदी में पिंडदान करने से क्या लाभ मिलता है?
ऐसा माना जाता है कि पुनपुन नदी में पिंडदान और तर्पण करने से पूर्वजों की आत्मा को तुरंत शांति मिलती है और उनके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं, जिससे उन्हें मोक्ष का मार्ग प्राप्त होता है।
गयाजी जाने से पहले पुनपुन नदी में तर्पण करना क्यों जरूरी माना जाता है?
पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पुनपुन नदी को 'पवित्र नदी' और गयाजी यात्रा का पहला द्वार माना गया है। यहां सबसे पहले तर्पण और पिंडदान करने से आत्मा की शुद्धि होती है, जिसके बाद ही गयाजी में किया गया पिंडदान पूर्णतः सफल और स्वीकार्य होता है।
बिहार में पुनपुन नदी कहां स्थित है?
पुनपुन नदी बिहार के औरंगाबाद जिले के सिरिस घाट और पटना के पास से होकर गुजरती है, जहां पितृ पक्ष के दौरान हजारों श्रद्धालु पिंडदान और तर्पण करने आते हैं।  
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