ताजमहल को दुनिया के सात अजूबों में यूं ही शामिल नहीं किया गया है। यह मॉन्‍यूमेंट बेहद खूबसूरत और एतिहासिक है। यहां हर रोज हजारों लोग आते हैं और इस की सुंदरता को निहारते रह जाते हैं। मुगलों की यह जागीर अपने अंदर खूबसूरती के साथ इतिहास की भी कई बातें समेटे हुए है।

इसे निहारते हुए जब लोगों की आंखें थक जाती हैं तो वह इसके इतिहास को करीब से जानने की कोशिश करते हैं। मगर, अब ताजमहल देखने वालों को एक और आकर्षक अवसर मिलने वाला है। दरअसल ताजमहल के आसपास हेरिटेज कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है। इस कॉरिडोर को मुगल काल के चार बाग गार्डन की शैली में तैयार किया जाएगा। इससे ताजमहल देखने आने वालों को एक और स्‍थान घूमने का मौका मिलेगा। 

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Taj view garden taj mahal history

क्‍या है ताज व्‍यू गार्डन 

ताजमहल भले ही बेहद खूबसूरत मॉन्‍यूमेंट हो मगर, उसके आसपास यमुना का किनारा काफी प्रदूषित हो चुका है। इसका असर ताजमहल की खूबसूरती पर भी पड़ रहा है। ऐसा न हो इस लिए ताजमहल के पास ताज व्‍यू गार्डन बनाया जा रहा है। इस गार्डन के माध्‍यम से ताज के आसपास हरियाली बढ़ाने की योजना है और साथ ही ताजमहल को प्रदूषण से बचाने का प्रयास है। इसके साथ ही यमुना नदी के पास इकट्ठा गंदगी को भी इस तरह से साफ किया जा सकेगा और लोगों के घूमने लायक जगह बनाई जा सकेगी। ताज व्‍यू गार्डन को मुगल काल में बनाए गए चार बाग गार्डन की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। यहां तरह तरह के फूल पौधे और झूले होंगे। 

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Taj view garden tips to visit taj mahal

ताजमहल से जुड़ी इंट्रेस्टिंग बातें 

प्रसिद्ध शोधकर्ता और इतिहासकार पुरुषोत्तम नागेश ओक ने अपनी शोधपूर्ण पुस्तक 'तेजोमहालय उर्फ ताजमहल' में कई ऐसी बातें लिखी हैं जो जानने के बाद आप फिर से एक बार ताज को देखने जाना चाहेंगी। 

  • ताजमहल को मुगल बादशाह शाहजहां अपने बेगम मुमताज के लिए बनवा रहे थे। इसे बनने में 22 बरस लगे थे। मगर, इसके बनने से पहले ही मुमताज की मृत्‍यु हो गई थी। 
  • मुमताज महल की कब्र पर मूसा ने पच्चेकारी कर कुरान की आयतें लिखी हैं और पैरों की तरफ कब्र पर 'मरकद मुनव्वर अरजूमंद बानो बेगम' लिखा है। मुमताज महल की मृत्यु की तारीख ‘1040 हिजरी 1631 ईसवी’  भी कब्र पर लिखी हुई है। 
  • ऐसा भी कहा जाता है कि शाहजहां की बेगम मुमताज की मृत्‍यु बुरहानपुर में हुई थी। तब तक ताजमहल पूरा नहीं बन सका था। उनकी मृत्‍यु के बाद उन्‍हें बुरहानपुर में ही दफना दिया गया था। 6 महीने बाद जब ताजमहल बन कर तैयार हुआ तब मुमताज के शव को कब्र से निकाल कर शाहजहां अपने साथ आगरा जाए और ताजमहल में उन्‍हें दफन करवाया। 
  • आपको बता दें कि ताजमहल को बनवाने में शाहजहां ने आठ अलग-अलग देशों से सामग्री मंगवाई थीं। 

कब जाएं ताजमहल 

अगर आप ताजमहल देखना चाहते हैं तो आपको सुबह 6:30 पर ही ताजमहल पहुंच कर लाइन में लग जाना चाहिए। इस समय लाइन छोटी होती है। शुक्रवार को तो भूलकर भी आप ताजमहल न जाएं। इस दिन ताजमहल बंद होता है। यह‍दिन ताजमहल मे नमाज पढ़ने का होता है।