Fri Sep 11, 2026 | Updated 09:44 PM IST

क्या है सॉफ्ट और स्पंजी इडली के पीछे का राज? जानें बैटर में उठने वाले खमीर का खेल

इडली को नरम और स्पंजी बनाने के पीछे के साइंस के बारे में इस लेख में बताया जा रहा है, जिसमें चावल-उड़द दाल का सही अनुपात और फर्मेंटेशन प्रक्रिया जरूरी है। जानतें हैं...
Updated:- 2026-08-24, 13:44 IST
soft idli

इडली न केवल स्वाद में बेहतरीन होती है, बल्कि पचाने में भी सबसे आसान मानी जाती है। अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि घर पर बनाई गई इडली बाहर जैसी रुई जैसी नरम और फुली हुई नहीं बनती। असल में, परफेक्ट इडली बनाना कोई चमत्कार नहीं, बल्कि एक साइंस है। जब तक आप चावल और उड़द दाल के सही मिश्रण और फर्मेंटेशन यानी खमीर उठने की वैज्ञानिक प्रक्रिया को नहीं समझेंगे, तब तक मनचाहा स्वाद पाना मुश्किल होता है। जानते हैं, इसके बारे में...

इडली के फर्मेंटेशन यानी खमीर का साइंस

बता दें कि चावल और उड़द दाल से बनी सॉफ्ट इडली को बनाने से पहले इसके मिश्रण में खमीर उठना जरूरी है-

चावल और उड़द दाल का सही संतुलन

इडली बनाने में केवल दो मुख्य सामग्रियां इस्तेमाल होती हैं, चावल और बिना छिलके वाली उड़द की दाल। इन दोनों का अपना अलग और अहम रोल होता है।

  • चावल की भूमिका: चावल इडली को अच्छी शेप देता है।
  • उड़द दाल का जादू: उड़द की दाल इडली को हल्का और स्पंजी बनाती है। इस दाल में पाए जाने वाले प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट में फर्मेंटेशन के दौरान निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) गैस को रोककर रखने की क्षमता होती है।
  • सही माप: परफेक्ट इडली के लिए चावल और दाल का अनुपात 4:1 होना चाहिए। यदि आप चावल ज्यादा डाल देंगे, तो इडली सख्त बनेगी। वहीं, दाल ज्यादा होने पर इडली इतनी ज्यादा नरम हो जाएगी कि अपना आकार छोड़ देगी और टूटने लगेगी।

1 - 2026-08-24T125939.213

अलग-अलग पीसना क्यों है जरूरी?

चावल और उड़द दाल को हमेशा अलग-अलग भिगोकर अलग ही पीसना चाहिए। इसका कारण यह है कि पानी के संपर्क में आने के बाद दोनों का बर्ताव बिल्कुल अलग होता है। उड़द दाल को तब तक पीसा जाता है जब तक वह पूरी तरह चिकनी न हो जाए, जबकि चावल को थोड़ा दरदरा पीसा जाता है।

यह भी पढ़ें- बिना सोडा के Idli बनेगी रुई जैसी नरम, बस फर्मेंटेशन के लिए अपनाएं ये नेचुरल तरीका

फर्मेंटेशन के दौरान क्या होता है?

जब आप पिसे हुए बैटर को रातभर ढककर रखते हैं, तो असली जादू शुरू होता है। अनाज पर नेचुरल रूप से मौजूद सूक्ष्मजीव (Microorganisms) तेजी से बढ़ने लगते हैं।

  • ल्यूकोनोस्टोक मेसेंटेरोइड्स: यह वह बैक्टीरिया है जो बैटर में खट्टापन और गैस पैदा करता है। यह दो काम करता है, पहला, लैक्टिक एसिड बनाता है, जिससे हल्का खट्टा स्वाद आता है और दूसरा, कार्बन डाइऑक्साइड गैस छोड़ता है, जिससे बैटर फूल जाता है।
  • बैक्टीरिया और यीस्ट: जैसे-जैसे फर्मेंटेशन बढ़ता है, वैसे-वैसे वाइसेला, एंटरोकोकस और स्ट्रैपटोकोकस जैसे अच्छे बैक्टीरिया भी इसमें शामिल हो जाते हैं। इसके अलावा, सैक्रोमाइसेस/सक्रोम्यसेस यीस्ट भी घोल को हल्का करने में मदद करता है।
  • नेचुरल फर्मेंटेशन: उड़द की दाल में अपने खुद के मित्र बैक्टीरिया मौजूद होते हैं इसलिए आपको अलग से कोई यीस्ट या बेकिंग सोडा डालने की बिल्कुल जरूरत नहीं होती।

1 - 2026-08-24T104933.032

फर्मेंटेशन के लिए सही माहौल

बैटर में खमीर उठाने के लिए 25 से 30 डिग्री सेल्सियस का तापमान सबसे अच्छा माना जाता है। बहुत ठंडे मौसम में फर्मेंटेशन धीमा या बंद हो जाता है, जबकि अत्यधिक गर्मी से गुड बैक्टीरिया मर सकते हैं। चावल-दाल को कम से कम 5-6 घंटे भिगोएं। पीसने के बाद बैटर को 8 से 12 घंटे तक खमीर उठने के लिए रखें। कम समय देने पर बैटर फूलेगा नहीं और ज्यादा समय रखने पर यह बहुत खट्टा हो जाएगा।

निष्कर्ष

परफेक्ट इडली बनाना किसी पहेली को सुलझाने जैसा नहीं है। एक बार जब आप अपने बैटर की जरूरत और फर्मेंटेशन के सही तापमान को समझ लेते हैं, तो इडली कभी खराब नहीं बनेगी।

यह भी पढ़ें- Idli Aloo Roll: वीकेंड पर खाने में बनाएं इडली आलू रोल, यहां देखें रेसिपी

अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

Images: magnific

Disclaimer

हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।