फास्ट फूड की भीड़ में गुम हो रही बुंदेलखंड की ठडूला, स्वाद ऐसा जिसे भूलना मुश्किल

आज के समय में बर्गर-पिज्जा और नूडल्स का क्रेज इतना बढ़ गया है कि लोग पुराने पारंपरिक व्यंजनों को भूल गए हैं। मम्मियां अगर कभी-कबार इन्हें बना दें, तो बच्चों का ही नहीं बल्कि बड़ों का भी मुंह बन जाता है। अब ऐसे में धीरे-धीरे पुराने देसी खान-पान बहुत पीछे छूट गए हैं। इन्हीं में से एक है ठडूला। एक समय था जब बुंदेलखंड के हर घर में त्योहारों और खास मौकों पर ठडूला की खुशबू महकती थी, लेकिन आज की युवा पीढ़ी इस पारंपरिक स्वाद से धीरे-धीरे दूर होती जा रही है। यह डिश स्वाद में इतनी लाजवाब होती है कि इसके आगे अच्छे खासे पकवान भी फीके पड़ जाते है। आज के इस लेख में हम आपको बुंदेलखंड की इस लुप्त होती स्वाद से भरी ठडूला की खासियत के बारे में बताने जा रहे हैं।
क्या है ठडूला और कैसे बनती है यह डिश?
बुंदेलखंड की ठडूला बनाने में उड़द की दाल, चावल के आटे, हिंग, अजवाइन और हरी मिर्च का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद इन सभी चीजों का मिश्रण तैयार किया जाता है। फिर छोटे-छोटे टिक्की के आकार में बेलकर धीमी आंच पर सुनहरा और करारा होने तक तला जाता है। दाल और मसालों का स्वाद इतना गजब का होता है कि एक बार खा लिया तो बार-बार खाने का मन करेगा।

इसे भी पढ़ें- Traditional Indian Wedding Dishes: शादी में जरूर परोसें ये 5 पारंपरिक व्यंजन, हमेशा याद रखेंगे मेहमान
ठडूला सेहत के लिए भी फायदेमंद
बाजार के प्रोसेस्ड और मैदा वाले फास्ट फूड की तुलना में ठडूला काफी सेहतमंद है। उड़द दाल से भरपूर होने के कारण इसमें अच्छी मात्रा में प्रोटीन और फाइबर होता है। इसमें इस्तेमाल होने वाले देसी मसाले जैसे अजवाइन और हींग पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करते हैं, जिससे यह स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी ध्यान रखती है।

आधुनिक खान-पान में लुप्त होता देसी स्वाद
फास्ट फूड का क्रेज बढ़ने के कारण ठडूला बनाने की पारंपरिक कला अब केवल बुजुर्ग महिलाओं या खास ग्रामीण इलाकों में ही मिलती है। हालांकि, अब यह डिश गांवों में भी तीज-त्योहार या किसी खास मौके पर ही बनाई जाती है। यह कोई एक व्यजंन नहीं है, जो हमारी थाली से गायब हो रहा है बल्कि ऐसी तमाम डिशेज है, जिनका शायद अब हमें नाम भी नहीं है।
इसे भी पढ़ें- दीमक-मधुमक्खी से लेकर घोंघा तक... भारत के इन राज्यों में चटखारे लेकर खाई जाती हैं कीड़ों से बनी डिशेज
सांस्कृतिक धरोहर और खान-पान की विविधता को बचाए रखने के लिए इन पारंपरिक रेसिपीज को फिर से अपनी थाली का हिस्सा बनाएं। साथ ही अगर आपको यह लेख अच्छा लगा तो इसे शेयर करें। इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़े रहें वेबसाइट हर जिन्दगी के साथ
Image Credit- Shutterstock
हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।