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Sakat Chauth Puja Vidhi 2026: संतान की लंबी आयु और सफलता के लिए सकट चौथ की सबसे सरल पूजा विधि, यहां पढ़ें स्‍टेप्‍स और सामग्री की लिस्‍ट

Sakat Chauth Puja Samagri List 2026: सकट चौथ पर संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए जानें सकट चौथ की सबसे सरल पूजा विधि, पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट, व्रत नियम, चंद्रमा को अर्घ्य देने का सही तरीका और शुभ उपाय। सकट चौथ पूजा विधि व सामग्री यहां विस्तार से पढ़ें।
Editorial
Updated:- 2026-01-06, 16:54 IST

Sakat Chauth 2026: हिंदू धर्म में कई तीज-त्‍योहार आते हैं, जिनमें से कुछ विशेष तौर पर संतान प्राप्ति या उसकी लंबी आयु के लिए रखे जाते हैं। सकट चौथ का व्रत भी उन्‍हीं में से एक है। हिंदू पंचांग के अनुसार माघ के महीने में कृष्‍ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर सकट चौथ का त्‍योहार मनाया जाता है। इस बार सकट चौथ 6 जनवरी को पड़ रही है। इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखने और पूजा करने से बहुत अच्‍छे फल प्राप्‍त होते हैं। हमने सकट चौथ की सबसे सरल विधि से होने वाली पूजा विधि और पूजा सामग्री के बारे में उज्‍जैन, मध्‍यप्रदेश के पंडित एवं ज्‍योतिषाचार्य मनीष शर्मा से पूछा। वह कहते हैं, " सकट चौथ के दिन चंद्र देव और गणेश जी की पूजा की जाती है। यह व्रत माताएं अपनी संतान के लिए रखती हैं। आपके बेटी हो या बेटा, यह व्रत आप उसकी लंबी आयु के लिए रख सकती हैं। इस व्रत को रखने से संतान को अच्‍छा जीवन और सफलता भी मिलती है। इस दिन व्रत और पूजा की सरल विधि है, जिसे बहुत कम सामग्री के साथ किया जा सकता है।"

चलिए पंडित जी से इस सकट चौथ की पूजा विधि और पूजा सामग्री के बारे में जानते हैं।

सकट चौथ की पूजा विधि (Sakat Chauth Puja Vidhi 2026)

सकट चौथ के दिन पूजा करने की विधि बहुत ही आसान होती है। इसे आप सरल स्‍टेप्‍स में समझ सकती हैं-

  • सकट चौथ के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर आप स्‍नान करें और साफ सुथरे वस्‍त्र पहन लें।
  • यदि आपके पास लाल रंग के वस्‍त्र हैं, तो इस दिन वही धारण करें। लाल रंग के वस्‍त्र सकट चौथ के दिन पहने जाएं तो बहुत ही शुभ माना जाता है।
  • स्‍नाना करने के बाद आपको घर पर ही अपने पूजा स्‍थल पर उत्‍तर दिशा में मुंह करके बैठना चाहिए और व्रत का संकल्‍प लेना चाहिए। इसके बाद आप गणेश जी की मूर्ति स्‍थापित करें और पूजन शुरू करें।
  • गणेश जी की पूजा में पीले वस्‍त्र, जनेऊ, चंदन, सिंदूर और पुष्‍प आदि लेकर बैठें। इसके साथ ही गणेश जी को सफेद मिठाई या मोतीचूर के लड्डुओं का भोग लगाएं।
  • सकट चौथ पर गणेश जी को शकरकंद और तिल के लड्डुओं का भी भोग चढ़ाना चाहिए। इसके अलावा गणेश जी को दूर्वा और धूप बत्‍ती आदि दिखाकर इस मंत्र का जाप करें "गजाननं भूत गणादि सेवितं, कपित्‍थ जम्‍बू फल चारू भक्षणम्। उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमाति विघ्‍नेश्‍वर पाद पंकजम्।।"
  • यह व्रत आप फलाहार और निर्जला, दोनों तरह से रख सकती हैं। यदि फलाहार रख रही हैं, तो आप दूध और दूध से बनी चीजें खा सकती हैं। इस व्रत में मूंगफली और साबूदाना भी खाया जा सकता है।
  • व्रत वाले दिन शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्‍य देने के बाद आप व्रत खोल सकती हैं।
  • कई जगह इस व्रत पर गणेश जी को बली दी जाती है। इसलिए घरों में तिल का ही बकरा बना कर आप अपनी संतार से कटवा सकती हैं।

