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मुगल बादशाह अकबर ने शहजादे सलीम को 3 साल के लिए अलवर किले में भेजा गया था, जानिए इससे जुड़ी दिलचस्प बातें

मुगल बादशाहर अकबर ने शहजादे सलीम को 3 साल के लिए निर्वासित कर दिया था और तब वह अलवर के किले में रहे थे। जानें इस किले से जुड़ी दिलचस्प बातें।
Updated:- 2020-03-08, 11:07 IST
alwar fort architecture main

अलवर राजस्थान का एक बेहद खूबसूरत शहर है और दिल्ली से के काफी नजदीक है। अलवर में कई ऐसी जगह हैं, जहां आप घूमने का मजा उठा सकती हैं। इसमें सिलीसेढ़ लेक, विनय विलास पैलेस, नंदेश्वर मंदिर, विजय मंदिर, फतेह जंग का मकबरा, जयसमंद लेक, करणी माता मंदिर, कलाकंद मार्केट, बायोडायवर्सिटी पार्क, नेहरू गार्डन, अलवर कंपनी गार्डन का नाम खास तौर पर लिया जा सकता है। यहां 1793 में बना अलवर का किला स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है। इस किले में कमल के आकार के आंगन और म्यूजियम देखने में भव्य लगते हैं। यह मूसी महारानी छतरी के करीब ही स्थित है। दिलचस्प बात यह है कि इसी अलवर किले में बादशाह अकबर के बेटे सलीम, जो आगे चलकर जहांगीर के नाम से जाने गए, को 3 साल के लिए निर्वासित कर दिया गया था। सलीम को आगरा से काफी दूर अलवर रहने के लिए क्यों भेजा गया, इन कारणों का तो पता नहीं चल पाया, लेकिन यह किला अपनी सुंदरता के कारण हमेशा चर्चा में रहा है। राजपूत राजा प्रताप सिंह ने यहां एक साल शासन किया था और अलवर में विकास कार्यों को गति दी थी। 

5 किलोमीटर के दायरे में बना है अलवर का किला

alwar fort beautiful archiecture

अलवर के किले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह लगभग 5 किलोमीटर के दायरे में बना है और इसकी चौड़ाई लगभग डेढ़ किलोमीटर की है। यह अरावली की हरी-भरी पहाड़ियों पर समुद्र तल से 1000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां पर अलग-अलग वंश का शासन रहा। इनमें खानजादा, पठान, मुगल और जाट शामिल हैं। हैरानी की बात ये है कि अलवर का किला इस शहर की सबसे प्राचीनतम इमारत है।

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बाला फोर्ट के नाम से भी मशहूर 

alwar fort in rajasthan

शहजादे सलीम ने यहां 3 साल बिताए, इसीलिए इसे 'सलीम महल' के नाम से भी जाना जाता है, हालांकि यह बात साफ नहीं है कि इसे बाला फोर्ट क्यों कहा जाता है। इस किले में जय पोल, सूरज पोल, किशन पोल चांद पोल लक्ष्मण पोल और अंधेरी गेट जैसे प्रवेश द्वार हैं, जो बेहद खूबसूरत दिखाई देते हैं।

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आर्कीटेक्चर है बेहद खूबसूरत

यहां की भारतीय इस्लामिक स्थापत्य कला बरबस ही आकर्षित करती है। यहां पर हिंदू धर्म को समर्पित पूजा स्थल भी हैं। साथ ही जल महल और निकुंभ महल की सुंदरता देखते ही बनती है। इस महल में 15 बड़े और 51 छोटे टावर हैं, जिनकी ऊंचाई लगभग 340 मीटर है। यही नहीं, यहां पर बंदूक दागने के लिए 446 जगह हैं।

 

यहां और भी ऐसे निर्माण हैं, जिनसे महल के भीतर से ही युद्ध को अंजाम दिया जा सकता है। एक टूरिस्ट के नाते आप इस महल में बहुत सी एक्साइटिंग चीजें एक्सप्लोर कर सकती हैं। अक्टूबर से मार्च तक यहां घूमने के लिए मौसम मुफीद रहता है। ऐसे में अगर आप इस महल मैं घूमने आना चाहती हैं, तो जल्द से जल्द यहां आने का की तैयारी कर लें।

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