तपती गर्मी के बाद जब बारिश का सुहावना मौसम आता है, तो अपने साथ तरावट लेकर आता है। मगर इस मौसम में उमस के कारण त्वचा बहुत अधिक प्रभावित होती है और त्वचा से जुड़ी तरह-तरह की परेशानियां उत्पन्न होने लगती हैं। इस मौसम में होने वाली स्किन प्रॉब्‍लम्‍स से केवल चेहरे की त्वचा पर ही बुरा असर नहीं पड़ता है बल्कि शरीर के अन्य भागों पर भी स्किन रिलेटेड प्रॉब्‍लम्‍स की झलक देखी जा सकती है। 

इस बारे में हमने त्वचा विशेषज्ञ डॉक्टर अमित बांगिया से बातचीत की और जाना कि मानसून सीजन में त्वचा संबंधित कौन सी परेशानियां हो सकती हैं और उनसे छुटकारा पाने के उपाय क्या हैं। 

डॉक्टर अमित कहते हैं, 'मानसून में बरसात का पानी और पसीना, ये दोनों ही त्वचा के लिए घातक होते हैं। इन दोनों के कारण ही त्वचा से संबंधित दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।'

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स्किन फंगल इंफेक्‍शन 

डॉक्टर बांगिया कहते हैं कि बरसात के मौसम में स्किन फंगल इंफेक्‍शन सबसे कॉमन प्रॉब्लम है और अमूमन सभी लोगों को किसी न किसी रूप में इस परेशानी से गुजरना पड़ता है। डॉक्टर अमित कहते हैं, 'मानसून में एयर में मॉइश्चर होने के कारण फंगल इंफेक्शन की समस्या का सामना करना पड़ता है।' एक उदाहरण के तौर पर डॉक्टर अमित बताते हैं, जिस तरह मॉइश्चर के कारण ब्रेड में फंगस लग जाती है, वैसे ही त्वचा में भी इस मौसम में फंगस के कारण तरह-तरह की स्किन एलर्जी हो जाती हैं। 

कुछ बेहद कॉमन स्किन फंगस के बारे में डॉक्टर अमित बताते हैं, 'बरसात में भीगने से, गीले कपड़ों के कारण, भीगे हुए जूतों को अधिक देर तक पहनने से या फिर अत्यधिक पसीना निकलने से इस मौसम में एथलीट फुट (Athlete Foot) और जोक इच (Jock Itch) जैसे स्किन इंफेक्‍शन हो जाते हैं।' डॉक्टर इस तरह के स्किन इंफेक्‍शन को नजरअंदाज करने और सेल्फ मेडिकेशन को भी घातक बताते हैं। वह कहते हैं, ' किसी भी तरह की होम रेमेडीज और दवाओं का इस्तेमाल करने से पहले किसी त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श जरूर करें क्योंकि एक छोटी सी गलती इंफेक्‍शन को बढ़ा सकती है।' इसके अलावा डॉक्टर अमित स्किन इंफेक्‍शन होने पर एंटीफंगल डस्टिंग पाउडर का इस्तेमाल करने, टाइट कपड़े न पहनने और गीले एवं गंदे कपड़ों को पहनने से बचने की सलाह देते हैं। 

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बॉइल्स 

बॉइल्स को हिंदी में हम बालतोड़ या पस वाले फोड़े के नाम से जानते हैं। बारिश के मौसम में यह समस्या भी बहुत हो जाती है। डॉक्टर अमित इस स्किन प्रॉब्लम की वजह खराब बैक्टीरिया के पनपने को बताते हैं। वह कहते हैं, 'यह हेयर फॉलिकल्स का इंफेक्शन होता है। मॉइश्चर के कारण और गंदे कपड़े पहनने की वजह से बॉइल्स की समस्या होती है।'

