मुगल काल में बिना फ्रिज कैसे जमती थी कुल्फी? जानिए प्राचीन भारत का 'ठंडा' इतिहास

आज ज्यादातर लोगों को कुल्फी या आइसक्रीम खाने का मन करता है। कुछ लोग तो बाहर से खरीदकर खा लेते हैं, तो वहीं कुछ लोग घर पर बनाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब न तो बिजली थी, न फ्रिज और न ही आज जैसी कोई कूलिंग मशीन थी, तो लोग कुल्फी कैसे जमाते थे? खासकर मुगलकालीन भारत में दिल्ली और आगरा जैसी जगहाें पर जहां भीषण गर्मी पड़ती थी, यहां कुल्फी जमाना आसान नहीं रहा होगा।
बता दें कि उस समय लोगों ने बर्फ जमा करने, दूर दराज के इलाकों से लाने और इसे लंबे समय तक बचाकर रखने के तरीके खोज रखे थे। इसी बर्फ और नमक जैसी चीजों से दूध को जमाकर कुल्फी जमाई जाती थी। आइए जानते हैं कि इसका इतिहास क्या है?
मुगल बादशाहों के लिए खास चीज थी बर्फ
बताया जाता है कि मुगलकाल में बर्फ आम लोगों के घर में मिलने वाली चीज नहीं थी। खासकर गर्म इलाकों में इसे लाना और संभालकर रखना काफी मुश्किल होता था। उस समय हिमालय के पहाड़ी इलाकों, कश्मीर, हिमाचल और गढ़वाल जैसे ठंडे जगहों से बर्फ लाने की व्यवस्था की जाती थी। यानी जहां नेचुरली बर्फ मिलती थी, वहां से उसे गर्म इलाकों तक पहुंचाने की पूरी तैयारी करनी पड़ती थी।
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इतनी दूर से बर्फ दिल्ली कैसे आती थी?
अब आपके मन में यही सवाल आ रहा होगा कि पहाड़ों की बर्फ दिल्ली या आगरा जैसे शहरों तक पहुंचती कैसे थी, जहां इतनी गर्मी होती थी? आपको बता दें कि इसके लिए बर्फ को बड़े टुकड़ों में काटकर अच्छी तरह ढका जाता था। उसे कपड़े, जूट और भूसे जैसी चीजों में लपेटा जाता था ताकि गर्म हवा उस तक न पहुंचे। बर्फ को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में घोड़े, हाथी और नाव का इस्तेमाल किया जाता था।
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रास्ते में कुछ बर्फ तो पिघलना स्वाभाविक था, लेकिन उसे इस तरह ढककर रखा जाता था कि ज्यादा से ज्यादा बर्फ बची रहे। यानी आज के इंसुलेटेड बॉक्स जैसा काम उस समय भूसा, कपड़ा और दूसरी इंसुलेटिंग चीजें मिलकर करती थीं।
सिर्फ पहाड़ों से ही नहीं आती थी बर्फ
अगर आपको लगता है कि बर्फ सिर्फ पहाड़ों से लाई जाती थी, तो ऐसा नहीं है। सर्दियों में जब रातें बहुत ठंडी होती थीं, तब कुछ जगहों पर लोग खुद भी बर्फ जमाने की कोशिश करते थे। इसके लिए मिट्टी के बर्तनों में पानी भरकर उन्हें खुले आसमान के नीचे रख दिया जाता था। इसके नीचे सूखी घास या पुआल रखे जाते थे। रात की ठंड में पानी का ऊपर वाला हिस्सा जम जाता था। सुबह इस जमी हुई बर्फ को निकालकर जमा किया जाता था।
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बर्फ को महीनों तक कैसे बचाते थे मुगलकाल के लोग?
जब बर्फ लेकर आई जाती थी, ताे सबसे बड़ी टेंशन यह भी रहती थी कि उसे गर्मी से बचाया कैसे जाएं? इसके लिए खास तरह के बर्फघर बनाए जाते थे। ये अक्सर जमीन के नीचे या ऐसी जगह बनाए जाते थे जहां गर्मी न पहुंचने पाए। इनकी दीवारें मोटी होती थीं और बर्फ के आसपास भूसा, राख और कपड़े जैसी चीजों का ढेर लगाया जाता था।
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बर्फ से कुल्फी कैसे जमती थी?
सिर्फ बर्फ होने से कुल्फी नहीं जमती थी। इसके लिए दूध को धीमी आंच पर खूब देर तक पकाकर अच्छी तरह से गाढ़ा किया जाता था। इसके बाद इसमें चीनी के साथ केसर, इलायची और पिस्ता डाली जाती थीं ताकि इसका स्वाद अच्छा लगे। अब इसी दूध को लंबे धातु के माेल्ड में भरा जाता था और उसे बंद कर दिया जाता था। इसके बाद इसे बर्फ के आसपास रखा जाता था।
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नमक से आसान हो जाता था काम
ऐसा नहीं था कि सिर्फ बर्फ के आसपास सांचे काे रखने से कुल्फी जम जाती थी। बर्फ के साथ नमक का भी इस्तेमाल किया जाता था। बर्फ में नमक मिलाते ही बर्फ का तापमान जीरो डिग्री से माइनस में चला जाता है और वो बहुत ज्यादा ठंडी हो जाती थी। इतनी ठंडक में कुल्फी के मोल्ड में भरा दूध धीरे-धीरे जमने लगता था। कुल्फी जमाते समय मोल्ड को कभी-कभी घुमाया या हिलाया भी जाता था। इससे चारों तरफ से कुल्फी जम जाती थी।
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