गया जी ही नहीं, बद्रीनाथ के ब्रह्म कपाल तीर्थ में भी कर सकती हैं पिंडदान; नोट कर लें रूट और बजट

आमतौर पर पिंडदान करने के लिए लोग बिहार के गया जी ही जाते हैं, लेकिन क्या आप जानती हैं कि उत्तराखंड के बद्रीनाथ में भी पिंडदान किया जा सकता है। यहां ब्रह्म कपाल नाम की एक जगह है, जहां पर पितरों के लिए श्राद्ध और पिंडदान करने की मान्यता है। यह जगह अलकनंदा नदी के किनारे बद्रीनाथ मंदिर के पास है।
ऐसे में अगर आप बद्रीनाथ की यात्रा का प्लान बना रही हैं तो यहां पितरों के लिए पिंडदान भी कर सकती हैं। खास बात यह है कि इसके लिए अलग से किसी बहुत दूर की जगह जाने की जरूरत नहीं पड़ती है। पहले आपको बद्रीनाथ पहुंचना होगा और फिर ब्रह्म कपाल जाकर यह काम किया जा सकता है। आज हम आपको अपने इस लेख में इसके बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं। आइए जानते हैं-
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बद्रीनाथ में कहां होता है पिंडदान?
बद्रीनाथ में पिंडदान के लिए ब्रह्म कपाल प्रमुख जगह है। यह अलकनंदा नदी के किनारे है और बद्रीनाथ मंदिर से करीब 500 मीटर ही दूर है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुताबिक, यहां लोग अपने दिवंगत पूर्वजों की याद में श्राद्ध करते हैं। यानी अगर आपका बद्रीनाथ जाने का प्लान है तो मंदिर के दर्शन के साथ ब्रह्म कपाल भी जा सकती हैं और वहां पितरों के लिए पिंडदान कर सकती हैं।
पिंड कैसे तैयार किया जाता है?
आपको बता दें कि पिंड गोल आकार में तैयार किया जाता है। इसके लिए चावल के आटे, ओट्स, दूध और शहद के साथ तिल जैसी चीजों का इस्तेमाल होता है। आप वहां पंडित की मदद से पिंड तैयार कर सकती हैं और यही पिंड पूर्वजों से जुड़े होते हैं। यहां पिंडदान का काम अलकनंदा नदी के किनारे पारंपरिक तरीके से कराया जाता है।
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पिंडदान किस समय करें?
बताया जाता है कि ब्रह्म कपाल पर पिंडदान की सेवाएं सुबह से शुरू हो जाती हैं। वहां पंडितों के सेशन सुबह 7 बजे से शुरू हो जाते हैं। हालांकि, वहां जाने से पहले पंडित से टाइम कंफर्म करवा लें। पितृपक्ष के दौरान यहां भीड़ ज्यादा हो सकती है, इसलिए पहले से पंडित और बाकी इंतजाम के बारे में पता कर लेना ठीक रहेगा।
दिल्ली से बद्रीनाथ कैसे पहुंचें?
अगर आप दिल्ली से जा रही हैं तो सड़क के रास्ते से बद्रीनाथ पहुंचना आसान रहेगा। उत्तराखंड पर्यटन के मुताबिक, दिल्ली, हरिद्वार और ऋषिकेश से बद्रीनाथ के लिए बसें आराम से मिल जाती हैं। दिल्ली से बद्रीनाथ की बस करीब 2000 से शुरू हो जाती हैं। हालांकि, यह बस के हिसाब से करीब 4 से 5000 की भी हो सकती है। आने-जाने का बस खर्च लगभग 6 से 7000 प्रति व्यक्ति हो सकता है। किराया तारीख और बस के हिसाब से बदल भी जाता है। अगर आप पहले ऋषिकेश पहुंचना चाहती हैं तो वहां से भी बद्रीनाथ के लिए बसें मिलती है।
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ट्रेन से जाना है तो क्या करें?
बद्रीनाथ में कोई रेलवे स्टेशन नहीं है। ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से बद्रीनाथ करीब 297 किलोमीटर दूर है, जबकि देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट करीब 317 किलोमीटर दूर है। इसके बाद सड़क के रास्ते बद्रीनाथ जाना पड़ता है। इसलिए ट्रेन से जाने वालों के लिए बेस्ट रहेगा कि पहले ऋषिकेश पहुंचें और वहां से बस या टैक्सी लेकर बद्रीनाथ जाएं।
रहने का कितना खर्च आएगा?
बद्रीनाथ में ठहरने का खर्च तारीख, कमरे और होटल के हिसाब से काफी बदल जाता है। यहां आपको 1200 से 1500 तक के स्टे मिल जाएंगे। वहीं मिड-रेंज होटल करीब 2500 से 4000 रुपये तक जा सकते हैं। हालांकि, बुकिंग के समय आप रेट चेक जरूर कर लें।
पिंडदान का कितना खर्च आएगा?
पिंडदान की फीस हर पंडित या सेवा के हिसाब से एक जैसी नहीं होती है। अनुमानित कीमत करीब 11,000 हो सकती है। हालांकि, वहां जाकर आपको रेट पता करना होगा, क्योंकि हर राेज यहां एक जैसा रेट नहीं होता है।
बद्रीनाथ जाने से पहले ये बातें जरूर ध्यान रखें
अगर आप बद्रीनाथ जा रही हैं तो पहले यह देख लें कि बद्रीनाथ यात्रा आपके जाने वाले समय में खुली है या नहीं। यह इलाका सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण लंबे समय तक बंद रहता है। इसलिए-
- पितृपक्ष में जाने पर पहले से पिंडदान की व्यवस्था के बारे में पता कर लें।
- पंडित से पिंडदान की पूरी फीस पहले पूछ लें।
- सामग्री फीस में शामिल है या अलग से लेनी होगी, यह भी पूछें।
- बस और होटल की कीमत तारीख के साथ बदल सकती है।
- पहाड़ी रास्ते को देखते हुए यात्रा का समय थोड़ा ज्यादा रखकर चलें।
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- बद्रीनाथ धाम कब खुलता है?
- बद्रीनाथ धाम के कपाट हर साल अक्षय तृतीया के आसपास (अप्रैल-मई में) खुलते हैं और कार्तिक पूर्णिमा (नवंबर) में बंद हो जाते हैं।
- पिंडदान में कितना समय लगता है?
- ब्रह्म कपाल पर पिंडदान और तर्पण की पूजा पूरी करने में आमतौर पर 1 से 2 घंटे का समय लगता है।
- क्या पिंडदान के लिए अग्रिम बुकिंग जरूरी है?
- मंदिर दर्शन के लिए ई-पास/रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होता है, लेकिन पिंडदान की सेवा के लिए आप वहां पहुंचकर भी पंडित तय कर सकते हैं।
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