
सकट चौथ जिसे तिलकुट चौथ भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है। यह व्रत माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को भगवान गणेश को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से भगवान गणेश जीवन में आने वाले सभी संकटों को दूर कर देते हैं, इसीलिए इसे 'सकट' चौथ कहा जाता है। माताएं अपनी संतान की सुरक्षा और उनके उज्जवल भविष्य की कामना के लिए दिन भर निर्जला उपवास रखती हैं और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलती हैं। इस दिन विशेष रूप से तिल और गुड़ से बने 'तिलकुट' का प्रसाद बनाया जाता है जो सौभाग्य और आरोग्यता का प्रतीक माना जाता है। इस साल सकट चौथ 6 जनवरी को पड़ रही है और ऐसे में सकट चौथ के दिन गणेश जी की पूजा के साथ अगर उनके स्तोत्र का पाठ किया जाए तो इससे संतान को कई लाभ मिल सकते हैं। आइये जानते हैं इस बारे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से।
प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम्।
तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम्॥
लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च।
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्णं तथाष्टमम्॥

नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम्।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम्॥
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो॥
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विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम्॥
जपेद्गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासैः फलं लभेत्।
संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशयः॥
अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेत्।
तस्य विद्या भवेत् सर्वा गणेशस्य प्रसादतः॥
॥इति श्री नारदपुराणं संकटनाशनं महागणपति स्तोत्रम् संपूर्णम्॥
संकटनाशन गणेश स्तोत्र का सबसे बड़ा लाभ संतान की अकाल मृत्यु और दुर्घटनाओं से रक्षा करना है। भगवान गणेश को 'विघ्नहर्ता' कहा जाता है जो बच्चों के जीवन में आने वाली शारीरिक और मानसिक बाधाओं को दूर करते हैं। इस स्तोत्र के नियमित पाठ से संतान को लंबी आयु प्राप्त होती है और उनका स्वास्थ्य बेहतर रहता है। यदि बच्चा बार-बार बीमार पड़ता हो तो माता-पिता द्वारा किया गया यह पाठ उसे सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

भगवान गणेश बुद्धि और विवेक के देवता हैं। इस स्तोत्र में उनके बारह नामों का स्मरण किया गया है, जो एकाग्रता बढ़ाने में सहायक होते हैं। जो छात्र पढ़ाई में कमजोर हैं या जिनका मन पढ़ाई में नहीं लगता, उनके लिए यह पाठ स्मरण शक्ति बढ़ाने वाला माना गया है। इसके प्रभाव से संतान को सही-गलत का निर्णय लेने की समझ आती है और वे शिक्षा के क्षेत्र में उच्च सफलता प्राप्त करते हैं।
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अक्सर बच्चों को बुरी नजर या नकारात्मक शक्तियों का डर रहता है। संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करने से घर और संतान के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा बन जाता है। यह बच्चों के स्वभाव से जिद्दीपन, क्रोध और डर को कम करके उन्हें शांत और आज्ञाकारी बनाने में मदद करता है। यदि संतान के विवाह या करियर में कोई बड़ी बाधा आ रही हो तो इस पाठ के प्रभाव से वे मार्ग स्वतः ही खुलने लगते हैं।
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