इतना ही नहीं, यह समस्या सबसे अधिक डायबिटीज के मरीजों को होती है। खासतौर पर अगर आप डायबिटिक हैं और बहुत अधिक मीठी चीजें या फिर आम का सेवन कर रहे हैं, तो बॉइल्स की समस्या आपको हो सकती है। इस समस्या के समाधान के रूप में डॉक्टर अमित बताते हैं, 'केमिस्‍ट से जाकर कोई दवा न लाएं। बाजार में बहुत सारी क्रीम्‍स आती हैं, जो खास बॉइल्स की समस्या को दूर करने के लिए होती हैं, मगर उनमें स्टेरॉयड होता है। स्टेरॉयड युक्त क्रीम समस्या को कम करने की जगह उसे बढ़ा देती है। इसलिए इस तरह की प्रॉब्लम के लिए डॉक्टर हमेशा एंटीबायोटिक दवाओं को लेने की सलाह देते हैं।'

स्किन रैशेज 

बारिश के पानी में भीगने के कारण रैशेज की समस्या भी हो जाती है। ऐसा क्यों होता है? जब हमने डॉक्टर अमित से पूछा, तो उन्होंने इसका का कारण ड्राईनेस को बताया। यह काफी चौंकाने वाली बात है कि उमस के मौसम में भी त्‍वचा ड्राई होती है और उसके कारण रैशेज जैसी समस्या से जूझना पड़ता है। डॉक्टर अमित कहते हैं, 'अगर आपकी त्वचा एक्जिमा प्रोन है, तो जाहिर है आपको रैशेज की समस्या हमेशा ही रहती होगी। मगर कई बार उमस के कारण जब स्किन पोर्स ब्लॉक हो जाते हैं, तब त्वचा में ऑयल की कमी होने लगती है और वह ड्राई हो जाती है। इससे हीट रैशेज हो जाते हैं।'

इस समस्या का सबसे अच्छा इलाज डॉक्टर अमित जेल और वॉटर बेस्ड मॉइश्चराइजर का यूज करना बताते हैं। वह कहते हैं, 'खुद को जितना हो सके इस मौसम में हाइड्रेटेड रखें। साथ ही साफ-सुथरे कॉटन के कपड़े पहनें।'

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स्किन टैनिंग 

अमूमन लोग यह सोचते हैं कि बारिश के मौसम में धूप तो निकलती नहीं है, तो सनस्क्रीन लगाने की क्या जरूरत है। मगर आपको बता दें कि इस मौसम में सबसे ज्यादा स्किन टैनिंग की समस्या हो जाती है। इस बारे में डॉक्टर अमित बताते हैं, 'इस मौसम में स्किन में पिगमेंटेशन की प्रॉब्लम बढ़ जाती है, साथ ही त्वचा अधिक मेलेनिन प्रोड्यूस करने लगती है। ऐसे में स्किन टैनिंग की समस्या भी ज्यादा होने लगती है।' 

ऐसा क्यों होता है? इस बारे में डॉक्टर बांगिया बताते हैं, 'इस मौसम में पसीना बहुत निकलता है मगर जल्‍दी सूखता नहीं है, साथ ही यह पील का काम करता है और त्वचा की टॉप लेयर को निकाल देता है, जिससे वह बर्न हो जाती है। इसलिए इस मौसम में जेल बेस्‍ड 15 से 30 एसपीएफ वाली नॉन-कॉमेडोजेनिक सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए।'

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फटी एड़ियां

बारिश के मौसम में पैर यदि अधिक देर तक गीले रहते हैं या उमस के कारण उनमें बहुत अधिक पसीना आता है, तो एड़ियों के फटने की समस्या हो सकती है। ऐसे में इस मौसम में वाटरप्रूफ जूते पहने या फिर चप्पल पहने और हवा से गीले पैरों को सूख जाने दें। ऐसा करने पर एड़ियों के फटने की समस्या से आप काफी हद तक खुद को बचा सकते हैं। 

मानसून से जुड़ी यह स्किन प्रॉब्‍लम्‍स यदि आपको भी हो रही हैं, तो एक बार किसी अच्छे स्किन एक्सपर्ट से बात जरूर करें। यह जानकारी आपको पसंद आई हो, तो इस आर्टिकल को शेयर और लाइक जरूर करें। इसी तरह और भी आर्टिकल्‍स पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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