मौसम कोई भी हो, लेकिन बाहर निकलने से पहले आपको सनस्क्रीन जरूर लगानी चाहिए। बारिश या सर्दी के मौसम में धूप या सूरज न दिखने से हमें लगता है कि हमें कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा, लेकिन यूवी किरणें हमारी त्वचा को नुकसान पहुंचा ही देती हैं। लेकिन आप किस तरह की सनस्क्रीन लगाती हैं,ये भी महत्वपूर्ण है। सनस्क्रीन में कितना एसपीएफ है, वह वाटरप्रूफ है या नहीं इस बारे में आपको कितनी जानकारी है?

दिल्ली बेस्ड मेकअप आर्टिस्ट निकिता शर्मा कहती हैं, 'मेकअप करने से पहले आप मॉइश्चराइजर लगाती ही हैं, तो सनस्क्रीन भी जरूर लगानी चाहिए। अब तो ऐसे मेकअप प्रोडक्ट्स भी आने लगे हैं, जो एसपीएफ इन्फ्यूज्ड होते हैं। सनस्क्रीन हमारी त्वचा को बचाती है। हमेशा अपनी त्वचा के प्रकार के आधार पर सनस्क्रीन चुनें। ऑयल-बेस्ड सनस्क्रीन रूखी त्वचा के लिए अच्छी होती है, क्योंकि वो आपकी त्वचा को हाइड्रेट करती हैं। अगर आपकी त्वचा तैलीय है या आपको मुंहासे होते रहते हैं, तो वॉटर या जेल-बेस्ड सनस्क्रीन का उपयोग करना बेहतर होता है, क्योंकि ऑयल-बेस्ड सनस्क्रीन लोशन से ब्रेकआउट्स हो सकते हैं।' सनस्क्रीन कैसे लें और किन चीजों को ध्यान में रखें, उन्हें जानने के लिए यह आर्टिकल पढ़ें।

एसपीएफ का रखें ध्यान

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एसपीएफ सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। आपका सनस्क्रीन लोशन में मौजूद एसपीएफ यह सुनिश्चित करता है कि सनबर्न करने वाली अल्ट्रावायलेट बी रेज़ को ब्लॉक हो और आपकी त्वचा को नुकसान न पहुंचाए। एसपीएफ रेटिंग जितनी अधिक होती है, आपकी त्वचा को सनबर्न होने में उतना अधिक समय लगता है।

नॉन-कॉमेडोजेनिक हो प्रोडक्ट

non comedogenic sunscreen lotion

यदि आपकी त्वचा मुंहासे वाली है, तो यह जांचना महत्वपूर्ण है कि उत्पाद गैर-कॉमेडोजेनिक है या नहीं। नॉन-कॉमेडोजेनिक टर्म हर उस स्किन केयर प्रोडक्ट पर लेबल होता है, जिसका टेस्ट होने के बाद यह प्रूवन होता है कि वह किसी तरह का पोर ब्लॉकेज नहीं करेंगे। ऑयली स्किन वालों को ब्लॉक पोर्स के कारण मुंहासों की शिकायत रहती है। इसलिए आपकी सनस्क्रीन भी नॉन-कॉमेडोजेनिक होनी चाहिए।

PA+ होना भी जरूरी

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सनबर्न से बचना अलग बात है और यूवीए किरणों से बचना अलग बात है। सनस्क्रीन में एसफीएफ और PA+ दोनों हों, तो वह आपको ज्यादा प्रोटेक्शन देती है। PA+ का मतलब होगा कि वह सनस्क्रीन लोशन आपको नुकसानदायक यूवीए रेज से भी बचाएगा। PA के बाद ज्यादा + रेटिंग होगी, तो मतलब आपकी प्रोटेक्शन भी उतनी ही अच्छी होगी।

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अधिक सुरक्षा के लिए ब्रॉड स्पेक्ट्रम 

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जैसा कि हम जानते हैं कि सूर्य की किरणें दो प्रकार की होती हैं, यूवीए और यूवीबी। यूवीए किरणें उम्र के धब्बे और झुर्रियां पैदा करने के लिए जिम्मेदार होती हैं जबकि यूवीबी जलने का कारण बनती है। ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन दोनों प्रकार के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करते हैं। यूवीए का माप पीए रेटिंग है जो प्लस संकेतों द्वारा निर्धारित किया जाता है और यूवीबी को एसपीएफ यानि सन प्रोटेक्शन फैक्टर में मापा जाता है।

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इन्हें भी रखें ध्यान

basics of suncreen you should know

  • हमेशा घर से निकलने से करीब 10-15 मिनट पहले सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें।
  • ज्यादा सुरक्षा के लिए हर 2-3 घंटे में सनस्क्रीन दोबारा लगाएं।
  • पानी में रहने के बाद लगभग 40-80 मिनट के लिए वॉटर रेसिस्टेंट सनस्क्रीन प्रभावी होती है, इसलिए बाहर निकलने के बाद इसे फिर से लगाएं।
  • धूप में बाहर निकलने से पहले हैट और चश्मा जरूर लगाएं। साथ ही कॉटन के स्कार्फ का इस्तेमाल कर सकती हैं।
  • घर के अंदर रहने पर भी सनस्क्रीन लोशन जरूर लगाएं। 

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