प्रयागराज में 15 जनवरी से चार मार्च के बीच अर्ध कुंभ का आयोजित हो रहा है। गंगा यमुना सरस्वती की पवित्र त्रिवेणी में स्नान कर मोक्ष प्राप्त करने के लिए करोड़ों लोग इसमें शामिल होने जा रहे हैं। यह दुनिया के उन सबसे बड़े पर्वों में शुमार है,  जिसमें विशाल जनसमूह एक जगह पर अनुशासित तरीके से इकट्ठे होते हैं। गंगा, यमुना और सरस्वती के मिलन की ऐतिहासिक पावन स्थली प्रयागराज में 55 दिनों चलने वाले आस्था के महापर्व में नजारा देखने लायक होता है। चारों ओर घंटा-घड़ियालों के साथ गूंजते वैदिक मंत्र, भक्ति संगीत, धूप-दीप की सुगंध का वातावरण देखकर यहां आने वालों का मन श्रद्धा और उल्लास से भर जाता है। 

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प्रयागराज में आस्था का ऐसा जमघट लगने जा रहा है जिसे देखने के लिए भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर से सैलानी आयेंगे। आस्था के इस महामेले में कुछ विशेष तिथियों पर शाही स्नान और अन्य तमाम आयोजन होंगे। यहां के विश्व प्रसिद्ध पंडाल, भंडारे, धार्मिक अनुष्ठान ऐसे होंगे, जिनका अनुभव अपने आप में अनूठा होगा। साल 2019 के अर्ध कुंभ में ऐसे बहुत कुछ है, जो पहली बार देखने को मिलेगा। आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ दिलचस्प चीजों के बारे में, जिनसे अर्ध कुंभ 2019 ही शान और भी ज्यादा बढ़ जाएगी-

15 अरब रुपये का बजट

धार्मिक आयोजन अर्ध कुंभ का आगाज हर साल अखाड़ों की पेशवाई के साथ होता है। गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में नागा साधु शाही स्नान करते हैं। विशाल धार्मिक आयोजन में महाशिवरात्रि तक साधु संतों के शिविरों और तंबुओं में हवन और पूजा अर्चना चलती रहती है।

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अर्ध कुंभ 2019 के आकर्षण

  • प्रयागराज तक पहुंचने के लिए रेलवे 800 विशेष ट्रेन चलाने जा रहा है, जिनमें से 622 ट्रेनें उत्तर-मध्य रेलवे की ओर से चलाने की योजना है। वहीं पूर्वोत्तर रेलवे 110 ट्रेनें और उत्तर रेलवे 68 ट्रेनें चलाएगा।
  • कुंभ में इस बार श्रद्धालुओं के लिए लग्जरी टेंट में ठहरने की व्यवस्था की जा रही है। बजट के अनुसार डीलक्स, सुपर डीलक्स या सुइट चुने जा सकते हैं।
  • पहली बार अर्ध कुंभ का विहंगम दृश्य देखने के लिए हेलिकॉप्टर व्यू और लेजर शो भी होंगे, जो अपने आप में काफी खास होंगे।
  • अर्ध कुंभ के मौके पर एयर इंडिया कई शहरों से प्रयागराज के बीच विशेष उड़ानों का संचालन करेगी।
  • यातायात सुगम बनाने के लिए तकरीबन 250 किमी तक नई सड़कों का निर्माण किया गया है।
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ये है पौराणिक मान्यता

कुम्भ का अर्थ है कलश। माना जाता है कि देवासुर संग्राम के बाद देव और दानव समुद्र मंथन के लिए सहमत हो गए थे। मंथन से चौदह रत्नों की प्राप्ति हुई, जिन्हें परस्पर बांट लिया गया, लेकिन अमृत कलश को लेकर विवाद हो गया। तब भगवान विष्णु ने स्वयं मोहिनी रूप धारण कर सबको अमृत-पान कराने की बात कही और अमृत कलश का दायित्व इंद्र के पुत्र जयंत को सौंप दिया। जब जयंत दानवों से अमृत की रक्षा करने के लिए भाग रहे थे, तभी अमृत की बूंदे पृथ्वी पर चार स्थानों पर गिरीं। हरिद्वार, नासिक, उज्जैन और प्रयागराज। चूंकि विष्णु भगवान की आज्ञा से सूर्य, चंद्र, शनि एवं बृहस्पति भी अमृत कलश की रक्षा कर रहे थे और विभिन्न राशियों (सिंह, कुम्भ एवं मेष) में विचरण के कारण ये सभी कुंभ पर्व के द्योतक बन गये। जयंत को अमृत कलश को स्वर्ग ले जाने में 12 दिन लगा। देवताओं का एक दिन पृथ्वी के एक वर्ष के बराबर माना गया है। इसी से वर्णित स्थानों पर ही 12 वर्षों में कुंभ मेले का आयोजन होता है।

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इन महत्वपूर्ण तिथियों पर होंगे कुंभ स्नान

