Pradosh Vrat January 2026: जनवरी के दूसरे प्रदोष व्रत पर महादेव की कृपा पाने के लिए यहां जानें संपूर्ण पूजा विधि, मंत्र और सामग्री की पूरी लिस्ट

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है और यह पूर्ण रूप से भगवान शिव को समर्पित होता है। हर महीने 2 प्रदोष व्रत होते हैं और पूरे साल में 24 प्रदोष व्रत होते हैं। हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है, लेकिन कई बार यदि द्वादशी तिथि में प्रदोष काल मिल रहा होता है तो उसी दिन प्रदोष का व्रत करना शुभ माना जाता है। यह अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल में महादेव की पूजा करने से जन्म कुंडली के बड़े-बड़े दोष भी शांत हो जाते हैं और जीवन में सुख, शांति के साथ समृद्धि बनी रहती है। इस साल जनवरी 2026 में 3 प्र्कदोष व्रत पड़ रहे हैं जिसमें से दूसरा प्रदोष व्रत 16 जनवरी को पड़ रहा है और यह शुक्रवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए इसे शुक्र प्रदोष के नाम से जाना जाएगा। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें जनवरी के दूसरे प्रदोष व्रत की पूजा विधि, पूजा की सामग्री उपवास से जुड़ी अन्य बातें।
जनवरी का दूसरा प्रदोष व्रत पूजा शुभ मुहूर्त
जनवरी 2026 का दूसरा प्रदोष व्रत 16 जनवरी 2026, शुक्रवार को है। शुक्रवार का यह प्रदोष व्रत विशेष रूप से वैवाहिक जीवन, धन-संपत्ति और मानसिक शांति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

- शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत की पूजा संध्या काल में ही की जाती है तभी उसका पूर्ण फल मिलता है।
- यदि आप आज के दिन प्रदोष काल में पूजा करती हैं तो पूजा का पूर्ण फल मिलता है।
- प्रदोष काल शाम 4:45 बजे से आरंभ होता है और इसी समय शिव पूजन करना फलदायी माना जाता है।
- इस समय भगवान शिव का अभिषेक, पूजन और आरती करना विशेष रूप से फल देता है।
- यदि आप आज व्रत कर रही हैं तो आज सबसे शुभ मुहूर्त शाम 6:22 से रात्रि 8:56 तक है।
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शुक्र प्रदोष व्रत की पूजा सामग्री
प्रदोष व्रत की पूजा के लिए कुछ विशेष सामग्रियों की जरूरत होती है। आइए जानें उसके बारे में यहां-
- शिवलिंग या शिव जी की प्रतिमा
- शुद्ध जल और गंगाजल
- दूध, दही, घी, शहद, शर्करा
- बेलपत्र, सफेद फूल, धतूरा
- चंदन, भस्म, अक्षत
- दीपक, घी या तेल
- धूप, अगरबत्ती
- नैवेद्य
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शुक्र प्रदोष व्रत की पूजा विधि
- वैसे तो प्रदोष की पूजा प्रदोष काल में ही होती है, लेकिन इस दिन आप प्रातः स्नान आदि से मुक्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- घर के मंदिर या किसी शिव मंदिर में भगवान शिव की पूजा करें। शाम को प्रदोष काल में शिवलिंग का विशेष अभिषेक करें और शिवलिंग का चंदन से लेप करें।
- शिवलिंग पूजन के लिए आप सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल चढ़ाएं। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत तैयार करके अभिषेक करें। अभिषेक के बाद शिवलिंग को गंगाजल से स्नान कराएं। इसके पश्चात चंदन और अक्षत अर्पित करें।
- भगवान शिव को सफेद फूल, बेलपत्र और धतूरा अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए यदि आप उन्हें ये सभी सामग्रियां अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है।
- पूजा के साथ आप शिव चालीसा का पाठ करें और शिव जी की आरती करें। यदि आप मंदिर में शिवलिंग की पूजा कर रही हैं तो शिवलिंग की प्रदक्षिणा जरूर करें।
प्रदोष व्रत के लिए शुभ मंत्र कौन से हैं?
प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव के मंत्रों का जाप करना विशेष फल देता है। आप शुक्र प्रदोष के दिन इनमें से किसी भी मंत्र का जप कर सकती हैं-
- ॐ नमः शिवाय
- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्
- शिवलिंगं शिवरूपं स्वात्मानं शक्तिरूपकम
यदि आप इन मंत्रों का 11, 21, 51 या 108 बार जाप करती हैं तो मानसिक शांति, रोग मुक्ति और आर्थिक समस्याओं से राहत मिलती है।
यदि आप प्रदोष का व्रत कर रही हैं तो यहां बताई पूजा विधि से व्रत करें और शिव जी के मंत्रों का जाप अवश्य करें जिससे पूजा का पूर्ण फल मिलता है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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