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Sakat Chauth kab hai 2026: 06 या 07 जनवरी कब है सकट चौथ? सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

सनातन धर्म में सकट चौथ का व्रत मुख्य रूप से संतान की दीर्घायु की कामना में किया जाता है। इस दिन चंद्रमा की पूजा करना और प्रथम पूजनीय गणेश जी की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। आइए जानें इस साल यह व्रत कब पड़ रहा है और इसका महत्व क्या है?
Editorial
Updated:- 2026-01-02, 15:32 IST

हिंदू धर्म में किसी भी व्रत-त्योहार की तरह सकट चौथ का व्रत भी बहुत फलदायी माना जाता है और यह भगवान गणेश और सकट माता को समर्पित होता है। इस दिन महिलाएं संतान की दीर्घायु की कामना में व्रत करती हैं और पूरे दिन निर्जला व्रत का पालन करती हैं। इसके बार रात के समय चंद्र दर्शन करके पूजा करती हैं और संतान की अच्छी सेहत और लंबी उम्र के लिए पूजा-पाठ करती हैं। ये व्रत बहुत कठिन माना जाता है, लेकिन इसका धार्मिक महत्व बहुत ज्यादा होता है। ऐसा कहा जाता है कि जो मां इस व्रत का पालन विधि पूर्वक करती है उसकी संतान के जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं और गणपति की विशेष कृपा बनी रहती है। यह तिथि माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें इस साल कब पड़ेगी सकट चौथ, इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और इसका महत्व क्या है।

कब है सकट चौथ 2026

इस साल माघ महीने में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी यानी कि सकट चौथ का व्रत 06 जनवरी, मंगलवार को रखा जाएगा।

  • सकट चौथ तिथि आरंभ मंगलवार, 6 जनवरी 2026
  • चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 6 जनवरी प्रातः 8:01 बजे
  • चतुर्थी तिथि समापन: 7 जनवरी प्रातः 6:52 बजे
  • वैसे तो उदया तिथि के अनुसार सकट चतुर्थी 7 जनवरी 2026 को ही है, लेकिन इसकी पूजा गोधूलि बेला से लेकर चांद निकलने तक के समय में ही जाती है, इसलिए इस 06 जनवरी को ही सकट का व्रत करना शुभ माना जा रहा है।

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सकट चौथ 2026 पूजा शुभ मुहूर्त क्या है?

सकट चौथ में कुछ विशेष मुहूर्त मिल रहे हैं। आइए जानें उनके बारे में-

  • सकट चतुर्थी के दिन ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:25 बजे से सुबह 6:25 बजे तक
  • सूर्योदय का समय: प्रातः 7:13 बजे
  • सूर्यास्त का समय: शाम 5:51 बजे
  • अमृत काल: प्रातः सुबह 10:44 बजे से दोपहर 12:16 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:11 बजे से 12:53 बजे तक
  • सर्वार्थ सिद्धि योग: प्रातः  7:13 बजे से दोपहर 12:16 बजे तक है और इस योग में पूजा, व्रत और शुभ कार्य अत्यंत फलदायी माने जाते हैं।

skat chauth ka significance

सकट चौथ का महत्व क्या है?

सनातन धर्म में भगवान गणपति की पूजा सबसे पहले की जाती है। उन्हें प्रथम पूजनीय गणपति भी कहा जाता है। मान्यता है कि इनकी पूजा के बिना कोई भी कार्य संपन्न नहीं होता है। इसी वजह से प्रत्येक महीने की चतुर्थी तिथि पर भगवान गणपति की विधि-विधान से पूजा की जाती है। वैसे तो साल के हर महीने में दो बार चतुर्थी तिथि आती है, लेकिन माघ मास की चतुर्थी विशेष रूप से बहुत महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इस चतुर्थी को सकट चौथ के नाम से जाना जाता है। यह सभी चतुर्थी तिथि में सबसे बड़ी चतुर्थी मानी जाती है।

इस दिन की गई गणपति की पूजा मुख्य रूप से संतान की प्राप्ति और संतान की लंबी उम्र की कामना को पूर्ण करने में मदद करती है। मान्यता है कि इस दिन निर्जला व्रत करने वाली महिलाओं की बच्चों से जुड़ी कोई भी समस्या दूर होती है और बच्चों की सेहत भी अच्छी बनी रहती है। पद्म पुराण के अनुसार सकट चतुर्थी व्रत के बारे में भगवान गणेश ने ही माता पार्वती को बताया था। इसलिए इसका महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है। स्त्रियां सुख, सौभाग्य, संतान की समृद्धि और परिवार के कल्याण की इच्छा से यह व्रत रखती हैं।

यदि आप भी पूरे श्रद्धाभाव से सकट चौथ का व्रत करती हैं और गणपति की पूजा करती हैं तो संतान को सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसे ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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