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सकट चौथ पूजा सामग्री (Sakat Chauth Puja Samagri 2026)

सकट चौथ की पूजा में बहुत अधिक सामग्री नहीं लगती है। जिन चीजों की पूजा में आवश्‍यकता पड़ती है, वह सभी आपको घर पर ही आसानी से मिल जाएंगी। चलिए हम आपको सकट चौथ की पूजा की प्रमुख सामग्रियां बताते हैं-

  • गणेश जी की प्रतिमा या तस्वीर, जिसे सामने रखकर आपको पूजा करनी होती है।
  • लकड़ी की चौकी और उस पर बिछाने के लिए लाल कपड़ा, इसी पर आपको गणेश जी की प्रतिमा या तस्‍वीर रखनी होती है।
  • पूजा की थाली के लिए रोली, हल्दी, सिंदूर, अक्षत, जनेऊ, लाल फूल, मौली, 11 या 21 गांठें दूर्वा घास की और गणेश जी की लिए पीला वस्‍त्र जरूरी रखें।
  • गणेश जी को भोग और प्रसाद चढ़ाने के लिए तिल के लड्डू, जिसे तिलकुट भी कहा जाता है, मोदक, फल, गुड़ आदि रखा जा सकता है।
  • इसके साथ ही दीपक, घी, धूप, अगरबत्ती, गंगाजल, कलश, सुपारी, लौंग, पान का पत्ता आदि भी आपको पूजा में रखना चाहिए।
  • चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए तांबे या पीतल का लोटा, दूध, चीनी और पानी भरकर भी रख लें। इसी मिश्रण से आपको चंद्रमा को अर्घ्‍य देना चाहिए।
  • कथा के लिए सकट चौथ व्रत कथा की पुस्तक भी रख लें। आप कथा इंटरनेट पर सुन भी सकती है।

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पूजा की शुरुआत कैसे करें?

  • सबसे पहले सारी सामग्री इकट्ठा करें और फिर कलश स्‍थापना करें। गणेश जी को तिलक करें और दूर्वा अर्पित करें।
  • इसके बाद गणेश जी को फूल और माला आदि पहनाएं। तिल-गुड़ के लड्डू और मोदक का भोग लगाएं।
  • अब व्रत कथा सुनें और रात में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को दूध और जल से अर्घ्य दें।
  • इसके बाद आप अपनी संतान से काले तिल का बना बकरा कटवाएं और व्रत खोल लें।

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इस तरह से आप सकट चौथ की पूजा को पूरी विधि से साथ संपन्‍न कर सकती हैं। यह जानकारी आपकेा पसंद आई हो तो इस आर्टिकल को शेयर और लाइक जरूर करें। इसी तरह और भी आर्टिकल्‍स पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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FAQ
सकट चौथ का व्रत किसके लिए रखा जाता है?
यह व्रत संतान की लंबी आयु और उसके अच्छे जीवन के लिए माताओं द्वारा रखा जाता है। यह व्रत संतान सुख और उसकी सफलता के लिए विशेष महत्व रखता है।
सकट चौथ का व्रत किस प्रकार रखा जाता है?
व्रत निर्जला या फलाहार दोनों प्रकार से रखा जा सकता है। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, लाल या साफ-सुथरे वस्त्र पहनें और पूजा स्थल पर उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठकर संकल्प लें।
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