शिमला के इस मंदिर में संजीवनी लाते समय रुके थे संकटमोचन हनुमान, दर्शन करने जरूर जाएं

शिमला में एक ऐसा मंदिर है, जिसके बारे में आज भी ज्यादा लोग नहीं जानते हैं। शिमला घूमने जाने वाले लोग पहाड़ों का खूबसूरत नजारा, बर्फबारी और फेमस टूरिस्ट स्पॉट्स घूम आते हैं, लेकिन इस मंदिर में दर्शन करने के बारे में सोचते भी नहीं। शिमला की सबसे ऊंची पहाड़ी जाखू हिल पर स्थित जाखू मंदिर भगवान हनुमान जी को समर्पित है। पहाड़ों के बीच स्थित यह मंदिर आध्यात्मिक शांति का अनुभव तो करवाता ही है, साथ ही इसका इतिहास भी भगवान राम से जुड़ा हुआ है। आप भी अगर शिमला घूमने जा रही हैं, तो एक बार इस मंदिर के दर्शन करने जरूर जाएं। यह मंदिर कहां है और आप कैसे पहुंच सकती हैं, इसके बारे में हम इस आर्टिकल में विस्तार से जानकारी देंगे।
शिमला का जाखू मंदिर क्यों है खास?
माना जाता है कि हनुमान जी लक्ष्मण जी के लिए संजीवनी बूटी लेने हिमालय जा रहे थे, तब इस जगह पर उनकी मुलाकात ऋषि याकू से हुई थी। इस स्थान पर उनके चरण पड़े थे, इसलिए यहां उनका ऐतिहासिक मंदिर स्थापित किया गया। मंदिर परिसर में भगवान हनुमान जी की विशाल प्रतिमा स्थापित है, जो दूर से ही दिखाई देती है।
शिमला में जाखू मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में जाखू हिल पर स्थित है। इस हील को सबसे ऊंची पहाड़ियों में से एक माना जाता है। यह मंदिर लगभग 8048 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। साल 2010 में यहां 108 फीट की हनुमान प्रतिमा स्थापित की गई।

शिमला के जाखू मंदिर कैसे जाएं?
शिमला शहर से जाखू मंदिर पहुंचना काफी आसान है। ऐसा इसलिए, क्योंकि आप मॉल रोड से शेयरिंग कैब लेकर सीधे मंदिर तक पहुंच सकती हैं। शिमला बस स्टैंड से भी कैब या लोकल वाहन चलते हैं।
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जाखू मंदिर कैसे पहुंचे?
- आप पैदल ट्रेक करके भी जा सकती हैं। शिमला से मंदिर की दूरी लगभग 2 किमी है। रास्ते में आपको देवदार के पेड़, ठंडी हवा और शिमला शहर के खूबसूरत नजारा देखने को मिलेगा।
- इसके अलावा आप रोपवे से भी जा सकती हैं। द रिज के पास से रोपवे लेकर कुछ ही समय में मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
- मॉल रोड से दूरी लगभग 2 किमी है। शिमला रेलवे स्टेशन से लगभग 3 किमी और शिमला एयरपोर्ट से लगभग 22 किमी का सफर करना होगा।
मंदिर जाने का सही समय
मंदिर दर्शन के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि इस समय भीड़ कम होती है और मौसम भी सुहावना रहता है। पैदल ट्रेक करने का सोच रही हैं, तो सुबह जाना अच्छा रहेगा। रास्ता आरामदायक है, इसलिए आपको परेशानी नहीं होगी।
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- मंदिर सुबह 7 बजे से रात 8 बजे तक खुला रहता है।
- यात्रा के दौरान अपना सामान बंदरों से बचाकर रखें। खाने की चीजें हाथ में लेकर न चलें।
- बारिश या सर्दियों में रास्ते पर फिसलन हो सकती है, इसलिए जरूरी सामान साथ लेकर जाएं।
यात्री ध्यान रखें कि मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको लगभग 250 से 300 सीढ़ियां चढ़नी पड़ेगी। हालांकि, यात्रियों की सुविधा के लिए एस्केलेटर की सुविधा भी दी गई है। मंदिर के मेन गेट से आप एस्केलेटर ले सकती हैं।
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Image Credit: MAGNIFIC
- क्या जाखू मंदिर से शिमला का व्यू दिखाई देता है?
- हां, यह ऊंचाई पर स्थित है, इसलिए यहां से आपको खूबसूरत नजारा देखने को मिलेगा।
- क्या जाखू मंदिर से शिमला का व्यू दिखाई देता है?
- हां, यह ऊंचाई पर स्थित है, इसलिए यहां से आपको खूबसूरत नजारा देखने को मिलेगा।
- जाखू मंदिर का नाम जाखू क्यों पड़ा?
- माना जाता है कि इस जगह का नाम ऋषि याकू के नाम पर पड़ा। वह इस मंदिर के पास ही रहते थे।
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