Fri Sep 11, 2026 | Updated 09:44 PM IST

दही-चीनी खाने की परंपरा कब और कैसे शुरू हुई? जानें इत‍िहास

हमारे यहां भारतीय घरों में कई तरह की परंपराएं नि‍भाई जाती हैं। शुभ काम पर जाने से पहले दही-चीनी ख‍िजाने की परंपरा भी उन्‍हीं में से एक है, लेक‍िन क्‍या आप जानती हैं क‍ि इसकी शुरुआत कब और कैसे हुई थी? हम आपको व‍िस्‍तार से इसके बारे में जानकारी दे रहे हैं-
Updated:- 2026-05-13, 14:22 IST
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हम सभी ने बचपन से देखा है क‍ि जब भी कोई बाहर जाता था तो उसे दही और चीनी ख‍िलाया जाता था। ये परंपरा आज भी चली आ रही है। आज भी अगर कोई परीक्षा या इंटरव्यू देने, यात्रा पर जाने, नए काम की शुरुआत करने जाता है तो उसे पहले बड़े-बुजुर्ग दही-चीनी खिलाकर ही भेजते हैं। कई लोग इसे स‍िर्फ पुरानी सोच मानते हैं, लेक‍िन ये हमारी लाइफस्‍टाइल से जुड़ी एक खास वजह भी है।

ऐसा कहा जाता है क‍ि ये परंपरा शरीर और मन, दोनों को तैयार करने के लि‍ए शुरू की गई थी। दही जो क‍ि शांत‍ि का प्रतीक माना जाता है, वहीं चीनी खाने से मन खुशर होता है। हम आपको अपने इस लेख में बता रहे हैं क‍ि दही-चीनी खाने की परंपरा आखिर कैसे शुरू हुई? आइए जानते हैं-

curd sugar benefits (2)

दही-चीनी को शुभ क्यों माना जाता है?

सबसे पहले तो ये जान लेते हैं क‍ि दही चीनी को शुभ क्‍यों माना जाता है? मेरी दादी बताती हैं क‍ि पुराने समय में लोग खाने-पीने की चीजों को सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि शरीर और मन पर उनके असर को देखकर भी इस्तेमाल करते थे। ये दही और चीनी दोनों को ही अच्छी और प्‍योर चीज माना जाता था।  

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इस परंपरा की शुरुआत कब से मानी जाती है?

माना जाता है कि ये परंपरा बहुत पुराने समय से हम भारतीयों से जुड़ी है। पुराने समय में लोग आयुर्वेद और नेचुरल चीजों पर ज्यादा व‍िश्वास करते थे। जब भी कोई किसी जरूरी काम से घर से निकलता था, तो उसे दही-चीनी खिलाई जाती थी, ताक‍ि उसका मन शांत रहे और शारीर में एनर्जी बनी रहे। धीरे-धीरे ये आदत एक परंपरा बन गई।

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curd sugar benefits (1)

सबसे पहले किन मौकों पर दही-चीनी खिलाई जाती थी?

ऐसा माना जाता है कि पहले ये परंपरा खास और जरूरी मौकों पर शुरू हुई थी। जैसे मान लीज‍िए क‍ि क‍िसी को लंबी यात्रा पर जाना है, युद्ध पर जाने वाले सैन‍िकों को ये दही और चीनी ख‍िलाई जाती थी। बड़े फैसले लेने से पहले या कोई परीक्षा देने पर इसे ख‍िलाया जाता था। इन मौकों पर दही-चीनी को अच्‍छी शुरुआत का प्रतीक माना जाता था।

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धीरे-धीरे कैसे बनी परंपरा?

मेरी दादी कहती हैं क‍ि समय के साथ ये शुभ संकेत की तरह देखा जाने लगा। वो कहती हैं क‍ि दही-चीनी खाकर न‍िकलने से काम अच्छा होता है। मन में पॉज‍िट‍िव‍िटी बनी रहती है। आज ये एक जरूरी आदत बन गई है।

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ये जानकारी स‍िर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं। हरज‍िंदगी इसकी पुष्‍टि‍ नहीं करती है। अगर आपको दही या चीनी से कोई द‍िक्‍कत है तो इसे खाने से पहले डॉक्‍टर से सलाह जरूर लें। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

Image Credit- Freepik/AI Generated

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