क्या है सॉफ्ट और स्पंजी इडली के पीछे का राज? जानें बैटर में उठने वाले खमीर का खेल
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इडली न केवल स्वाद में बेहतरीन होती है, बल्कि पचाने में भी सबसे आसान मानी जाती है। अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि घर पर बनाई गई इडली बाहर जैसी रुई जैसी नरम और फुली हुई नहीं बनती। असल में, परफेक्ट इडली बनाना कोई चमत्कार नहीं, बल्कि एक साइंस है। जब तक आप चावल और उड़द दाल के सही मिश्रण और फर्मेंटेशन यानी खमीर उठने की वैज्ञानिक प्रक्रिया को नहीं समझेंगे, तब तक मनचाहा स्वाद पाना मुश्किल होता है। जानते हैं, इसके बारे में...
इडली के फर्मेंटेशन यानी खमीर का साइंस
बता दें कि चावल और उड़द दाल से बनी सॉफ्ट इडली को बनाने से पहले इसके मिश्रण में खमीर उठना जरूरी है-
चावल और उड़द दाल का सही संतुलन
इडली बनाने में केवल दो मुख्य सामग्रियां इस्तेमाल होती हैं, चावल और बिना छिलके वाली उड़द की दाल। इन दोनों का अपना अलग और अहम रोल होता है।
- चावल की भूमिका: चावल इडली को अच्छी शेप देता है।
- उड़द दाल का जादू: उड़द की दाल इडली को हल्का और स्पंजी बनाती है। इस दाल में पाए जाने वाले प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट में फर्मेंटेशन के दौरान निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) गैस को रोककर रखने की क्षमता होती है।
- सही माप: परफेक्ट इडली के लिए चावल और दाल का अनुपात 4:1 होना चाहिए। यदि आप चावल ज्यादा डाल देंगे, तो इडली सख्त बनेगी। वहीं, दाल ज्यादा होने पर इडली इतनी ज्यादा नरम हो जाएगी कि अपना आकार छोड़ देगी और टूटने लगेगी।

अलग-अलग पीसना क्यों है जरूरी?
चावल और उड़द दाल को हमेशा अलग-अलग भिगोकर अलग ही पीसना चाहिए। इसका कारण यह है कि पानी के संपर्क में आने के बाद दोनों का बर्ताव बिल्कुल अलग होता है। उड़द दाल को तब तक पीसा जाता है जब तक वह पूरी तरह चिकनी न हो जाए, जबकि चावल को थोड़ा दरदरा पीसा जाता है।
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फर्मेंटेशन के दौरान क्या होता है?
जब आप पिसे हुए बैटर को रातभर ढककर रखते हैं, तो असली जादू शुरू होता है। अनाज पर नेचुरल रूप से मौजूद सूक्ष्मजीव (Microorganisms) तेजी से बढ़ने लगते हैं।
- ल्यूकोनोस्टोक मेसेंटेरोइड्स: यह वह बैक्टीरिया है जो बैटर में खट्टापन और गैस पैदा करता है। यह दो काम करता है, पहला, लैक्टिक एसिड बनाता है, जिससे हल्का खट्टा स्वाद आता है और दूसरा, कार्बन डाइऑक्साइड गैस छोड़ता है, जिससे बैटर फूल जाता है।
- बैक्टीरिया और यीस्ट: जैसे-जैसे फर्मेंटेशन बढ़ता है, वैसे-वैसे वाइसेला, एंटरोकोकस और स्ट्रैपटोकोकस जैसे अच्छे बैक्टीरिया भी इसमें शामिल हो जाते हैं। इसके अलावा, सैक्रोमाइसेस/सक्रोम्यसेस यीस्ट भी घोल को हल्का करने में मदद करता है।
- नेचुरल फर्मेंटेशन: उड़द की दाल में अपने खुद के मित्र बैक्टीरिया मौजूद होते हैं इसलिए आपको अलग से कोई यीस्ट या बेकिंग सोडा डालने की बिल्कुल जरूरत नहीं होती।

फर्मेंटेशन के लिए सही माहौल
बैटर में खमीर उठाने के लिए 25 से 30 डिग्री सेल्सियस का तापमान सबसे अच्छा माना जाता है। बहुत ठंडे मौसम में फर्मेंटेशन धीमा या बंद हो जाता है, जबकि अत्यधिक गर्मी से गुड बैक्टीरिया मर सकते हैं। चावल-दाल को कम से कम 5-6 घंटे भिगोएं। पीसने के बाद बैटर को 8 से 12 घंटे तक खमीर उठने के लिए रखें। कम समय देने पर बैटर फूलेगा नहीं और ज्यादा समय रखने पर यह बहुत खट्टा हो जाएगा।
निष्कर्ष
परफेक्ट इडली बनाना किसी पहेली को सुलझाने जैसा नहीं है। एक बार जब आप अपने बैटर की जरूरत और फर्मेंटेशन के सही तापमान को समझ लेते हैं, तो इडली कभी खराब नहीं बनेगी।
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