Wed Oct 7, 2026 | Updated 10:56 PM IST

अग्नि परीक्षा की अनूठी परंपरा, जानिए भारत के इस रहस्यमयी त्यौहार के पीछे की कहानी

भारत के तमिलनाडु और दक्षिण भारत में एक खास त्योहार मनाया जाता है। इसे थिमिथी के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं इस अनोखी परंपरा के बारे में।
Updated:- 2026-10-07, 21:31 IST
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भारत शुरू से ही अपनी अनोखी मान्यताओं और अद्भुत सांस्कृतिक परंपराओं के लिए मशहूर है। देश के अलग-अलग हिस्सों में कई ऐसे त्योहार मनाए जाते हैं, जिनके बारे में जानकार लोग हैरान रह जाते हैं। ऐसी ही एक रहस्यमयी परंपरा है 'अग्नि परीक्षा'। जी हां, तमिलनाडु में मनाए जाने वाले 'थिमिथी उत्सव' के दौरान भक्त जलते हुए अंगारों की क्यारी पर नंगे पैर चलते हैं। पहली नजर में देखने पर यह परंपरा जानलेवा लगती हैं।

तमिलनाडु का थिमिथी उत्सव

मान्यता है, कि अग्नि परीक्षा देने के बाद भी भक्तों के पैरों में न तो कोई छाला पड़ता है और न ही जलन होती है। अगर आप भी इस परंपरा के बारे में जानना चाहती हैं, तो आइए जानते हैं भारत के इस अनोखे और रहस्यमयी त्योहार के बारे में।

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थिमिथी उत्सव और इसका इतिहास

थिमिथी त्यौहार को महाभारत की कथा और द्रौपदी से जोड़ा जाता है। धार्मिक न्यास के आधिकारिक पोर्टल और पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, महाभारत के युद्ध के अंत में कौरवों का विनाश हुआ, तब द्रौपदी ने अपनी पवित्रता साबित करने के लिए जलती हुई आग पर नंगे पैर चलकर अग्नि परीक्षा दी थी।

अंगारों पर चलने के बाद भी द्रौपदी को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुंचा और वे ताजे फूल की तरह दमकती हुई बाहर आईं। इसी पौराणिक घटना को ध्यान में रखते हुए हर साल तमिल कैलेंडर के आईप्पसी महीने में यानी अक्टूबर से नवंबर के बीच में द्रौपदी अम्मन मंदिरों में थिमिथी उत्सव मनाया जाता है।

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अंगारों पर कैसे होती है अग्नि परीक्षा?

तमिलनाडु सरकार के पर्यटन विभाग के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार थिमिथी उत्सव के दौरान भक्त द्रौपदी को मां दुर्गा का ही अवतार मानकर उनकी पूजा करते हैं। अग्नि परीक्षा से पहले वे कई दिनों का कठिन उपवास रखते हैं और केवल फलाहार करते हैं। द्रौपदी मंदिर में एक लंबी क्यारी खोदी जाती है, जिसे लकड़ी के लट्ठों से भरकर आग लगाई जाती है। जब यह अंगारों में बदल जाती है, तब पूजा-अर्चना शुरू होती है।

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दूध से भरे कुंड में पैर डुबाते हैं भक्त

परीक्षा से पहले भक्त तालाब में नहाकर पैरों व शरीर पर हल्दी और नीम की पत्तियों का लेप लगाते हैं। इसके अलावा हाथों में नीम की पत्तियां और कलश लेकर भक्त जलते हुए अंगारों पर पैदल चलते हैं। अंगारों पर चलकर आने के बाद वे दूध से भरे एक कुंड में अपने पैर रखते हैं।

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निष्कर्ष: 'थिमिथी' उत्सव यानी अग्नि परीक्षा की यह परंपरा तमिलनाडु में बड़ी धूम धाम के साथ मनाई जाती है। मन में अटूट श्रद्धा और ईश्वर के प्रति समर्पण हो, तो अंगारे भी भक्तों के लिए फूल बन जाते हैं। अगर आप भी अभी तक इस रहस्यमयी त्योहार के बारे में नहीं जानती थी, तो उम्मीद है यह लेख आपके लिए बेस्ट होगा। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से।   

(Image Credit: Magnific)

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