  • मकर संकांति - 14 एवं 15 जनवरी 2019 
  • पौष पूर्णिमा- 21 जनवरी 2019
  • पौष एकादशी स्नान- 31 जनवरी 2019 
  • मौनी अमावस्या- 4 फरवरी 2019 
  • बसंत पंचमी- 10 फरवरी 2019 
  • माघी एकादशी- 16 फरवरी 2019 
  • माघी पूर्णिमा 19 फरवरी 2019 
  • महाशिवरात्रि 04 मार्च 2019

मकर संक्रांति

अर्ध कुंभ की शुरुआत मकर संक्रांति के दिन पहले स्नान से होगी। इसे शाही स्नान और राजयोगी स्नान के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन संगम, प्रयागराज पर अलग-अलग अखाड़ों के संत की पहले शोभा यात्रा निकलते हैं, फिर शाही स्नान का आयोजन होता है। मकर संक्रांति पर सूर्य का धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश होता है। इस दिन स्नान के बाद सूर्य को जल चढ़ाकर चावल और तिल को स्पर्श कर उसे दान में दिया जाता है। इस दिन कहीं उड़द दाल की खिचड़ी और कहीं-कहीं दही-चूड़ा खाना शुभ माना जाता है। माना जाता है कि उत्तरायण में सूर्य नारायण की पूजा अर्चना से विशेष लाभ होता है।

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पौष पूर्णिमा

पौष पूर्णिमा 21 जनवरी को है और इस दिन अर्ध कुम्भ में दूसरा बड़ा आयोजन होगा। पौष पूर्णिमा के दिन से ही माघ महीने की शुरुआत होती है। माना जाता है कि इस दिन स्नानके बाद दान-पुण्य करेने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन से सभी शुभ कार्यों की शुरुआत हो होती है। साथ ही इस दिन से कल्पवास भी शुरू हो जाता है।

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पौष एकादशी

पौष एकादशी पर अर्ध कुम्भ में तीसरे बड़े शाही स्नान का आयोजन होगा। 31 जनवरी को त्रिवेणी के घाट पर स्नान के बाद दान-पुण्य का विशेष महत्व होगा।

मौनी अमावस्या

कुंभ मेले में चौथा शाही स्नान मौनी अमावस्या यानि 4 फरवरी को होगा। इसी दिन कुंभ के पहले तीर्थाकर ऋषभ देव ने अपनी लंबी तपस्या का मौन व्रत तोड़ा था और संगम के पवित्र जल में स्नान किया था। इसलिये मौनी अमावस्या के दिन कुंभ मेले में बहुत बड़ा मेला लगता है, जिसमें लाखों की संख्या में भीड़ उमड़ती है।

बसंत पंचमी

10 फरवरी को बसंत पंचमी यानि माघ महीने की पंचमी तिथ‍ि को मनाई जायेगी। बसंत पंचमी के दिन से ही बसंत ऋ‍तु शुरू हो जाती है। कड़कड़ाती ठंड के सुस्त मौसम के बाद बसंत पंचमी से ही प्रकृति की छटा देखते ही बनती है। वहीं, हिंदू मान्‍यताओं के अनुसार इस दिन देवी सरस्‍वती का जन्‍म हुआ था। इस दिन पवित्र नदियों में स्‍नान का व‍िशेष महत्‍व है। पवित्र नदियों के तट और तीर्थ स्‍थानों पर बसंत मेला भी लगता है।

माघी एकादशी

16 फरवरी को सातवां शाही स्नान माघी एकादशी को होगा। यह दिन पुराणों में बहुत अहम माना गया है। इस दिन दान देने से पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

माघी पूर्णिमा

19 फरवरी को छठां शाही स्नान माघी पूर्णिमा को होगा। माघ पूर्णिमा पर किए गए दान-धर्म और स्नान का विशेष महत्व है। पुराणों में कहा गया है कि माघी पूर्णिमा पर खुद भगवान विष्णु गंगा जल में निवास करने आते हैं। माना जाता है कि पूरे महीने स्नान-दान ना भी किया हो और केवल माघी पूर्णिमा के दिन तीर्थ में स्नान किया जाए तो पूरे माघ मास के स्नान का पूर्ण फल मिलता है।

महाशिवरात्रि

कुंभ मेले का आखिरी शाही स्नान 04 मार्च, 2019 को महा शिवरात्रि के दिन होगा। भगवान शिव और माता पार्वती के इस पावन पर्व पर अर्ध कुंभ में आए सभी भक्त संगम में श्रद्धा की डुबकी लगाते हैं। मान्यता है कि इस पर्व की देवलोक में भी प्रतीक्षा होती है।

अर्ध कुंभ में स्नान और दान के महत्व पर पंडित भानु प्रताप नारायण मिश्र ने कहा है, 'तीर्थराज प्रयागराज में माघ महीने में देवता विचरण करने आते हैं। इस समय में तपस्या करने से जीवन आनंद में बीतता है। माघ का पूरा महीना तपस्या के लिए उपयुक्त माना जाता है। इस समय में सूर्योदय से पहले स्नान कर लेना चाहिए। अर्ध कुंभ में प्रयागराज राज रहे हैं तो वहां गरीब लोगों को तिल और शक्कर का दान करें। इसके अलावा उन्हें सर्दी के कपड़े जैसे कि स्वेटर टोपी, जुराबें आदि दान करें। इससे श्रद्धालुओं को पुण्य की प्राप्ति होती है।'