Sakat Chauth Upay 2026: सकट चौथ के दिन करें ये उपाय, संतान का होगा भाग्योदय

सकट चौथ जिसे तिलकुटा चौथ या संकष्टी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाला पर्व है। यह दिन मुख्य रूप से भगवान गणेश को समर्पित है जिन्हें 'विघ्नहर्ता' कहा जाता है। माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, बेहतर स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा और कुछ विशेष उपाय करने से संतान के जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं और उनके भाग्य का उदय होता है। यह पर्व अटूट विश्वास और ममता का प्रतीक है। ऐसे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स ने हमें बताया कि सकट चौथ के दिन कौन से उपाय करने से संतान का भाग्य उदय हो सकता है और उसे स्वास्थ्य वरदान भी प्राप्त हो सकता है।
सकट चौथ के उपाय (Sakat Chauth Upay 2026)
संतान की उन्नति के लिए सकट चौथ के दिन भगवान गणेश को 21 दूर्वा की गांठें अर्पित करनी चाहिए। दूर्वा चढ़ाते समय 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करें। इसके साथ ही, अगर संतान के करियर या शिक्षा में बाधा आ रही है तो गणेश जी को शमी के पत्ते अर्पित करना भी बहुत शुभ माना जाता है। इससे बुद्धि तीव्र होती है और एकाग्रता बढ़ती है।
इस दिन तिल का विशेष महत्व है। भगवान गणेश को तिल और गुड़ से बने लड्डुओं का भोग लगाएं। पूजा के बाद इन लड्डुओं का कुछ हिस्सा गरीब बच्चों में बांट दें। दान करने से न केवल पुण्य मिलता है बल्कि संतान पर आने वाले कष्ट भी टल जाते हैं। काले तिल का दान राहु-केतु जैसे ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करने में भी मदद करता है।
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धार्मिक दृष्टि से गाय में समस्त देवी-देवताओं का वास माना गया है। सकट चौथ की सुबह स्नान के बाद गाय को गुड़ के साथ रोटी खिलाएं। अगर संभव हो तो गाय की सेवा करें और उनका आशीर्वाद लें। ऐसा माना जाता है कि गौ सेवा से पितृ दोष शांत होते हैं जिससे संतान के मार्ग में आने वाली रुकावटें खत्म होती हैं और सफलता के द्वार खुलते हैं।
अगर आपकी संतान बड़ी है तो उनसे किसी जरूरतमंद व्यक्ति को पीले वस्त्र या अनाज का दान करवाएं। अगर संतान छोटी है तो उनके हाथ का स्पर्श कराकर स्वयं दान कर दें। पीला रंग भगवान गणेश और गुरु बृहस्पति का प्रिय है जो सौभाग्य और ज्ञान का प्रतीक है। इस उपाय से संतान के व्यक्तित्व में निखार आता है और उनका भाग्य प्रबल होता है।
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रात के समय चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को दूध और जल से अर्घ्य देना अनिवार्य है। अर्घ्य देते समय अपने मन में अपनी संतान का नाम लें और उनके सुखद भविष्य की प्रार्थना करें। चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है, इसलिए यह उपाय संतान को मानसिक रूप से मजबूत बनाता है और उन्हें सही निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करता है।
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image credit: herzindagi
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